समुद्र में संघर्ष: तीसरे विश्वयुद्ध की आहट?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला में जो चिंगारी लगाई थी, उसकी आग अब रूस तक पहुंच गई है। अटलांटिक महासागर में इस समय सिर्फ जहाज नहीं चल रहे, बल्कि दुनिया की बड़ी ताकतों के बीच टकराव भी तेज हो गया है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: क्या वेनेजुएला पर चढ़ाई करने के बाद अमेरिका ने रूस को खुली चुनौती दे दी है? क्या दो सुपर पॉवर आपस में टकाराने वाली हैं? क्या हम तीसरे विश्वयुद्ध की ओर बढ़ रहे हैं?

ये सवाल आज इसलिए लाजमी हो गया है क्योंकि पिछले 24 घंटो में समुद्र के बीचों बीच जो घटनाक्रम हुए हैं उसने जमीन से लेकर आसमान तक को हिलाकर रख दिया है। दरअसल, अटलांटिक महासागर की लहरों के बीचों-बीच अमेरिका और रूस आमने-सामने आ गए हैं। वजह है एक तेल टैंकर जिसपर रूसी झंडा लगे होने के बावजूद अमेरिका ने अपना कब्जा जमा लिया। अमेरिका के इस कदम ने बता दिया है कि वो अपने हितों के आगे किसी भी देश की परवाह नहीं करने वाला है। फिर वो चाहे रूस हो चीन हो या कोई और देश। वहीं रूस ने अपनी पनडुब्बियों को भेजकर ये संदेश दे दिया है कि वो भी हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। तो कैसे बीते 24 घंटे में एक तेल का टैंकर जो कथित तौर से वेनेजुएला की ओर बढ़ रहा था, उसपर अमेरिका सैनिकों ने अपना कब्जा जमाया और कैसे रूसी पनडुब्बियां भी इस लड़ाई में शामिल हो गई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला में जो चिंगारी लगाई थी, उसकी आग अब रूस तक पहुंच गई है। अटलांटिक महासागर में इस समय सिर्फ जहाज नहीं चल रहे, बल्कि दुनिया की बड़ी ताकतों के बीच टकराव भी तेज हो गया है। अमेरिका ने वेनेजुएला से जुड़े एक रूसी झंडे वाले तेल टैंकर को जब्त कर लिया है। इससे साफ संदेश गया है कि जो देश अमेरिकी प्रतिबंधों को नहीं मानेंगे, उनके लिए समुद्र भी सुरक्षित नहीं रहेगा। यह सिर्फ कानून लागू करने की कार्रवाई नहीं थी, बल्कि ताकत दिखाने का एक बड़ा कदम था। जिस टैंकर को पकड़ा गया, उसका नाम मैरीनेरा है।

पहले इसका नाम वेला वन था और यह रूस के झंडे के तहत रजिस्टर्ड था। अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने करीब दो हफ्तों तक इस जहाज का पीछा किया। उत्तरी अटलांटिक महासागर में लंबे समय तक चले तनाव के बाद आखिरकार अमेरिका ने इस रूसी टैंकर को पकड़ लिया। यह ऑपरेशन आसान नहीं था, क्योंकि उसी इलाके में रूसी नौसेना के युद्धपोत और पनडुब्बियां भी मौजूद थीं। यानी दो परमाणु ताकतों का आमना-सामना हो रहा था। कोई भी छोटी गलती बड़े युद्ध में बदल सकती थी।

हालांकि अमेरिका और रूस दोनों ने कहा कि कोई सीधी सैन्य भिड़ंत नहीं हुई, लेकिन जानकार मानते हैं कि हालात बहुत तनावपूर्ण थे। यह ऐसा था जैसे दोनों तरफ के सैनिक बंदूक ताने खड़े हों और बस एक कदम की देर हो। रूसी सरकारी मीडिया ने एक तस्वीर भी जारी की थी, जिसमें एक हेलीकॉप्टर टैंकर के ऊपर उड़ता हुआ दिख रहा था। इससे साफ हो गया कि रूस इस पूरे ऑपरेशन पर नजर रखे हुए था, भले ही उसने कोई बड़ा बयान न दिया हो। आखिरकार अमेरिका ने इस टैंकर को आइसलैंड के पास समुद्र में पकड़ लिया। यह इलाका आइसलैंड और ब्रिटेन के बीच एक अहम समुद्री रास्ता है, जहां अमेरिका और उसके साथी देशों की पकड़ मजबूत मानी जाती है। इस मिशन को अमेरिकी कोस्ट गार्ड और सेना ने मिलकर अंजाम दिया।

इससे यह भी साफ हो गया कि अमेरिका इस मामले को सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक लड़ाई मान रहा है। अमेरिकी सेना की यूरोपियन कमान ने कहा कि यह जहाज अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था, इसलिए इसे जब्त किया गया। अब इस टैंकर को ब्रिटेन के समुद्री इलाके में ले जाने की तैयारी है। इस पूरे ऑपरेशन में ब्रिटेन का सहयोग बहुत अहम रहा। ब्रिटिश हवाई अड्डों का इस्तेमाल किया गया और रॉयल एयर फोर्स के निगरानी विमानों ने टैंकर की हर गतिविधि पर नजर रखी। सारी जानकारी अमेरिका को लगातार दी जाती रही। अमेरिकी यूरोपीय कमान ने बुधवार को बताया कि वेनेजुएला के तेल व्यापार से जुड़े इस रूसी टैंकर को फेडरल कोर्ट के वारंट के आधार पर पकड़ा गया है। यह कार्रवाई प्रतिबंधों के उल्लंघन के आरोप में की गई। जब यह जब्ती हुई, तब आइसलैंड के पास समुद्र में रूसी नौसेना की एक पनडुब्बी और कई युद्धपोत तैनात थे।

अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि यह ऑपरेशन अचानक नहीं हुआ, बल्कि इस जहाज को हफ्तों तक ट्रैक किया गया था। इस टैंकर ने पहले भी अमेरिकी निगरानी से बचकर निकलने की कोशिश की थी। अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने कई बार जहाज को रुकने और जांच की इजाजत देने को कहा, लेकिन टैंकर ने इनकार कर दिया। पकड़े जाने के डर से उसने बीच समुद्र में अपना झंडा और रजिस्ट्रेशन तक बदल लिया था ताकि उसकी पहचान छिपाई जा सके। इस पूरे मामले को और ज्यादा गंभीर बना दिया रूसी नौसेना की मौजूदगी ने।

खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, टैंकर के आसपास रूसी युद्धपोतों की गतिविधियां बढ़ गई थीं। हालांकि यह साफ नहीं बताया गया कि वे कितनी दूरी पर थे, लेकिन उनकी मौजूदगी ने माहौल को बहुत तनावपूर्ण बना दिया था।यह कार्रवाई वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के कुछ ही दिनों बाद हुई। अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने कराकस में ऑपरेशन चलाकर मादुरो को पकड़ा और उन्हें नशीली दवाओं की तस्करी के आरोप में अमेरिका ले जाया गया। वेनेजुएला सरकार ने इसे अपहरण बताया और कहा कि अमेरिका उनके देश के तेल भंडार पर कब्जा करना चाहता है।

इसके अलावा कैरेबियन सागर में भी वेनेजुएला से आ रहे एक तेल टैंकर को भी अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने पकड़ा है. अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी सचिव क्रिस्टी नोएम ने दोनों जगह सफल मिशन की पुष्टि करते हुए इसे ‘घोस्ट फ्लीट’ खिलाफ बड़ी चोट बताया है. सचिव क्रिस्टी नोएम के अनुसार, अमेरिकी तटरक्षक बल ने तड़के दो बेहद सटीक और समन्वित ऑपरेशन चलाए. इसमें पहला टैंकर ‘मोटर टैंकर बेला-1’ (Bella-I) उत्तरी अटलांटिक में पकड़ा गया, जबकि दूसरा टैंकर ‘मोटर टैंकर सोफिया’ कैरेबियन सागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से जब्त किया गया. ये दोनों जहाज या तो हाल ही में वेनेजुएला में खड़े थे या प्रतिबंधित तेल लेकर वहां की ओर जा रहे थे.

अब इस टैंकर की जब्ती के बाद रूस और अमेरिका के रिश्ते और खराब होने की आशंका है। क्योंकि पुतिन ट्रंप को जवाब देने से पीछे नहीं हटेंगे। हो सकता है कि इससे यूक्रेन और वेनेजुएला जैसे मोर्चों पर तनाव और बढ़ जाए। वहीं रूस ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। रूस के परिवहन मंत्रालय ने कहा कि इस जहाज को रूसी झंडा इस्तेमाल करने की अस्थायी इजाजत दी गई थी। मंत्रालय ने यह भी कहा कि किसी देश को दूसरे देश के रजिस्टर्ड जहाज के खिलाफ बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका को खुले समुद्र में किसी दूसरे देश के जहाज को पकड़ने का हक है।

कुछ देशों का कहना है कि नहीं। कुछ कहते हैं कि अगर जहाज गैरकानूनी काम कर रहा हो, तो कार्रवाई सही है। इस घटना के बाद रूस ने अपने युद्धपोत और पनडुब्बियां समुद्र में भेज दीं। अमेरिका भी पूरी तरह तैयार था। हालात ऐसे बन गए थे कि कभी भी बड़ा टकराव हो सकता था। यह सिर्फ जहाज की बात नहीं है। यह ताकत की लड़ाई है। अमेरिका दिखाना चाहता है कि वही दुनिया के नियम बनाएगा। रूस दिखाना चाहता है कि वह कमजोर नहीं है। अगर ऐसे ही एक-दूसरे के जहाज पकड़े जाने लगे, तो भविष्य में समुद्र युद्ध का मैदान बन सकता है। इससे व्यापार प्रभावित होगा, तेल की कीमतें बढ़ेंगी और आम लोगों को नुकसान होगा।

अमेरिका कहता है कि वह कानून लागू कर रहा है। रूस कहता है कि अमेरिका गुंडागर्दी कर रहा है। सच्चाई यह है कि दोनों अपनी ताकत दिखा रहे हैं। इस घटना से साफ हो गया है कि दुनिया एक ज्यादा खतरनाक दौर में जा रही है। पहले लड़ाइयां जमीन पर होती थीं, अब समुद्र में भी ताकत दिखाई जा रही है। आज दुनिया दो हिस्सों में बंटी हुई है। एक तरफ अमेरिका और उसके साथी देश हैं। दूसरी तरफ रूस, चीन और उनके सहयोगी हैं। हर छोटा मामला बड़ा टकराव बन सकता है।

यह टैंकर मामला सिर्फ शुरुआत है। आने वाले समय में और जहाज रोके जा सकते हैं और देश नाराज हो सकते हैं। समुद्र अब सिर्फ व्यापार का रास्ता नहीं रहा। यह ताकत दिखाने की जगह बन गया है। अमेरिका कह चुका है कि वह दुनिया में कहीं भी कार्रवाई कर सकता है। रूस भी कह चुका है कि वह जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा। अगर यही रवैया रहा, तो आने वाला समय और भी खतरनाक हो सकता है।

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