IPAC के दफ्तर पर ED का छापा, Raid वाली जगह पहुंचीं CM Mamata, Shah पर साधा निशाना!

पश्चिम बंगाल में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं…वैसे-वैसे सियासत का पारा भी तेज़ी से चढ़ता जा रहा है…जहां आज ED की एक कार्रवाई ने इस सियासी गर्मी को उबाल पर ला दिया...दरअसल, ED ने चुनावी रणनीति बनाने वाली कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के चीफ प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर छापेमारी शुरू की.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: क्या ममता बनर्जी की संभावित जीत से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह डर गए हैं?…क्या कोलकाता में चुनाव रणनीति बनाने वाली कंपनी IPAC के चीफ के घर ED का छापा उसी रणनीति का हिस्सा है?…और क्या पश्चिम बंगाल में भी वही दोहराया जाएगा जो झारखंड में सीएम हेमंत सोरेन के साथ हुआ था?…

पश्चिम बंगाल में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं…वैसे-वैसे सियासत का पारा भी तेज़ी से चढ़ता जा रहा है…जहां आज ED की एक कार्रवाई ने इस सियासी गर्मी को उबाल पर ला दिया…दरअसल, ED ने चुनावी रणनीति बनाने वाली कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के चीफ प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर छापेमारी शुरू की….सुबह से ही साल्टलेक सेक्टर-5 स्थित I-PAC के ऑफिस और कोलकाता के लाउडन स्ट्रीट पर प्रतीक जैन के घर सर्च ऑपरेशन चलता रहा…लेकिन इस पूरी कार्रवाई ने तब एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया जब खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अचानक प्रतीक जैन के घर पहुंच गईं……

ये कोई मामूली मामला नहीं था….बल्कि एक बड़ा सियासी संदेश था….जहां दोपहर करीब 12 बजे, जब ED की सर्च जारी थी…तभी सीएम ममता बनर्जी प्रतीक जैन के घर पहुंचीं…….इस दौरान दिलचस्प बात ये रही कि उनके पहुंचने से महज पांच मिनट पहले कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा भी वहां मौजूद हो गए…कुछ ही मिनटों के भीतर सीएम ममता घर से बाहर निकलीं और उनके हाथ में एक हरी फाइल थी…

बाहर आते ही ममता बनर्जी ने मीडिया के सामने सीधे-सीधे बीजेपी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर हमला बोला…उन्होंने कहा कि ED उनकी पार्टी के सारे दस्तावेज जब्त कर रही थी, इसलिए वह खुद फाइल लेकर आई हैं…ममता ने आरोप लगाया कि हार्ड डिस्क, फोन और जरूरी चुनावी प्लानिंग से जुड़े कागजात जब्त किए जा रहे थे…यही नहीं सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि…क्या ED और अमित शाह का काम पार्टी की हार्ड डिस्क, कैंडिडेट लिस्ट इकट्ठा करना है?… ये गृह मंत्री जो देश की रक्षा नहीं कर सकता और मेरे पार्टी के सारे डॉक्यूमेंट्स ले जा रहा है…अगर मैं BJP पार्टी ऑफिस पर रेड करूं तो क्या होगा?…आगे ममता बनर्जी ने कहा कि…एक तरफ, वो पश्चिम बंगाल में SIR करवाकर सभी वोटर्स के नाम हटा रहे हैं……चुनावों की वजह से, वो मेरी पार्टी के बारे में सारी जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं…

यही नहीं, सीएम ममता बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा कि प्रतीक जैन उनकी पार्टी के इंचार्ज हैं और I-PAC TMC की चुनावी रणनीति से जुड़ा हुआ है…ऐसे में इस तरह की छापेमारी सिर्फ एक जांच नहीं बल्कि पार्टी की चुनावी तैयारियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है…उन्होंने कहा कि एक तरफ वोटर लिस्ट से 1.5 करोड़ नाम हटाए जा रहे हैं और दूसरी तरफ ED के जरिए पार्टी के प्लान को हाईजैक किया जा रहा है…सीएम ममता का आरोप था कि ये सब कुछ सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है ताकि TMC को कमजोर किया जा सके……वहीं ED का कहना है कि ये छापेमारी दिल्ली के एक पुराने फाइनेंशियल फ्रॉड और कोयला तस्करी से जुड़े मामले की जांच के तहत की गई है….एजेंसी के मुताबिक, ये पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि I-PAC का उस मामले से कोई कनेक्शन है या नहीं…..लेकिन सवाल ये उठता है कि अगर मामला पुराना है…तो ठीक चुनाव से पहले ही ऐसी कार्रवाई क्यों?…यही सवाल विपक्ष लगातार उठा रहा है और यही सवाल जनता के मन में भी है…

क्योंकि, ये पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी किसी केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई के दौरान मौके पर खुद पहुंची हों…2019 में जब CBI ने तत्कालीन कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के लाउडन स्ट्रीट स्थित घर पर छापा मारा था…तब भी सीएम ममता बनर्जी वहां पहुंच गई थीं…उस घटना के बाद ममता बनर्जी ने धर्मतला में धरना दिया था और उसे संघीय ढांचे पर हमला बताया था…अब एक बार फिर वही लाउडन स्ट्रीट, वही केंद्रीय एजेंसी और वही ममता बनर्जी……यानी सियासत का पैटर्न काफी हद तक मिलता-जुलता दिखता है….

अब असली सवाल यही है कि क्या बीजेपी और केंद्र की मोदी-शाह की जोड़ी पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की संभावित जीत से डर गई है?……2021 के विधानसभा चुनाव में TMC ने BJP को करारी शिकस्त दी थी…इसके बावजूद बीजेपी बंगाल में सत्ता हासिल नहीं कर पाई…लोकसभा चुनावों में भी ममता बनर्जी ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी है…यानी अगर चुनावी सर्वे और ज़मीनी हालात फिर से TMC के पक्ष में जा रहे हैं…तो क्या केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल एक राजनीतिक रणनीति बन गया है?…

अगर इस पूरे घटनाक्रम को समझना है….तो झारखंड की तरफ देखना जरूरी है…..दरअसल, झारखंड में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर ED की कार्रवाई हुई….उन्हें गिरफ्तार किया गया….सरकार गिराने की कोशिश हुई और ये संदेश दिया गया कि अब झारखंड में सत्ता परिवर्तन तय है….बीजेपी को लगा कि ED की कार्रवाई से JMM कमजोर होगी….विधायकों में टूट होगी और सत्ता का रास्ता साफ होगा…..

लेकिन, हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी ने झारखंड में सहानुभूति की लहर पैदा कर दी….जनता ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई माना और चुनाव में JMM ने न सिर्फ वापसी की….बल्कि पहले से ज्यादा मज़बूत जनादेश हासिल किया….यानी बीजेपी की रणनीति वहां उलटी पड़ गई…जिस कार्रवाई से सरकार बनाने की उम्मीद थी…उसी कार्रवाई ने विपक्ष को और मजबूत कर दिया….अब यही सवाल पश्चिम बंगाल में भी खड़ा हो रहा है…ममता बनर्जी खुद मैदान में उतरकर ED की कार्रवाई को राजनीतिक साजिश बता रही हैं…वो इसे बीजेपी बनाम बंगाल की लड़ाई में बदल रही हैं….बंगाल में पहले से ही बाहरी बनाम बंगाली की राजनीति असरदार रही है….जिसे लेकर सीएम ममता बनर्जी बार-बार ये नैरेटिव गढ़ती रही हैं कि दिल्ली से बैठकर बंगाल को कंट्रोल करने की कोशिश की जा रही है…

I-PAC सिर्फ एक कंसल्टेंसी फर्म नहीं है….ये चुनावी रणनीति, बूथ मैनेजमेंट और डेटा एनालिटिक्स से जुड़ी संस्था है….ऐसे में I-PAC पर छापा सीधे-सीधे चुनावी तैयारी पर असर डालने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है…जहां सीएम ममता बनर्जी इसे साफ तौर पर पार्टी के दिमाग पर हमला बता रही हैं…उनका कहना है कि बीजेपी अब चुनाव नहीं…बल्कि, एजेंसियों के जरिए लड़ाई लड़ रही है….ममता बनर्जी ने वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने का मुद्दा भी इसी से जोड़ दिया है…उनका आरोप है कि SIR के जरिए लाखों लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित किया जा रहा है और ED की कार्रवाई से पार्टी को रणनीतिक रूप से कमजोर किया जा रहा है…ये पूरा नैरेटिव TMC के लिए चुनावी हथियार बन सकता है….ठीक वैसे ही जैसे झारखंड में बना था…

हालांकि, बीजेपी का मानना है कि कानून अपना काम कर रहा है और केंद्रीय एजेंसियां स्वतंत्र हैं…लेकिन चुनावी समय और टारगेट किए गए चेहरे इस दावे पर सवाल खड़े करते हैं…अगर जनता को ये लगा कि ED का इस्तेमाल सत्ता के लिए किया जा रहा है…तो इसका नुकसान बीजेपी को हो सकता है…..जैसा झारखंड में हुआ….सीएम ममता बनर्जी की राजनीति की सबसे बड़ी ताकत यही रही है कि वो खुद सड़क पर उतर जाती हैं…प्रतीक जैन के घर पहुंचना सिर्फ एक घटना नहीं…बल्कि एक संदेश था कि….मैं डरने वाली नहीं हूं…ये संदेश उनके समर्थकों के लिए भी था और विरोधियों के लिए भी….

लेकिन सवाल अब भी वही है कि…क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह…सीएम ममता बनर्जी की जीत से डर गए हैं?…या फिर ये सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया है…जिसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है?…झारखंड का उदाहरण बताता है कि ED की कार्रवाई हमेशा सत्ता परिवर्तन की गारंटी नहीं होती…कई बार ये विपक्ष को और मजबूत कर देती है…अगर बंगाल में जनता को ये महसूस हुआ कि चुनाव से पहले जानबूझकर ममता बनर्जी और TMC को निशाना बनाया जा रहा है…तो इसका फायदा TMC को मिल सकता है….ऐसे में सवाल ये भी उठता है कि जैसे झारखंड में हेमंत सोरेन लौटे….

क्या वैसे ही बंगाल में ममता बनर्जी और भी मजबूत होकर लौटेंगी?……हालांकि, इस सवाल का जवाब आने वाला चुनाव देगा…लेकिन फिलहाल इतना तो तय है कि पश्चिम बंगाल की सियासत अब सिर्फ चुनाव नहीं….बल्कि एजेंसियों, आरोपों और जनता की धारणा की जंग बन चुकी है……ऐसे में देखना अहम होगा कि क्या झारखंड जैसा खेल पश्चिम बंगाल में भी देखने को मिलेगा?….क्या जिस तरह हेमंत सोरेन पर बीजेपी की चली गई कथित चाल फेल हो गई थी……वैसा ही कुछ पश्चिम बंगाल में भी होगा?…यानी क्या झारखंड की तरह पश्चिम बंगाल में भी भाजपा अपनी ही कथित चालों का शिकार बनेगी?..

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