महंगाई मैन बनाकर पीएम मोदी पर कांग्रेस का प्रहार

- पेट्रोल-डीजल 3 रुपये प्रति लीटर महंगा
- महंगाई मैन बनाम आम आदमी कांग्रेस का हमला
- दूध पर 2 रूपये प्रति लीटर की दर से बढ़ चुके हैं दाम
- सोने पर एक्साइज डयूटी बढ़ाई जा चुकी है, चीनी निर्यात पर रोक लग चुकी है
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। देश में महंगाई अब सिर्फ आर्थिक संकट नहीं रही यह धीरे-धीरे आम आदमी की जिंदगी पर सरकारी कब्जे की कहानी बनती जा रही है। पहले सोने पर एक्साइज बढ़ी फिर चीनी निर्यात पर रोक लगी उसके बाद कामर्शियल गैस सिलेंडर महंगे हुए और अब पेट्रोल-डीजल पर प्रति लीटर तीन रुपये की नई चोट। दूध के दाम प्रति 2 रूपये लीटर की दर से पहले ही इन्क्रीज हो चुके हैं। सरकार इसे मजबूरी बता रही है लेकिन विपक्ष इसे चुनाव खत्म वसूली अभियान की शुरूआत का नाम दे रहा है।
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री को सीधे-सीधे महंगाई मैन कहकर हमला बोला है और यही शब्द अब देश की चाय की दुकानों से लेकर सोशल मीडिया तक तैरने लगा है। सवाल सिर्फ तीन रुपये का नहीं है सवाल उस सुनामी का है जो इन तीन रुपयों के पीछे छिपी हुई है। क्योंकि देश में पेट्रोल और डीजल सिर्फ वाहन नहीं चलाते यह पूरे बाजार की धड़कन हैं। ट्रक चलेगा तो सब्जी पहुंचेगी डीजल जलेगा तो फैक्ट्री चलेगी माल ढुलाई बढ़ेगी तो दूध से लेकर दाल तक सब महंगा होगा। यानी यह सिर्फ तेल नहीं बढ़ा रसोई का बजट फटा है। घर की थाली पर हमला हुआ है। मध्यम वर्ग की जेब पर बारूद रखा गया है।
चुनाव खत्म होते ही वसूली शुरू कर दी गई : जयराम
कांग्रेस ने पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोल दिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम नरेश ने आरोप लगाएं है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता था तब सरकार ने जनता को कोई राहत क्यों नहीं दी लेकिन अब चुनाव खत्म होते ही वसूली शुरू कर दी गई। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को महंगाई मैन बताते हुए कहा कि जनता पर फिर हंटर चलाया गया है। पार्टी का आरोप है कि पहले वाणिज्यिक गैस सिलेंडर महंगे किए गए और अब पेट्रोल-डीजल तथा सीएनजी के दाम बढ़ाकर आम आदमी की कमर तोडऩे की तैयारी कर दी गई है। जयराम रमेश ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध का हवाला देकर सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। उनका कहना है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई और बढ़ेगी और इसका सीधा असर विकास दर पर पड़ेगा। राजनीतिक तौर पर भी यह मुद्दा आने वाले महीनों में बड़ा विस्फोट बन सकता है। क्योंकि पेट्रोल-डीजल की कीमतें वह मुद्दा हैं जो सीधे हर वर्ग को प्रभावित करती हैं। किसान से व्यापारी तक नौकरीपेशा से गृहिणी तक हर कोई इसकी मार महसूस करता है।
पहले से ही बनाई गई भूमिका
बीते कुछ महीनों में सरकार ने जिस तरह जनता को मानसिक रूप से तैयार किया वह भी कम दिलचस्प नहीं। पहले प्रधानमंत्री ने लाइफस्टाइल बदलने की सलाह दी। फिर युद्ध वैश्विक संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजार का माहौल बनाया गया। टीवी डिबेट्स में बताया गया कि तेल महंगा हो सकता है। लोगों को धीरे-धीरे इस दर्द के लिए अभ्यस्त किया गया। और फिर अचानक कीमतें बढ़ा दी गईं। यानी पहले माहौल तैयार किया गया फिर जेब पर वार किया गया। आने वाले समय की तस्वीर और डरावनी दिखाई दे रही है। पेट्रोल-डीजल महंगे होने का मतलब सिर्फ वाहन खर्च नहीं बढऩा है। इसका सीधा असर खाने की थाली बच्चों की फीस घर के किराए बिजली के बिल और दवाइयों तक पड़ेगा। माल भाड़ा बढ़ेगा बाजार महंगा होगा और छोटे कारोबारियों की कमर टूटेगी। जिन घरों में पहले महीने के अंत तक कुछ बच जाता था वहां अब कटौती नया बजट बनेगी। अर्थशास्त्री साफ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यही हाल रहा तो आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई छह प्रतिशत के पार जा सकती है। विकास दर धीमी होगी रोजगार और कमजोर होंगे और आम आदमी की क्रय शक्ति टूटेगी। यानी विकास का नारा अब सीधे जीवन यापन की लड़ाई में बदलता दिख रहा है।
मनोवैज्ञानिक खेल या आर्थिक मजबूरी?
सरकार को जनता के दिमाग के साथ खेलना अच्छे तरीके से आता है। बीते कुछ दिनों में लगातार ऐसा माहौल बनाया गया कि तेल की कीमतें बढऩा तय है। टीवी चैनलों पर युद्ध, अंतरराष्ट्रीय संकट और तेल बाजार की चर्चा तेज कर दी गई। जनता को धीरे-धीरे मानसिक रूप से तैयार किया गया कि महंगाई आने वाली है। और फिर वही हुआ जिसका डर दिखाया जा रहा था। पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए गए। उससे पहले गैस सिलेंडर महंगे हो चुके थे। यानी एक-एक करके हर जरूरी चीज पर बोझ डाला गया, लेकिन इस तरह कि जनता में अचानक विस्फोटक गुस्सा पैदा न हो। लोगों की प्रतिक्रियाएं भी अब मजबूरी की तस्वीर पेश कर रही हैं। कोई कह रहा है कि सरकार जो कर रही है देशहित में कर रही होगी। कोई कह रहा है कि महंगाई पहले ही बहुत ज्यादा है और अब खर्च संभालना मुश्किल होगा। वहीं कई लोग साफ कह रहे हैं कि डीजल महंगा होने का मतलब हर चीज महंगी होना तय है। असल डर यही है कि यह सिर्फ शुरुआत है। अगर तेल महंगा हुआ है तो आने वाले महीनों में बाजार की हर चीज धीरे-धीरे ऊपर जाएगी। और तब शायद देश का सबसे बड़ा सवाल यही होगा कमाई वही है लेकिन जिंदगी इतनी महंगी क्यों हो गई?




