गुजरात में हारकर भी कांग्रेस का दावा मजबूत, BJP के किले को भेदने की तैयारी में राहुल गांधी?
गुजरात की राज्यसभा सीटों को लेकर सियासत तेज हो गई है... BJP के मजबूत गढ़ में कांग्रेस की रणनीति और आने वाले चुनावों...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात में कांग्रेस पार्टी ने हाल के राज्यसभा चुनावों में भले ही सभी सीटें हार ली हों.. लेकिन पार्टी के अंदर एक नई उम्मीद और लड़ाई का जज्बा जागा है.. 2024 लोकसभा चुनावों में मिली जीत के बाद नेता विपक्ष बने राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी.. और गृह मंत्री अमित शाह को 2027 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मजबूत टक्कर देने का खुला चैलेंज दिया था.. भले ही भाजपा के गढ़ में कांग्रेस की स्थिति कमजोर दिख रही हो.. लेकिन पार्टी अब संगठन को मजबूत करके वापसी की तैयारी कर रही है.. राज्यसभा में चार सीटों पर भाजपा की निर्विरोध जीत के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि.. यह हार नहीं, बल्कि नई शुरुआत है.. वहीं अब सवाल यह है कि राहुल गांधी गुजरात में क्या रणनीति अपनाएंगे और पार्टी कैसे भाजपा के किले को भेदेगी..
गुजरात लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है.. यहां 31 साल से भाजपा सत्ता में है.. लेकिन कांग्रेस ने कभी हार नहीं मानी.. 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी ने बनासकांठा सीट पर गेनीबेन ठाकोर के जरिए एक सांसद जरूर बचाया.. लेकिन राज्यसभा में शून्य हो गई.. शक्ति सिंह गोहिल के कार्यकाल खत्म होने के बाद.. कांग्रेस का राज्यसभा में कोई प्रतिनिधि नहीं बचा.. भाजपा ने सभी 11 सीटों पर कब्जा कर लिया.. कुल 37 संसदीय सीटों (26 लोकसभा + 11 राज्यसभा) में कांग्रेस सिर्फ एक पर सिमट गई.. यह स्थिति पार्टी के लिए चुनौती भरी है.. लेकिन राहुल गांधी और कांग्रेस कार्यकर्ता इसे मौका मानकर आगे बढ़ने की बात कर रहे हैं..
राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने चारों सीटें बिना किसी मुकाबले के जीत लीं.. यह भाजपा की बड़ी उपलब्धि है.. गुजरात में ऐसा पहली बार हुआ है.. जब कांग्रेस का राज्यसभा में कोई सदस्य नहीं बचा.. पहले शक्ति सिंह गोहिल जैसे अनुभवी नेता पार्टी का प्रतिनिधित्व करते थे.. उनका कार्यकाल खत्म होते ही कांग्रेस शून्य पर पहुंच गई.. भाजपा अब राज्य की सभी 11 राज्यसभा सीटों पर काबिज है.. यह कांग्रेस संगठन की कमजोरी को दिखाता है.. लेकिन पार्टी का कहना है कि संख्या से ज्यादा महत्व जनता के मुद्दों पर लड़ाई का है..
लोकसभा में कांग्रेस के पास सिर्फ बनासकांठा सीट बची है.. गेनीबेन ठाकोर वहां से सांसद हैं.. बाकी 25 सीटों पर भाजपा का कब्जा है.. 2014 और 2019 में भाजपा ने सभी 26 सीटें जीती थीं.. 2024 में कांग्रेस को एक सीट मिलना भी राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी की मेहनत का नतीजा माना जा रहा है.. वहीं अगर 2029 में यह सीट भी चली गई.. तो कांग्रेस गुजरात से संसद में पूरी तरह गायब हो जाएगी.. इसलिए पार्टी अब इस सीट को बचाने.. और अन्य सीटों पर वापसी के लिए रणनीति बना रही है..
गुजरात विधानसभा में 182 सीटें हैं.. 2022 के चुनाव में कांग्रेस 17 सीटें जीत सकी थी.. लेकिन आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाई.. चुनाव के बाद पांच विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं.. अब सिर्फ 12 विधायक बचे हैं.. कांग्रेस पहली बार नेता विपक्ष का पद भी गंवा चुकी है.. इतनी कमजोर संख्या के बावजूद पार्टी जमीनी स्तर पर संघर्ष कर रही है.. 2027 के चुनाव में इन 12 विधायकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होगी..
आपको बता दें कि राहुल गांधी ने लोकसभा में नेता विपक्ष बनने के बाद गुजरात को खास तवज्जो दी.. और उन्होंने कहा था कि 2027 में गुजरात की पिच पर मोदी.. और शाह को मजबूत टक्कर दी जाएगी.. इसके लिए उन्होंने नई कांग्रेस बनाने का ऐलान किया.. संगठन सृजन अभियान शुरू किया गया.. युवा कार्यकर्ताओं को जोड़ा जा रहा है.. किसान, महिलाएं, आदिवासी और युवा वर्ग को पार्टी से जोड़ने की कोशिश हो रही है.. राहुल गांधी खुद गुजरात दौरे पर आएंगे और कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा देंगे..


