CBI-ED की रडार पर दीदी! क्या Mamata Banerjee होंगी अगली Target?

आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य की राजनीति चरम पर है...जहां चुनाव की तारीखों का ऐलान भले ही अभी नहीं हुआ हो...लेकिन, पश्चिम बंगाल में ईडी और सीबीआई अभी से ही एक्टिव हो गई हैं..

4पीएम न्यूज नेटवर्क: आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य की राजनीति चरम पर है…जहां चुनाव की तारीखों का ऐलान भले ही अभी नहीं हुआ हो…लेकिन, पश्चिम बंगाल में ईडी और सीबीआई अभी से ही एक्टिव हो गई हैं….इसी बीच हर ओर चर्चा होने लगी कि…क्या बिहार, दिल्ली और झारखंड के बाद अब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले वहां भी ऐसा कोई खेल होने वाला है?….

इन सवालों के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुलकर केंद्र सरकार और प्रवर्तन निदेशालय के खिलाफ मोर्चा खोल चुकी हैं…आई-पैक के ऑफिस पर ईडी की छापेमारी के बाद ममता बनर्जी का सीधे मौके पर पहुंचना और जांच एजेंसी से टकराव अब देश की सबसे बड़ी राजनीतिक बहस बन चुका है…सीएम ममता बनर्जी का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार विपक्ष को खत्म करने के लिए ईडी और सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है…उनका कहना है कि चुनाव से पहले विपक्षी राज्यों में डर का माहौल बनाया जा रहा है…ताकि जनता के असली मुद्दों से ध्यान हटाया जा सके…

35 साल का वाम किला गिराने वाली ममता बनर्जी, भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई हैं…2011 में ममता बनर्जी ने वो कर दिखाया…जो दशकों तक कोई नहीं कर पाया था…उन्होंने पश्चिम बंगाल में 35 साल पुरानी वामपंथी सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया…उस दिन से सीएम ममता सिर्फ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री नहीं रहीं…बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की मजबूत आवाज बन गईं……भाजपा ने पश्चिम बंगाल में पूरी ताकत झोंकी…प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दर्जनों दौरे…केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति…जेपी नड्डा और अब नए अध्यक्ष नितिन नवीन का मिशन बंगाल…लेकिन नतीजा हर बार वही रहा…….ममता बनर्जी ने 2016 और फिर 2021 में भाजपा को करारी शिकस्त दी…और अब 2026 का विधानसभा चुनाव सामने है…जिसके बाद भाजपा की बेचैनी साफ नजर आ रही है…

जिसके चलते चुनाव से पहले ही पश्चिम बंगाल में ईडी की एंट्री हो गई…जिसके बाद सवाल उठा कि क्या ये महज संयोग है या फिर कोई रणनीति?…दरअसल, जनवरी 2026 में ईडी ने इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी यानी आई-पैक के दफ्तर पर छापा मारा…..आई-पैक वही संस्था है जो 2019 से टीएमसी के लिए चुनावी रणनीति बना रही है…ईडी का दावा है कि ये छापा कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में मारा गया…लेकिन सवाल ये है कि चुनाव से ठीक पहले ही ये कार्रवाई क्यों…और क्यों बार-बार वही राज्य निशाने पर हैं जहां भाजपा सत्ता में नहीं है…

हालांकि, जब ईडी आई-पैक के ऑफिस में रेड करने पहुंची…तो सीएम ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंचीं…उनका कहना था कि ईडी राजनीतिक काम में दखल दे रही है…और टीएमसी से जुड़ी गोपनीय जानकारियां जब्त की जा रही हैं…मीडिया से बात करते हुए ममता बनर्जी ने कहा था कि…ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि ED हमारे आईटी कार्यालय में हमारे उम्मीदवारों की सूची, पार्टी की रणनीति, योजनाएं और अन्य गोपनीय दस्तावेज़ इकट्ठा करने आई है…ये सीधे तौर पर हमारी राजनीतिक सामग्री तक पहुंचने की कोशिश है…

जबकि, ईडी का आरोप है कि ममता बनर्जी ने जांच में बाधा डाली…दस्तावेज छीने…मोबाइल ले गईं…अब ये मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है… सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले को गंभीर बताया है…कोर्ट ने कहा है कि अगर इस तरह राज्य सरकारें केंद्रीय एजेंसियों को रोकेंगी…तो देश में कानून व्यवस्था का संकट खड़ा हो जाएगा…लेकिन सवाल ये भी है कि क्या केंद्र सरकार को ये अधिकार है कि वो राज्यों में जाकर चुनी हुई सरकारों को अस्थिर करे…क्या लोकतंत्र में जांच एजेंसियां सरकार गिराने का औजार बन सकती हैं…यही सवाल पहले भी उठ चुके हैं…और हर बार निशाने पर विपक्षी मुख्यमंत्री ही रहे हैं…

पहला उदाहरण…RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव…जिन्हें सत्ता में रहते गिरफ्तार किया गया…बिहार में जब लालू प्रसाद यादव मुख्यमंत्री थे…तब चारा घोटाले में सीबीआई की जांच शुरू हुई…लालू यादव ने एजेंसियों से सीधा टकराव किया…हालात ऐसे बने कि सेना बुलाने तक की बात हुई…आखिरकार 30 जुलाई 1997 को लालू यादव गिरफ्तार कर लिए गए…ये आजादी के बाद पहली बार था…जब किसी मौजूदा या पूर्व मुख्यमंत्री को केंद्रीय एजेंसी ने गिरफ्तार किया…जिसकी वजह से लालू प्रसाद यादव को सजा हुई…राजनीतिक करियर को गहरा झटका लगा…

वहीं दूसरा नंबर…अरविंद केजरीवाल…जब ईडी ने अरविंद केजरीवाल को 9 बार नोटिस भेजे…केजरीवाल ने न तो जवाब दिया और न ही पूछताछ के लिए गए…21 मार्च 2024 को ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया…ये पहली बार था जब किसी मौजूदा मुख्यमंत्री को ईडी ने जेल भेजा…हालांकि, जमानत जरूर मिली…लेकिन बाहर आते ही सीबीआई ने दोबारा गिरफ्तार कर लिया…करीब 6 महीने तक केजरीवाल ने जेल से सरकार चलाई…बाद में भारी दबाव के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा…

तीसरा मामला….हेमंत सोरेन का…झारखंड में भी वही कहानी देखी गई थी…जब झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर जमीन घोटाले का आरोप लगा…ईडी ने 10 नोटिस भेजे…हेमंत सोरेन ने अदालतों का दरवाजा खटखटाया…लेकिन 31 जनवरी 2024 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया…गिरफ्तारी से पहले उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया…हालांकि बाद में जमानत मिलने पर वो फिर से मुख्यमंत्री बने…

लेकिन ये साफ हो गया कि ईडी से टकराव किसी को नहीं बख्शता…तीन मुख्यमंत्री… तीन राज्य और एक ही पैटर्न…लालू यादव – गैर भाजपा…अरविंद केजरीवाल – भाजपा विरोधी…हेमंत सोरेन – इंडिया गठबंधन के नेता…तीनों पर ईडी-सीबीआई की कार्रवाई हुई और तीनों जेल गए…जिसके बाद अब सवाल है कि चौथा नाम कौन सा होगा? और ममता बनर्जी अगला टारगेट क्यों हैं…

तो ममता बनर्जी सिर्फ बंगाल की मुख्यमंत्री नहीं हैं…वो भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत और मुखर नेता हैं…उन्होंने 2019 में सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली…2019 में सीबीआई और बंगाल पुलिस का टकराव देश ने देखा…रात भर धरना और सड़क पर कैबिनेट मीटिंग…जिसके बाद 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई सहमति वाला केस ममता बनर्जी के खिलाफ माना…अब 2026 चुनाव से पहले ईडी की छापेमारी…और सीधे मुख्यमंत्री से टकराव…क्या ये सब संयोग है…या एक सोची-समझी रणनीति?…

तो इसे लेकर ममता बनर्जी का कहना है कि भाजपा चुनाव हारने के डर से एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है…उनका आरोप है कि विपक्षी नेताओं को जेल भेजकर लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है…टीएमसी का कहना है कि अगर ममता को छुआ गया…तो बंगाल की जनता चुप नहीं बैठेगी…SIR विरोधी रैली में सीएम ममता बनर्जी ने खुली चेतावनी देते हुए भी कहा था कि…पूरे देश में BJP की नींव हिला दूंगी….

ऐसे में बड़ा सवाल यही उठता है कि अगला नंबर किसका…क्या ममता बनर्जी वही गलती दोहराने जा रही हैं जो लालू प्रसाद यादव, अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन ने की…या वो इस टकराव को राजनीतिक हथियार बना देंगी…क्या भाजपा 2026 से पहले बंगाल में कोई बड़ा झटका देने की तैयारी में है…या ये सब सिर्फ डर की राजनीति है……हालांकि, फैसला अदालतों में होगा…लेकिन जवाब जनता देगी…क्योंकि, लोकतंत्र में आखिरी फैसला हमेशा जनता का होता है…लेकिन आज सवाल सिर्फ पश्चिम बंगाल की मुंख्यमंत्री ममता बनर्जी का नहीं है…सवाल ये है कि क्या विपक्ष में रहना अपराध बन चुका है?…क्या चुनाव हारने के बाद भाजपा एजेंसियों के जरिए जीत हासिल करना चाहती है?

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