दिग्विजय सिंह निकालेंगे ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’, उज्जैन से अयोध्या तक लगेगी चढ़ावा चोरों की लंका!

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने धर्म के नाम पर कथित लूट और श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ के खिलाफ 'सनातन स्वाभिमान यात्रा' निकालने का ऐलान किया है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में जितना ही कथित तौर पर हिंदुत्व का बोलबाला करने की बात की जाती है। उतना ही इस सरकार में हिंदुत्व के नाम पर लूट खसोट भी मचाई जाती है। ऐसे में जमकर लूट खसोट के बाद अगर कुछ बचता है तो वो है महज सरकारी गुमला।

अगर किसी में धार्मिक स्थल पर कुछ ऐसा होता है जो नहीं होना चाहिए तो उसके बाद सिर्फ और सिर्फ सरकार के तरफ से बयानबाजियां की जाती हैं। पब्लिक को गुमराह करने के लिए कहा कार्यवाई की बात कह दी जाती है। लेकिन वो कार्यवाई होती नहीं है। इससे इन चंदा चोरों के हौसले बुलंद हो जाते हैं। और हौसले हों भी क्यों न बुलंद? उनका मानना है कि ‘सैयां-भये-कोतवाल-अब-डर-काहे।

दरअसल सरकार बीजेपी की है और लूट बाजारी जमकर हो रही है। तभी तो राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बाद भी अभी तक उस मामले में कोई खास एक्शन नहीं लिया गया है। अब सरकार की तरफ से भले ही कोई खास एक्शन न लिया गया हो लेकिन विपक्ष लगातार इस मामले को लेकर आवाज़ उठा रहा है। चाहे जनता के बीच जाकर हो या फिर सदन में। विपक्ष इस मामले पर मुखर होकर सरकार से सवाल दाग रहा है।

इसी कड़ी में कांग्रेस की तरफ से एक बड़ा कदम उठाया गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने धर्म के नाम पर कथित लूट और श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ के खिलाफ ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकालने का ऐलान किया है। यह यात्रा 20 अक्टूबर से उज्जैन से शुरू होकर अयोध्या तक जाएगी।

विजयादशमी के दिन शुरू होने वाली इस यात्रा को दिग्विजय सिंह ने पूरी तरह गैर-राजनीतिक बताते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति का विरोध करना नहीं, बल्कि धर्म और आस्था के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना है। दिग्विजय सिंह ने जारी वीडियो संदेश में कहा कि यात्रा के जरिए पारदर्शिता, सत्य और आस्था की रक्षा के साथ सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया जाएगा। यात्रा में शामिल होने के इच्छुक लोगों के लिए उन्होंने गूगल फॉर्म भी जारी किया है।

दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और दान की हेराफेरी का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि इस मामले में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रद्धालुओं के दान और चढ़ावे से निजी संपत्तियां और वाहन खरीदे जाने के मामले भी सामने आए हैं।

उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था और चढ़ावे का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया है और इसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के लिए गठित ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोग भी चढ़ावे की हेराफेरी में शामिल रहे हैं।

भाजपा सरकार पर उनका सबसे बड़ा आरोप यह है कि वह धर्म के नाम पर राजनीति करती है लेकिन जब असली लूट होती है तो आंखें मूंद लेती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद राम मंदिर ट्रस्ट के गठन में भूमिका निभाई थी। ट्रस्ट के लोगों को उन्होंने चुना।

इसलिए जब चोरी होती है तो मोदी की चुप्पी सवाल खड़े करती है। दिग्विजय सिंह ने पूछा कि प्रधानमंत्री इतने बड़े मामले पर बोल क्यों नहीं रहे। क्या इसलिए कि आरोपी उनके करीबी हैं? क्या इसलिए कि आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद इससे जुड़े हैं?

खैर दिग्विजय सिंह के इस ऐलान के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इसे लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। इसी बीच ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ पर हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत राजू दास ने कहा कि “एक कहावत है—’सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली।

‘ ठीक उसी तरह, कांग्रेस और उसकी विचारधारा हमेशा से सनातन संस्कृति, हिंदू धर्म और हिंदुत्व की विरोधी रही है.न सिर्फ महंत राजू दास बल्कि दिग्विजय सिंह का यह ऐलान बीजेपी नेताओं को एक आँख नहीं भा रहा है। इसी बीच भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने बड़ा बयान दे डाला।

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार है। और अयोध्या भी उसी राज्य में है। योगी खुद संत कहलाते हैं और हिंदू धर्म की रक्षा का दावा करते हैं। लेकिन उनके शासन में राम मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर चढ़ावा चोरी हो रही है।

रोजाना छह से आठ लाख रुपये तक गायब होने के अनुमान लगाए गए हैं। बैंक खातों में जमा होने वाली रकम अचानक बढ़ गई जब जांच शुरू हुई। इससे साफ लगता है कि पहले पैसा निकाल लिया जाता था। सोना, चांदी, जेवर का हिसाब भी ठीक से नहीं रखा गया। ऐसी लापरवाही या जानबूझकर की गई चोरी योगी सरकार की नाकामी दिखाती है।

यह यात्रा सिर्फ आरोप लगाने के लिए नहीं है। दिग्विजय सिंह वे जनजागरण करना चाहते हैं। वे लोगों से अपील कर रहे हैं कि जो भी धर्म के नाम पर लूट के खिलाफ हैं, वे शामिल हों। उन्होंने गूगल फॉर्म भी जारी किया है ताकि लोग नाम दर्ज करा सकें। यात्रा में कोई पार्टी का झंडा नहीं होगा। सिर्फ राम भक्त और दानदाता शामिल हो सकते हैं। वे रोज दस से पंद्रह किलोमीटर पैदल चलेंगे।

उज्जैन से अयोध्या करीब एक हजार किलोमीटर का सफर है।विजयादशमी का दिन इसलिए चुना गया क्योंकि यह अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है। दिग्विजय सिंह का तर्क है कि आज धर्म के नाम पर अधर्म हो रहा है। भक्तों की आस्था का अपमान हो रहा है। गाड़ियां खरीदी जा रही हैं, मकान बनाए जा रहे हैं, करोड़ों का घपला हो रहा है। वे कहते हैं कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

कुल मिलकर यह यात्रा भाजपा सरकार के लिए सिरदर्द बन सकती है। खासकर उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। अगर आम लोग इस मुद्दे पर जाग गए तो भाजपा को जवाब देना होगा। मोदी और योगी दोनों को सवालों का सामना करना पड़ेगा।

दिग्विजय सिंह का साफ़ कहना है कि वे सिर्फ धर्म की रक्षा कर रहे हैं। राजनीति नहीं कर रहे। लेकिन उनका निशाना साफ है – भाजपा, आरएसएस, वीएचपी, मोदी और योगी। उज्जैन से शुरू होने वाली यह यात्रा महाकाल की नगरी से राम की नगरी तक जाएगी। रास्ते में कई शहरों से गुजरेगी। लोग जुड़ेंगे तो आवाज और तेज होगी।

दिग्विजय सिंह का आरोप है कि पहले के चंदे का भी कोई हिसाब नहीं दिया गया। उद्धव ठाकरे जैसे लोगों ने भी चंदा दिया लेकिन रसीद और हिसाब नहीं मिला। विदेशी चंदा, चांदी की ईंटें, जेवर सबमें गड़बड़ी के आरोप हैं।भाजपा सरकार हमेशा विपक्ष पर धर्म विरोधी होने का आरोप लगाती है। लेकिन खुद धर्म के नाम पर लूट होने दे रही है।

इस तरह से देखें तो दिग्विजय सिंह ने भाजपा सरकार को घेरने का एक नया रास्ता निकाला है। राम मंदिर जो भाजपा की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी, उसी पर सवाल खड़े करके वे हमला बोल रहे हैं। चढ़ावा चोरी का मुद्दा उनके हाथ में हथियार बन गया है। अब देखना होगा कि सरकार कैसे जवाब देती है और यात्रा कितनी असरदार साबित होती है। लेकिन फिलहाल दिग्विजय सिंह के आरोप गंभीर हैं और भाजपा, योगी तथा मोदी पर दबाव बनाने वाले हैं।

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