बांदा में DM का सर्जिकल स्ट्राइक! स्कूलों में अचानक पहुंचते ही खुल गई पूरी पोल

बांदा में डीएम अमित आसेरी ने सरकारी स्कूलों में औचक निरीक्षण कर शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। बच्चों की पढ़ाई, मिड डे मील, साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं में कमी पर सख्त चेतावनी देते हुए कार्रवाई के संकेत दिए।

4 पीएम न्यूज नेटवर्क: बांदा में शिक्षा व्यवस्था पर अब प्रशासन ने सीधा प्रहार शुरू कर दिया है। नवागत जिलाधिकारी अमित आसेरी ने सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत जानने के लिए बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक औचक निरीक्षण किया। इस कार्रवाई ने पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया। बच्चों की पढ़ाई, मिड डे मील, साफ-सफाई, पेयजल और बुनियादी सुविधाओं की जांच के दौरान कई खामियां सामने आईं। जिलाधिकारी ने साफ शब्दों में संदेश दिया कि बच्चों के भविष्य से किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बडोखरखुर्द ब्लॉक के स्कूलों में अचानक पहुंचे डीएम

जिलाधिकारी अमित आसेरी ने बांदा के बडोखरखुर्द ब्लॉक के कई विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। सबसे पहले वह उच्च प्राथमिक विद्यालय कम्पोजिट बन्धापुरवा पहुंचे, जहां उन्होंने सीधे बच्चों से पढ़ाई से जुड़े सवाल पूछे। कई छात्र जवाब देने में हिचकते और लड़खड़ाते नजर आए। यह देखकर डीएम ने शिक्षकों से कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने साफ कहा कि अगर बच्चों की बुनियादी शिक्षा मजबूत नहीं होगी, तो जिम्मेदारी तय की जाएगी।

शिक्षकों को दो टूक चेतावनी

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने शिक्षकों से कहा कि पढ़ाई की गुणवत्ता में तुरंत सुधार लाया जाए। उन्होंने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया “बच्चों की पढ़ाई में लापरवाही अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगी। सुधार नहीं हुआ तो कार्रवाई तय है।” यह बयान शिक्षा विभाग के लिए साफ संदेश माना जा रहा है कि अब सिर्फ कागजी प्रगति नहीं, बल्कि वास्तविक परिणाम देखे जाएंगे।

‘स्कूल चलो अभियान’ पर भी सख्ती

डीएम ने “स्कूल चलो अभियान” की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि हर हाल में नामांकन बढ़ाया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे। उन्होंने कहा कि नामांकन बढ़ाना केवल आंकड़ों का खेल नहीं होना चाहिए, बल्कि बच्चों की नियमित उपस्थिति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी उतनी ही जरूरी है।

साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं पर नाराजगी

विद्यालय परिसर में साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली। इस पर जिलाधिकारी ने तत्काल सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने पेयजल व्यवस्था, शौचालयों की स्थिति और कक्षाओं में पंखों जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। कई जगह व्यवस्थाएं कमजोर पाई गईं, जिस पर प्रशासन ने स्पष्ट कहा कि अब बहानों से काम नहीं चलेगा।

तिन्दवारा स्कूल में भी दिखा सख्त रुख

इसके बाद जिलाधिकारी तिन्दवारा स्थित विद्यालय पहुंचे, जहां प्राथमिक कक्षाओं की पढ़ाई को लेकर उन्होंने फिर सवाल उठाए। शिक्षकों से जवाब-तलब किया गया और पूछा गया कि बच्चों की सीखने की क्षमता अपेक्षित स्तर तक क्यों नहीं पहुंच रही। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।

मिड डे मील की जांच के लिए खुद पहुंचे किचन

मिड डे मील योजना की वास्तविक स्थिति जानने के लिए डीएम स्वयं स्कूल के किचन तक पहुंचे। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और वितरण व्यवस्था का निरीक्षण किया। बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पर उन्होंने विशेष जोर दिया और कहा कि पोषण से समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने संबंधित कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए कि भोजन की गुणवत्ता और समयबद्ध वितरण हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।

प्रशासन का स्पष्ट संदेश

इस औचक निरीक्षण के बाद शिक्षा विभाग में साफ संदेश गया है कि अब जिला प्रशासन सिर्फ रिपोर्टों पर नहीं, बल्कि जमीन पर जाकर व्यवस्था की जांच करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे निरीक्षण सरकारी स्कूलों में जवाबदेही बढ़ाने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

रिपोर्ट – इक़बाल खान

यह भी पढ़ें: डीएम के आदेश को भी ठेंगा! 4 महीने बाद भी जांच टीम का इंतजार कर रहे ग्रामीण

Related Articles

Back to top button