फेफड़ों की ताकत बढ़ाने के लिए करें रोज प्राणायाम

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक तनाव और प्रदूषण हमारे श्वसन तंत्र को सबसे अधिक प्रभावित कर रहे हैं। एक स्टडी के मुताबिक रोजाना थोड़ी देर प्राणायाम फेफड़ों की कार्यक्षमता को तेजी से बढ़ा सकता है। प्राणायाम का अर्थ है प्राण यानी श्वास का आयाम यानी विस्तार। जब हम गहरी और नियंत्रित सांस लेते हैं, तो फेफड़ों के निचले हिस्से तक ऑक्सीजन पहुंचती है, जो सामान्य छोटी सांसों के दौरान निष्क्रिय रहते हैं। स्टडी के अनुसार, जो लोग नियमित रूप से अनुलोम-विलोम और भ्रामरी जैसे अभ्यास करते हैं, उनके शरीर में ऑक्सीजन सैचुरेशन का लेवल बेहतर रहता है और उन्हें अस्थमा या ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों का खतरा कम होता है। यह न सिर्फ फेफड़ों को मजबूत बनाता है, बल्कि आपके दिमाग को शांत रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

अनुलोम-विलोम

यह श्वसन संबंधी मांसपेशियों की सहनशक्ति बढ़ाता है, जिससे सीढिय़ां चढ़ते समय या भारी काम करते समय सांस फूलने की तिव्रता कम होती है। यह शरीर की नाडिय़ों को शुद्ध करता है और फेफड़ों के दोनों हिस्सों को समान रूप से सक्रिय करता है। इसलिए आज से ही अपनी सुबह की शुरुआत प्राणायाम से करें। सुखासन, पद्मासन या वज्रासन जैसे किसी आरामदायक आसन में बैठें। दाएं अंगूठे से दाहिनी नासिका को बंद करें। अब बाईं नासिका से धीरे-धीरे और गहरी सांस अंदर लें। सांस लेते समय मन में 4-5 तक गिनती गिन सकते हैं। सांस पूरी भरने के बाद, अनामिका से बाईं नासिका को बंद करें और दाएं अंगूठे को दाहिनी नासिका से हटा दें। अब दाहिनी नासिका से धीरे-धीरे पूरी सांस बाहर निकालें। सांस छोडऩे का समय सांस लेने के बराबर या उससे अधिक होना चाहिए।

इसका वैज्ञानिक प्रभाव

प्राणायाम के दौरान गहरी सांस लेने से डायाफ्राम मजबूत होता है, जिससे फेफड़ों को फैलने के लिए अधिक जगह मिलती है। यह फेफड़ों में जमा टॉक्सिन्स और कार्बन डाइऑक्साइड को पूरी तरह बाहर निकालने में मदद करता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि प्राणायाम पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करता है, जिससे श्वसन दर स्थिर होती है और हृदय गति में भी सुधार होता है।

कपालभाति

अगर आप अपनी दिनचर्या में इसे शामिल करते हैं, तो आप न केवल फेफड़ों को मजबूत बना सकते हैं, बल्कि उम्र बढऩे के साथ होने वाली सांस की तकलीफों को भी टाल सकते हैं। यह फेफड़ों की झिल्लियों को लचीला बनाता है और शरीर से हानिकारक टॉक्सिन्स को तेजी से बाहर निकालता है। सबसे पहले सुखासन, पद्मासन या वज्रासन जैसे किसी आरामदायक आसन में बैठ जाएं। अपनी रीढ़ की हड्डी, गर्दन और सिर को बिल्कुल सीधा रखें। दोनों हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा में रखें। आंखें कोमलता से बंद कर लें। एक लंबी गहरी सांस अंदर भरें। अब झटके के साथ नाक से सांस को बाहर छोड़ें। इस दौरान पेट की मांसपेशियों को अंदर की ओर सिकोड़ें।

भस्त्रिका प्राणायाम

प्राणायाम केवल एक योग नहीं है, बल्कि एक पूर्ण वैज्ञानिक श्वसन व्यायाम है। शहरों में बढ़ते एयर क्वालिटी इंडेक्स के प्रभाव को कम करने के लिए प्राणायाम फेफड़ों के सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। यह फेफड़ों को साफ करता है और श्वसन मार्ग की रुकावटों को दूर करता है। अपने हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा या चिन मुद्रा में रखें। दोनों नासिका छिद्रों से गहराई से और तेज़ गति से श्वास अंदर भरें। महसूस करें कि आपके फेफड़े पूरी तरह भर रहे हैं। तुरंत बाद उतनी ही शक्ति और वेग के साथ श्वास को बाहर छोड़ें। शुरुआत में इसे सामान्य गति से करें, फिर धीरे-धीरे गति बढ़ाएं। एक बार में 10 से 20 श्वास लें और फिर कुछ देर विश्राम करें। ऐसे 3 से 4 चक्र या 5 मिनट तक अभ्यास किया जा सकता है। अभ्यास के बाद गहरी लंबी श्वास लें और शरीर को पूरी तरह शिथिल छोड़ दें।

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