टीबी से डरें नहीं, लड़ें! मिर्ज़ापुर में 35 मरीजों को मिली पोषण पोटली, लालगंज को TB Free बनाने का संकल्प
मिर्ज़ापुर के लालगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 35 टीबी मरीजों को पोषण पोटली वितरित की गई। डॉक्टरों ने नियमित दवा सेवन, नशा छोड़ने और जागरूकता के जरिए लालगंज को टीबी मुक्त बनाने का संकल्प लिया।

4पीएम न्यूज नेटवर्कः टीबी यानी क्षय रोग को लेकर आज भी समाज में डर, झिझक और कई तरह की गलतफहमियां मौजूद हैं। कई लोग इसे लाइलाज मान लेते हैं, जबकि सच यह है कि समय पर जांच, नियमित दवा और सही पोषण से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है।
मिर्ज़ापुर के लालगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शनिवार को इसी संदेश के साथ एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां 35 टीबी मरीजों को पोषण पोटली भेंट की गई और लालगंज को टीबी मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया। स्वास्थ्य विभाग और रेड क्रॉस सोसाइटी की इस पहल को मरीजों और स्थानीय लोगों ने सराहनीय बताया।
35 क्षय रोगियों को दी गई पोषण पोटली
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लालगंज के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. संजय सिंह ने 35 क्षय रोगियों को पोषण पोटली वितरित की। इस दौरान उन्होंने कहा कि टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं है। यदि मरीज नियमित रूप से दवा का सेवन करें और नशे जैसी आदतों से दूरी बनाए रखें, तो इस बीमारी से पूरी तरह ठीक हुआ जा सकता है। उन्होंने कहा कि शासन स्तर पर टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जांच और इलाज की सभी सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।
टीबी मुक्त लालगंज बनाने का लिया संकल्प
कार्यक्रम में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने लालगंज ब्लॉक को टीबी मुक्त बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। डॉ. कैलाश कुमार बिंद ने कहा कि केवल इलाज ही नहीं, बल्कि जागरूकता भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अपने-अपने क्षेत्रों में टीबी के प्रति जागरूकता फैलाएं और मरीजों को नियमित दवा सेवन के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि यदि समाज साथ दे, तो टीबी जैसी बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
रेड क्रॉस सोसाइटी की पहल की सराहना
रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा 35 मरीजों को पोषण पोटली भेंट किए जाने को डॉक्टरों ने एक सराहनीय और मानवीय पहल बताया। डॉ. कैलाश बिंद ने कहा कि मरीज के उपचार में दवा के साथ पोषण भी उतना ही जरूरी है। ऐसे में यह सहायता मरीजों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक शमीम अहमद ने कहा कि इस नेक कार्य में समाज के सम्मानित और सक्षम लोगों को ‘निश्चय मित्र’ बनकर आगे आना चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा मरीजों को मदद मिल सके।
नियमित दवा और सही पोषण है सबसे बड़ी ताकत
विशेषज्ञों के अनुसार, टीबी के इलाज में सबसे बड़ी चुनौती दवा बीच में छोड़ देना है। कई मरीज शुरुआती सुधार के बाद दवा बंद कर देते हैं, जिससे बीमारी दोबारा गंभीर रूप ले सकती है। डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा कि टीबी का इलाज पूरा करना बेहद जरूरी है। साथ ही पौष्टिक आहार, स्वच्छता और सकारात्मक सोच भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
इस कार्यक्रम में डॉ. कैलाश बिंद, डॉ. राजेश पटेल, डॉ. पंकज, शमीम अहमद, नीरज कुमार सिंह, एलटी मुकेश कुमार सिंह, राजेश श्रीवास्तव, अभिषेक, संदीप कुमार यादव, शेष नारायण सरोज, भोला, साहब अहमद और रामनारायण सहित कई लोग मौजूद रहे। मीरजापुर के लालगंज में शुरू हुई यह पहल सिर्फ एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को यह याद दिलाने की कोशिश है कि टीबी से लड़ाई डर से नहीं, जागरूकता और नियमित इलाज से जीती जाती है।
रिपोर्ट – संतोष देव गिरी



