बांदा में भड़का जनआक्रोश! कलक्ट्रेट बना रणभूमि, दरिंदगी और हमले पर सिस्टम को खुली चेतावनी

बांदा में गाजीपुर की दरिंदगी और पूर्व मंत्री पर हमले के विरोध में कलक्ट्रेट परिसर में भारी प्रदर्शन हुआ। विश्वकर्मा समाज ने दोषियों की गिरफ्तारी, पीड़ित परिवार को 50 लाख मुआवजा और पुलिस पर कार्रवाई की मांग करते हुए कड़ा आक्रोश जताया।

4पीएम न्यूज नेटवर्कः बांदा की सड़कों पर शनिवार को गुस्सा सिर्फ दिखाई नहीं दिया, बल्कि महसूस भी हुआ। गाजीपुर की दिल दहला देने वाली घटना और उसके बाद पूर्व मंत्री पर हुए हमले ने जिले में ऐसा आक्रोश भड़काया कि कलक्ट्रेट परिसर एक तरह से विरोध का रणक्षेत्र बन गया। विश्वकर्मा समाज के सैकड़ों लोग अखिल भारतीय विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के बैनर तले एकत्र हुए और प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में ज्ञापन था, लेकिन आवाज में सवाल,आखिर सिस्टम कब जागेगा?

गाजीपुर की घटना ने हिला दिया बांदा

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि गाजीपुर के कटरिया गांव में नाबालिग निशा के साथ हुई दरिंदगी और उसकी हत्या ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। आरोप है कि वारदात को छिपाने के लिए शव को गंगा में बहा दिया गया। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना है, जिस पर अब तक कठोर कार्रवाई नहीं हुई है।

पूर्व मंत्री पर हमला, पुलिस की मौजूदगी पर सवाल

आक्रोश यहीं नहीं रुका। जब पूर्व मंत्री रामआसरे विश्वकर्मा पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे, तो उन पर हमला हो गया। पुलिस की मौजूदगी में हुए पथराव में पूर्व मंत्री घायल हो गए और कई कार्यकर्ता भी चोटिल हुए। इस घटना ने कानून व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन हालात को नियंत्रित करने में पूरी तरह विफल रही।

कलक्ट्रेट बना विरोध का केंद्र

शनिवार को बांदा कलक्ट्रेट परिसर में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोग नारों और ज्ञापन के साथ अपनी मांगें लेकर पहुंचे, लेकिन माहौल धीरे-धीरे उग्र होता गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी कि अब सब्र खत्म हो चुका है और यदि न्याय नहीं मिला तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन में शामिल लोगों का आरोप था कि यह सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही और मिलीभगत का नतीजा है। उनका कहना था कि अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो न तो इतनी बड़ी घटना होती और न ही कानून व्यवस्था पर सवाल उठते।

ये हैं प्रमुख मांगें

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के सामने स्पष्ट मांगें रखीं-

  • हमलावरों की तत्काल गिरफ्तारी
  • नाबालिग बेटी के दोषियों को फांसी की सजा
  • पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा और सुरक्षा
  • आरोपी प्रधान प्रतिनिधि पर मुकदमा दर्ज
  • लापरवाह पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई

आंदोलन की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला, तो यह आक्रोश सड़कों से उठकर सत्ता के गलियारों तक पहुंचेगा। उनका कहना था कि यह केवल एक समुदाय का मुद्दा नहीं, बल्कि न्याय और सुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल है, जिसे अब अनदेखा नहीं किया जा सकता। 

इस पूरे घटनाक्रम ने बांदा प्रशासन के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ बढ़ता जन आक्रोश है, तो दूसरी तरफ कानून व्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन मांगों पर कितनी तेजी और गंभीरता से कार्रवाई करता है, या यह आक्रोश और बड़ा रूप लेता है।

रिपोर्ट – इक़बाल खान

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