बांदा में दहेज केस बना ‘खाकी विवाद’! FIR से चार्जशीट तक खेल के आरोप, सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

बांदा में दहेज उत्पीड़न मामले में पीड़िता आकांक्षा पांडेय ने महिला थाने पर गंभीर आरोप लगाए हैं। FIR से लेकर चार्जशीट तक हेरफेर और नाम हटाने के दावे से पुलिस कार्यशैली पर सवाल उठे हैं। मामला जनसुनवाई पोर्टल तक पहुंचा।

4पीएम न्यूज नेटवर्कः बांदा में दहेज उत्पीड़न का एक मामला अब सिर्फ कानूनी विवाद नहीं रहा, बल्कि पुलिस की कार्यशैली और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल बन गया है। पीड़िता आकांक्षा पांडेय ने महिला थाने की प्रभारी पर ऐसे आरोप लगाए हैं, जिन्होंने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है। पीड़िता का कहना है कि FIR दर्ज होने से लेकर चार्जशीट दाखिल होने तक पूरे मामले में कई स्तरों पर हेरफेर किया गया और उसका असली पक्ष रिकॉर्ड से हटाने की कोशिश की गई।

पीड़िता के गंभीर आरोप: “असली शिकायत बदल दी गई”

आकांक्षा पांडेय का आरोप है कि जब उसने दहेज उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई, तो उसका मूल प्रार्थना पत्र बदल दिया गया। उसके अनुसार, केस को कमजोर करने के लिए नया आवेदन तैयार कराया गया और पुराने तथ्यों को हटा दिया गया। पीड़िता का यह भी कहना है कि डेढ़ साल पुराने घटनाक्रम को यह कहकर नजरअंदाज कर दिया गया कि अब उस पर कानूनी धारा लागू नहीं होती।

चार्जशीट पर भी सवाल: “10 दिन तक रोकी गई फाइल”

मामले में सबसे बड़ा सवाल चार्जशीट को लेकर उठ रहा है। पीड़िता का आरोप है कि तैयार होने के बाद भी चार्जशीट को लगभग 10 दिनों तक रोके रखा गया। जब उसने जानकारी मांगी, तो उसे बताया गया कि चार्जशीट कोर्ट में दाखिल हो चुकी है, जबकि वास्तविकता में दस्तावेज थाने में ही पड़े मिले।

आरोपियों के नाम ही गायब?

सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि कथित चार्जशीट से उन लोगों के नाम ही गायब कर दिए गए, जिन पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। इस दावे ने पूरे मामले को और पेचीदा बना दिया है और जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जनसुनवाई पोर्टल पर “संतुष्ट” रिपोर्ट का विवाद

पीड़िता का कहना है कि उसे बिना जानकारी थाने बुलाकर फोटो खींची गई और बाद में जनसुनवाई पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया। रिपोर्ट में यह भी दर्ज कर दिया गया कि “आवेदिका संतुष्ट है”, जबकि उसका कहना है कि न तो उससे कोई फीडबैक लिया गया और न ही वह किसी कार्रवाई से संतुष्ट है।

सिस्टम पर सवाल, पीड़िता दर-दर भटक रही

आकांक्षा पांडेय का कहना है कि वह कई बार अधिकारियों के पास जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार शिकायतों के बावजूद न्याय न मिलना अब पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है।

पुलिस की भूमिका पर बहस तेज

यह मामला केवल एक दहेज उत्पीड़न की शिकायत नहीं रह गया है, बल्कि अब यह जांच प्रक्रिया, दस्तावेजी पारदर्शिता और पुलिस जवाबदेही पर गंभीर चर्चा का विषय बन गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला पुलिसिंग व्यवस्था के लिए बड़ा सवाल खड़ा करेगा।

रिपोर्ट – इक़बाल खान

यह भी पढ़ें: बांदा में भड़का जनआक्रोश! कलक्ट्रेट बना रणभूमि, दरिंदगी और हमले पर सिस्टम को खुली चेतावनी

Related Articles

Back to top button