एक तरफ “जनसंख्या नियंत्रण” का नारा, दूसरी तरफ “4 बच्चे पैदा करो और RSS को दो” धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर घमासान
धीरेंद्र शास्त्री जैसे कथावाचक अक्सर हिंदू समाज को जनसंख्या बढ़ाने की बात करते हैं। लेकिन इसमें आरएसएस को बच्चे समर्पित करने की बात डरावनी है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री एक बार फिर चर्चा में बने हुए हैं।
दरअसल बागेश्वर ने नागपुर में हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एक विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि हर परिवार को कम से कम चार बच्चे पैदा करने चाहिए और उनमें से एक को आरएसएस को समर्पित कर देना चाहिए।
यह बयान ‘भारतदुर्ग शक्तिस्थल’ के भूमिपूजन कार्यक्रम में दिया गया, जहां उन्होंने आरएसएस के कार्यकर्ताओं की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि आपदा के समय लोग भागते हैं, लेकिन आरएसएस वाले मदद करने जाते हैं।
यह बयान सिर्फ सलाह नहीं लगता, बल्कि एक संगठित एजेंडे का हिस्सा दिखाई देता है। धीरेंद्र शास्त्री जैसे कथावाचक अक्सर हिंदू समाज को जनसंख्या बढ़ाने की बात करते हैं। लेकिन इसमें आरएसएस को बच्चे समर्पित करने की बात डरावनी है।
इससे लगता है कि परिवारों को निजी जीवन से ऊपर उठाकर एक खास विचारधारा की सेवा में लगाया जाए। सामान्य परिवार जहां बच्चों को अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य और खुशहाली देना चाहते हैं, वहां उन्हें एक बच्चे को संगठन को दे देने की सलाह समाज को तोड़ने वाली है।
बीजेपी और आरएसएस के बीच गहरा संबंध सब जानते हैं। आरएसएस बीजेपी की विचारधारा का आधार माना जाता है। ऐसे में यह बयान सीधे तौर पर बीजेपी की राजनीति को मजबूत करने का प्रयास लगता है।
जब देश में बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की परेशानी और युवाओं का भविष्य अंधकारपूर्ण है, तब चार बच्चे पैदा करने और एक को आरएसएस को देने की बात लोगों का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने की कोशिश है। गरीब परिवार पहले से ही दो बच्चों को पालने में परेशान हैं। चार बच्चों की सलाह उनके लिए बोझ बढ़ाएगी। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर खर्च कम हो जाएगा।
यह बयान महिलाओं के अधिकारों पर भी हमला है। परिवार नियोजन और महिला सशक्तिकरण की दिशा में देश आगे बढ़ रहा है। लेकिन ऐसे बयान महिलाओं को सिर्फ बच्चे पैदा करने की मशीन बना देते हैं। एक बच्चे को आरएसएस जैसे संगठन को समर्पित करने की बात व्यक्तिगत आजादी छीन लेती है। बच्चे माता-पिता की खुशी और सपने होते हैं, न कि किसी संगठन की भर्ती का माध्यम।
आरएसएस पहले से ही युवाओं को अपनी शाखाओं में खींचता है। अब बच्चे के जन्म से ही समर्पण की बात करके वे भविष्य के कार्यकर्ता तैयार करना चाहते हैं। आरएसएस और बीजेपी की विचारधारा अक्सर भय और विभाजन पर टिकी दिखती है। हिंदू जनसंख्या घटने का डर दिखाकर वे लोग को एकजुट करने की कोशिश करते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि भारत विविधतापूर्ण देश है। यहां सभी धर्मों के लोग शांति से रहते हैं। जनसंख्या पर इस तरह का जोर देश को आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर करेगा।
यह बयान सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाता है। जब एक धार्मिक नेता आरएसएस को बच्चे देने की बात करता है, तो दूसरे समुदायों में डर पैदा होता है। वे सोचते हैं कि क्या उनकी संस्कृति और अस्तित्व पर खतरा है। इससे तनाव बढ़ता है। बीजेपी सरकार में ऐसे बयान अक्सर आते रहते हैं, जो साबित करते हैं कि सत्ता में रहते हुए भी वे ध्रुवीकरण की राजनीति नहीं छोड़ते। विकास, अच्छे शासन और समावेशी नीतियों की बजाय वे पुराने एजेंडे पर अड़े रहते हैं।
आम नागरिक को समझना चाहिए कि परिवार उनका निजी मामला है। बच्चे पैदा करना उनकी मर्जी, आर्थिक स्थिति और जिम्मेदारी पर निर्भर करता है। किसी संगठन या विचारधारा के लिए बच्चे समर्पित करने की बात पुरानी सामंती सोच है। आज का समय शिक्षा, विज्ञान और प्रगति का है। बीजेपी और आरएसएस जैसी ताकतें अगर समाज को पिछड़ने की ओर धकेल रही हैं, तो लोगों को जागरूक होकर इसका विरोध करना चाहिए। असली राष्ट्र सेवा शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से होती है, न कि संगठन भर्ती से।
धीरेंद्र शास्त्री का यह बयान एक बार फिर दिखाता है कि सांप्रदायिक और संगठनवादी एजेंडा कितना खतरनाक हो सकता है। देश को एकजुट और प्रगतिशील बनाने की जरूरत है, न कि बच्चों को आरएसएस जैसी संस्थाओं को सौंपने की। हालांकि ये कोई पहली दफा नहीं है जब उन्होंने ऐसा विवादित बयान दिया हो वो अक्सर ऐसे बयान देते रहते हैं। लेकिन मजाल है कि भाजपा उनपर नकेल लगाए।



