यूपी में दिखने लगा अल नीनो का असर! किसानों के लिए एक्सपर्ट्स ने जारी किया बड़ा अलर्ट

उत्तर प्रदेश में अल नीनो का असर दिखने लगा है। मीरजापुर के कृषि विज्ञान केंद्र बरकछा में किसानों को खरीफ फसलों, प्राकृतिक खेती, मोटे अनाज और कम पानी वाली खेती अपनाकर नुकसान से बचने की सलाह दी गई।

4पीएम न्यूज नेटवर्क : उत्तर प्रदेश में मौसम का बदलता मिजाज अब खेती-किसानी पर भी असर डालने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो (El Niño) का प्रभाव केवल पूर्वांचल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में इसकी आहट महसूस की जा रही है। ऐसे में किसानों को पारंपरिक खेती के बजाय मौसम के अनुरूप नई रणनीति अपनाने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के राजीव गांधी दक्षिणी परिसर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र, बरकछा (मीरजापुर) में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही की अध्यक्षता में एक बृहद किसान कार्यशाला आयोजित की गई।

अल नीनो के बीच खरीफ फसलों के लिए नई रणनीति

कार्यशाला में मीरजापुर समेत आसपास के जिलों से पहुंचे हजारों किसानों, महिला किसानों और युवाओं को कृषि वैज्ञानिकों ने मौसम की चुनौतियों से निपटने के उपाय बताए। विशेषज्ञों ने कहा कि खरीफ सीजन में कम अवधि वाली धान की किस्मों को प्राथमिकता दें और पारंपरिक रोपाई की जगह सीधी बुवाई अपनाएं। इसके अलावा तिल, मूंगफली, उड़द, मूंग और अरहर जैसी दलहनी एवं तिलहनी फसलें कम पानी, कम लागत और कम समय में बेहतर उत्पादन और आय का विकल्प बन सकती हैं।

मोटे अनाज और मिश्रित खेती से बढ़ेगी आमदनी

कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष प्रो. श्रीराम सिंह ने बताया कि बाजरा, ज्वार, रागी, सांवा और कोदो जैसे मोटे अनाज अल नीनो की परिस्थितियों में किसानों के लिए बेहतर विकल्प हैं। इन फसलों की सरकारी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर भी की जाती है। उन्होंने सहफसली और मिश्रित खेती अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, लागत घटती है और टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिलता है।

प्राकृतिक खेती अपनाने की दी सलाह

प्रो. श्रीराम सिंह ने किसानों से प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, आच्छादन और वाफसा जैसी विधियां अपनाकर किसान अल नीनो के दुष्प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं। जल संरक्षण और कम लागत वाली खेती भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत होगी।

उन्नत बीज सीमित मात्रा में उपलब्ध

कार्यशाला के दौरान किसानों को यह भी जानकारी दी गई कि कृषि विज्ञान केंद्र, बरकछा में उड़द IPU 13-2, मूंग शिखा और अरहर IPA-203 के उन्नत बीजों की बिक्री शुरू हो चुकी है। बीज सीमित मात्रा में “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इच्छुक किसान केंद्र से संपर्क कर बीज प्राप्त कर सकते हैं।

रिपोर्ट- संतोष देव गिरी, मीरजापुर

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