किसान की जमीन विवाद ने खोली प्रशासन की पोल, तहसीलदार और ब्लॉक प्रमुख पर केस

बांदा के जौहरपुर गांव में जमीन नामजदगी विवाद में बड़ा मोड़ आया है। कोर्ट के आदेश पर तहसीलदार राधेश्याम, ब्लॉक प्रमुख दीप शिखा समेत 9 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। किसान की शिकायत के बाद पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

4pm न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन और राजनैतिक प्रभाव को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सदर तहसील क्षेत्र के जौहरपुर गांव में जमीन की नामजदगी को लेकर हुए विवाद में अब तहसीलदार, ब्लॉक प्रमुख और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला तब दर्ज हुआ जब पीड़ित किसान ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और न्यायिक आदेश के बाद पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी।

चकबंदी के दौरान हुई थी जमीन की नामजदगी में गलती

मामले की शुरुआत चकबंदी के समय हुई एक कथित गलती से हुई। आरोप है कि चकबंदी प्रक्रिया के दौरान जमीन की नामजदगी में गड़बड़ी हो गई, जिसके कारण किसान की जमीन दूसरे पक्ष के नाम दर्ज कर दी गई। पीड़ित किसान का कहना है कि इस गलती की शिकायत उसने कई बार प्रशासन से की, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई।

तहसील कोर्ट में की थी शिकायत

किसान ने अपनी शिकायत को लेकर सदर तहसील कोर्ट में भी मामला दर्ज कराया था। आरोप है कि उस समय के तहसीलदार राधेश्याम ने मामले की निष्पक्ष सुनवाई नहीं की और ब्लॉक प्रमुख दीप शिखा के प्रभाव में आकर उनके पक्ष में फैसला सुना दिया। पीड़ित किसान का दावा है कि उसने कई बार अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया।

अदालत के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा

जब स्थानीय स्तर पर न्याय नहीं मिला तो किसान ने अदालत का सहारा लिया। कोर्ट में दाखिल अर्जी पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने धारा 156(3) के तहत पुलिस को मामले में मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। इसके बाद पुलिस ने तहसीलदार, ब्लॉक प्रमुख दीप शिखा समेत कुल 9 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है और दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

जौहरपुर गांव का पूरा मामला

यह पूरा विवाद बांदा जिले की सदर तहसील के जौहरपुर गांव से जुड़ा हुआ है। यहां चकबंदी के दौरान हुई जमीन की नामजदगी को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। किसान का आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर गलती को सुधारने के बजाय उसे दबाने की कोशिश की गई।

वर्तमान में पैलानी तहसील में तैनात हैं तहसीलदार

जिस समय यह फैसला दिया गया था, उस समय राधेश्याम सदर तहसील में तहसीलदार के पद पर तैनात थे। फिलहाल वह जनपद बांदा की पैलानी तहसील में तैनात बताए जा रहे हैं। अब पुलिस द्वारा दर्ज मुकदमे के बाद पूरे मामले की जांच शुरू हो गई है। अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तर पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

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