मीरजापुर: मड़वा धनावल और करनपुर जंगल में आग से मचा हड़कंप, वन विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
मीरजापुर के ड्रमंडगंज वन क्षेत्र के करनपुर और मड़वा धनावल जंगल में लगी भीषण आग पर तीसरे दिन काबू पाया गया। घटना के बाद वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने विभाग पर लापरवाही और देर से कार्रवाई करने के आरोप लगाए हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मीरजापुर के ड्रमंडगंज वन क्षेत्र में लगी भीषण आग भले ही तीसरे दिन जाकर नियंत्रित कर ली गई हो, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर जंगलों की सुरक्षा व्यवस्था और वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्यप्रदेश सीमा से सटे करनपुर और मड़वा धनावल जंगल कई घंटों तक आग की लपटों में घिरे रहे। आग से हरे-भरे पेड़, वनस्पतियां और वन्यजीवों का बड़ा नुकसान हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग हर बार की तरह इस बार भी देर से सक्रिय हुआ। स्थानीय लोग इसे “सांप निकल जाने के बाद लकीर पीटने” जैसी कार्रवाई बता रहे हैं।
रातभर धधकते रहे जंगल
बताया जा रहा है कि मंगलवार दोपहर लगी आग ने शाम होते-होते विकराल रूप ले लिया। तेज हवाओं के कारण आग पहाड़ी इलाकों में तेजी से फैलती चली गई। करनपुर और मड़वा धनावल के जंगल पूरी रात सुलगते रहे। बुधवार को वन विभाग की टीम ने आग बुझाने का दावा किया, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार देर रात तक पहाड़ियों से कई स्थानों पर धुआं उठता दिखाई देता रहा। लोगों को आशंका है कि कहीं अंदर ही अंदर चिंगारियां अब भी सुलग रही हों।
वन विभाग ने बताया मुश्किल था आग पर काबू पाना
वन विभाग के मुताबिक करनपुर जंगल की आग पर बुधवार दोपहर तक काबू पा लिया गया था, जबकि मड़वा धनावल जंगल में आग बुझाने का काम देर तक चलता रहा। वनरक्षक अनादि नाथ तिवारी ने बताया कि तेज हवाओं के कारण आग बुझाने में काफी कठिनाई आई। हालांकि टीम ने लगातार प्रयास कर दोनों क्षेत्रों में आग को नियंत्रित कर लिया है।
तेंदूपत्ता कारोबार से जोड़कर देखी जा रही घटना
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि जंगल में लगी आग का संबंध तेंदूपत्ता कारोबार से हो सकता है। कुछ लोगों का दावा है कि तेंदूपत्ता से जुड़े लोगों ने जानबूझकर आग लगाई हो, ताकि जंगल के भीतर गतिविधियों पर किसी का ध्यान न जाए। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वन विभाग भी मामले की जांच की बात कह रहा है।
ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाए गंभीर आरोप
आसपास के गांवों के लोगों का आरोप है कि जंगल में कोई भी घटना होने पर वन विभाग बिना जांच-पड़ताल के ग्रामीणों को ही जिम्मेदार ठहराने लगता है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों में पेड़ों की कटाई और वन्यजीवों के शिकार जैसी घटनाओं पर विभाग अक्सर सख्त कार्रवाई करने से बचता है। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि आग लगने के बाद विभाग की टीम समय पर मौके पर नहीं पहुंची, जिससे आग ने बड़ा रूप ले लिया।
पहले भी विवादों में रहा है वन विभाग
ड्रमंडगंज वन क्षेत्र पहले भी विवादों में रह चुका है। कुछ समय पहले वन विभाग परिसर से पेड़ों की कटाई कर ट्रैक्टर पर लकड़ी ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। बावजूद इसके किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से क्षेत्र में वन विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली सवालों के घेरे में रही है, लेकिन शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती।
जंगल और वन्यजीवों पर बढ़ता खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती आग की घटनाएं जंगलों के पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही हैं। आग से न केवल पेड़-पौधे नष्ट होते हैं, बल्कि वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास भी प्रभावित होता है। मीरजापुर के इन जंगलों में लगी आग ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जंगलों की सुरक्षा के लिए बनाई गई व्यवस्थाएं जमीन पर कितनी प्रभावी हैं।
रिपोर्ट – संतोष देव गिरी
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