उत्तराखंड के पूर्व CM खंडूरी नहीं रहे, PM मोदी ने कहा- जनता के सच्चे सेवक थे

भुवन चंद खंडूरी को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी राजनीति में लेकर आए. 1990 के दशक में खंडूरी सेना से रिटायर होने के बाद सियासत की दुनिया में आए. उन्हें वाजपेयी के भरोसेमंदों में गिना जाता था.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भुवन चंद खंडूरी को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी राजनीति में लेकर आए. 1990 के दशक में खंडूरी सेना से रिटायर होने के बाद सियासत की दुनिया में आए. उन्हें वाजपेयी के भरोसेमंदों में गिना जाता था.

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता भुवन चंद्र खंडूरी का लंबी बीमारी के बाद आज मंगलवार को निधन हो गया. वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा था. खंडूरी के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताया और कहा कि उत्तराखंड के विकास के लिए वे हमेशा समर्पित रहे, जो मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में भी साफ तौर पर दिखा भी.

पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (रिटायर) लंबे समय से अस्पताल में भर्ती थे और उन्होंने आज देहरादून के निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली. उन्हें हर्ट की समस्या थी. पिछले साल उनकी सफल ब्रेन सर्जरी हुई थी. वह प्रदेश के 2 बार (2007 से 2009 और 2011 से 2012) मुख्यमंत्री रहे. वह 91 साल के थे.

सदैव याद किए जाएंगे खंडूरीः PM मोदी
खंडूरी के परिवार में पत्नी अरुणा, एक बेटा मनीष और बेटी रितु खंडूरी भूषण हैं. खंडूरी की बेटी और राज्य विधानसभा की अध्यक्ष रितु खंडूरी भूषण ने पिता के निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि बुजुर्ग नेता ने करीब 11 बजे एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली. वह लंबे समय से उम्र संबंधी समस्याओं से ग्रस्त थे और पिछले दिनों में कई बार अस्पताल में भर्ती हुए.

पीएम नरेंद्र मोदी ने खंडूरी के निधन पर शोक जताया. उन्होंने कहा, “खंडूरी जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है. सशस्त्र बलों से लेकर राजनीतिक जगत में उन्होंने बहुमूल्य योगदान दिया, जिसके लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा. उत्तराखंड के विकास के लिए वे हमेशा समर्पित रहे, जो मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में भी साफ तौर पर दिखा. केंद्रीय मंत्री के रूप में भी उनका कार्यकाल हर किसी को प्रेरित करने वाला है.”

CM धामी ने निधन पर जताया शोक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खंडूरी के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया. अपने शोक संदेश में मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि जनरल खंडूड़ी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन एवं समर्पण का अद्वितीय उदाहरण पेश किया. इसके बाद सार्वजनिक जीवन में भी खंडूरी ने उत्तराखंड के विकास, सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई.

सीएम धामी ने आगे कहा, “खंडूरी ने कई अहम फैसले लेकर प्रदेश के हित में विकास को नई दिशा प्रदान की.” उन्होंने यह भी कहा कि खंडूरी की सादगी, स्पष्टवादिता एवं कार्यकुशलता सदैव हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगी. उनका निधन उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी अपूरणीय क्षति है. भगावन शोकाकुल परिवार को दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें.

खंडूरी को वाजपेयी राजनीति में लाए
1 अक्टूबर 1934 को जन्मे भुवन चंद्र खंडूरी उत्तराखंड के चौथे मुख्यमंत्री रहे थे. उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी राजनीति में लेकर आए. 1990 के दशक में खंडूरी सेना से रिटायर होने के बाद सियासत की दुनिया में आए. उन्हें वाजपेयी के भरोसेमंदों में गिना जाता था. साल 1991 में वह पहली बार गढ़वाल संसदीय सीट से सांसद चुने गए. वह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ सदस्यों में से एक रहे हैं. पहली बार सांसद बनने के 2 साल के अंदर ही उन्हें पार्टी का मुख्य सचेतक बना दिया गया.

हालांकि उन्हें 1996 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. लेकिन 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्हें सड़क परिवहन मंत्री बनाया गया. उनके ही दौर में देश में सड़कों की शक्ल बदलने और हाईवे बनाने का काम हुआ था.

इस बीच नए बने राज्य उत्तराखंड की सियासत में बीजेपी के अंदर गुटबाजी हावी होने लगी. ऐसे में साल 2007 में खंडूरी को प्रदेश का नया मुख्यमंत्री बनाया गया. हालांकि वह महज 2 साल ही पद पर रह सके. इसके बाद वह साल 2011 में फिर से मुख्यमंत्री बनाए गए.

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