गो बैक गवर्नर, बजट सत्र ने गर्माया यूपी का माहौल

- विस में हंगामा, विपक्ष ने किए प्रहार
- आक्रामक मुद्रा में सपा
- जनहित के सवालों से बौखला गयी सरकार
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र किसी शांत औपचारिक संसदीय कार्यवाही की तरह नहीं शुरू हुआ बल्कि एक सियासी रणभूमि की तरह खुला। सदन के बाहर पोस्टर थे भीतर नारे और इन नारों में कोई हड़बड़ी नहीं थी बल्कि एक सोची समझी रणनीति थी।
यह शोर यूं ही नहीं उठा था यह उस असंतोष की आवाज थी जो लंबे समय से सत्ता के गलियारों में दबाया जा रहा था और अब बजट सत्र के पहले ही दिन फूट पड़ा। गो बैक गवर्नर का नारा सिर्फ एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ नहीं था। यह उस पूरे ढांचे पर सीधा हमला था जिसे विपक्ष अब सरकार का औजार मानने लगा है। विपक्ष की नजर में राज्यपाल अब तटस्थ संवैधानिक प्रहरी नहीं रहा बल्कि सरकार की राजनीतिक इच्छाओं का विस्तार बन चुका हैं। यही वजह है कि यह नारा व्यक्तिगत विरोध का नहीं बल्कि संवैधानिक असहमति का प्रतीक बन गया।

समाजवादी पार्टी ने जोरदार तरीके से उठाए मुद्दे
समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे को ऐसे समय उठाया जब योगी सरकार बजट के जरिए विकास निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर और कल्याण की एक सुनियोजित कहानी गढऩे की तैयारी में थी। सरकार चाहती थी कि चर्चा आंकड़ों पर हो योजनाओं पर हो उपलब्धियों पर हो। लेकिन विपक्ष ने साफ संकेत दे दिया कि कहानी सुनाने से पहले सवालों का सामना करना पड़ेगा। सपा का संदेश स्पष्ट रहा कि बजट की भाषा में विकास लिखा जा सकता है लेकिन राजनीति की भाषा में इतिहास के अधूरे जवाब आज भी बाकी हैं।
पहली बार आर्थिक सर्वेक्षण
उत्तर प्रदेश का बजट सत्र हर साल की तरह इस बार भी राज्यपाल के अभिभाषण से शुरू हुआ। यह अभिभाषण सरकार की नीतियों, प्राथमिकताओं और आगामी वित्तीय वर्ष की दिशा का खाका पेश करता है। विपक्ष के शोर-शराबे के बावजूद राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने अभिभाषण में कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से प्रदेश में करीब छह करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। बजट सत्र की शुरुआत से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मीडिया से बातचीत में बताया कि राज्यपाल के अभिभाषण के उपरांत प्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण सदन के पटल पर रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पहला अवसर है जब कोई राज्य सरकार अपनी आर्थिक उपलब्धियों को इस तरह प्रस्तुत कर रही है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश को पिछड़ेपन से बाहर निकालकर भारतीय अर्थव्यवस्था में एक मजबूत भूमिका में स्थापित किया गया है।
सांस्कृतिक सम्मान और ऐतिहासिक स्मृति पर दिखा विचार
इसी शोर के बीच एक और मुद्दा पूरी ताकत से उभरा अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा का। पहली नजर में यह सवाल सांस्कृतिक सम्मान और ऐतिहासिक स्मृति से जुड़ा लगता है लेकिन सियासत में कुछ भी सिर्फ प्रतीक नहीं होता। यह मुद्दा असल में पिछड़े बनाम सवर्ण सत्ता बनाम प्रतीक और इतिहास बनाम वर्तमान की उस राजनीति को उजागर करता है जो उत्तर प्रदेश में लंबे समय से भीतर ही भीतर पक रही है।
सदन की तस्वीर ये कर रही थी बयां
राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान सपा विधायक हाथों में सरकार विरोधी नारे लिखी तख्तियां लेकर सदन में खड़े हो गए और राज्यपाल गो बैक के नारे लगाए। हंगामे के बीच सपा विधायक पल्लवी पटेल अपनी सीट पर बैठी रहीं। पार्टी के अन्य सदस्यों द्वारा बुलाए जाने के बावजूद उन्होंने प्रदर्शन में शामिल होने से परहेज किया। इस दौरान सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान ने अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा से जुड़े मुद्दे पर विरोध दर्ज कराया। वहीं सपा विधायकों की तख्तियों पर विकास के नाम पर विनाश, अस्पतालों में न दवा — न सुविधा, गरीबों की सुनवाई नहीं, पीडीए खत्म करेगा भाजपा का राज और एसआईआर एक साजिश है जैसे नारे लिखे हुए थे। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत समाजवादी पार्टी के विधायकों ने सदन में सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और लगातार गो-बैक, गो-बैक के नारे लगाए।



