जेल से सिर्फ 103 फीट दूर हाईराइज! निर्माण पर उठे सवाल, डीएम-एसएसपी के सामने बढ़ी चुनौती

गोरखपुर जिला जेल से महज 103 फीट दूर बन रही बहुमंजिला इमारत को लेकर सुरक्षा सवाल उठे हैं। जेल अधीक्षक की आपत्ति के बाद भी निर्माण जारी रहने की बात सामने आई है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: गोरखपुर जिला जेल से महज 103 फीट की दूरी पर बन रही बहुमंजिला इमारत को लेकर सुरक्षा संबंधी सवाल खड़े हो गए हैं। जेल अधीक्षक दिलीप पांडेय की ओर से निर्माण पर आपत्ति जताए जाने के बावजूद काम जारी रहने की बात सामने आई है। ऐसे में मामला सिर्फ भवन निर्माण की अनुमति तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि संवेदनशील जेल परिसर की सुरक्षा से भी जुड़ गया है।

जेल प्रशासन की आपत्ति के बाद भी निर्माण जारी

जिला जेल अधीक्षक ने संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर प्रस्तावित निर्माण को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने से सवाल उठ रहा है कि जेल प्रशासन की आपत्ति पर संबंधित विभागों ने क्या जांच की और उसका निष्कर्ष क्या रहा।

जेल जैसे संवेदनशील परिसर के बेहद करीब बहुमंजिला भवन बनने से भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, निर्माण नियमों के उल्लंघन की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

आज की अनुमति, कल जवाबदेही का सवाल

जिला जेल में गंभीर आपराधिक मामलों में निरुद्ध बंदियों के मद्देनजर आसपास की सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में भवन की प्रस्तावित ऊंचाई, उसकी स्थिति और जेल से दूरी जैसे तकनीकी पहलुओं की समीक्षा जरूरी है।

सवाल यह भी है कि यदि निर्माण को सभी आवश्यक अनुमतियां मिली हैं तो सुरक्षा संबंधी आपत्ति का समाधान कैसे किया गया। वहीं, यदि किसी नियम या सुरक्षा मानक की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी होगा।

डीएम-एसएसपी के सामने दोहरी चुनौती

अब प्रशासन के सामने एक तरफ निर्माण की वैधता और स्वीकृतियों की जांच का विषय है, तो दूसरी ओर जेल की सुरक्षा। मामले में निर्माण से जुड़े दस्तावेज, भवन की प्रस्तावित ऊंचाई और संवेदनशील परिसर के आसपास लागू नियमों की तकनीकी समीक्षा समय रहते की जानी चाहिए। डीएम दीपक मीणा का कहना है, की हाईराइज के निर्माण से यदि जेल की सुरक्षा को लेकर जेलर की तरफ से पत्र दिया गया है तो इसकी जांच करवाएंगे। जीडीए से जानकारी लेकर इस पर अग्रिम कार्रवाई करेंगे।

रिपोर्ट -अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर

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