फर्जी डिप्लोमा से सरकारी नौकरी? उन्नाव अस्पताल का मामला बना चर्चा का विषय
उन्नाव जिला महिला अस्पताल में फर्जी डिप्लोमा के आधार पर नौकरी करने का मामला सामने आया है। प्रभारी अधीक्षक अरविन्द आनंद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुलासा किया कि स्टाफ नर्स पर 2020 से गलत दस्तावेजों के सहारे नौकरी करने का आरोप है। मामले की जांच जारी है।

4 पीएम न्यूज़ नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के उन्नाव से स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। जिला महिला अस्पताल में तैनात एक स्टाफ नर्स पर फर्जी मेडिकल डिप्लोमा के आधार पर नौकरी पाने का आरोप लगा है। इस मामले का खुलासा अस्पताल प्रशासन की ओर से की गई जांच के बाद हुआ है। अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक अरविन्द आनंद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि स्टाफ नर्स सपना अग्रवाल वर्ष 2020 से कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी कर रही थीं। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
बिना छुट्टी गए तो शुरू हुई जांच
बताया जा रहा है कि स्टाफ नर्स सपना अग्रवाल अचानक बिना सूचना के छुट्टी पर चली गई थीं। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने उनके दस्तावेजों की जांच कराई। जांच के दौरान यह शक पैदा हुआ कि नौकरी के समय लगाए गए मेडिकल डिप्लोमा के दस्तावेज संदिग्ध हो सकते हैं। जांच आगे बढ़ने पर कथित तौर पर डिप्लोमा से जुड़े दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आई, जिसके बाद मामला गंभीर हो गया।
सिफारिश के आधार पर नौकरी मिलने का आरोप
अस्पताल प्रशासन का आरोप है कि फर्जी डिप्लोमा के आधार पर पूर्व में तैनात रहे मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) से सिफारिश कराकर नौकरी हासिल की गई थी। हालांकि इस पूरे मामले की आधिकारिक जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ होगी।
अधिकारियों को भेजा गया पत्र
प्रभारी अधीक्षक अरविन्द आनंद ने इस मामले में नर्स को सेवा से हटाने और अब तक दिए गए वेतन की रिकवरी के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जिलाधिकारी से लेकर स्वास्थ्य विभाग के निदेशक तक को लिखित जानकारी भेजी गई है, ताकि नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई हो सके।
जांच में देरी का भी आरोप
प्रभारी अधीक्षक ने यह भी आरोप लगाया कि मामला सामने आने के बाद भी जांच की प्रक्रिया काफी समय से लंबित है। उनका कहना है कि इतने गंभीर मामले में तेजी से कार्रवाई होनी चाहिए ताकि स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता बनी रहे।
अस्पताल प्रशासन की नजर में गंभीर मामला
यह मामला उमा शंकर दीक्षित संयुक्त चिकित्सालय से जुड़ा बताया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर जांच जारी है और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
रिपोर्ट- रंजन बाजपई
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