डबल इंजन सरकार के दावे फेल, OPD में डॉक्टर पर गिरी अस्पताल की छत
राजस्थान के अलवर स्थित सेटेलाइट अस्पताल में बड़ा हादसा हो गया... ओपीडी में मरीज देख रहे डॉक्टर पर अचानक छत का प्लास्टर...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः राजस्थान के अलवर में हुए अस्पताल हादसे ने एक बार फिर बीजेपी सरकार के उन दावों की पोल खोल दी है.. जिनमें बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था और विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं.. सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि अस्पताल की छत क्यों गिरी.. बल्कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब खतरे की जानकारी पहले से थी.. तब सरकार और जिम्मेदार अधिकारी आखिर कर क्या रहे थे..
जानकारी के मुताबिक अलवर के सेटेलाइट अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे थे.. तभी अचानक छत का भारी प्लास्टर और पंखा नीचे आ गिरा.. हादसे में डॉक्टर और एक महिला मरीज घायल हो गए.. यह किसी चमत्कार से कम नहीं कि इससे बड़ा नुकसान नहीं हुआ.. लेकिन क्या हर बार लोगों की जान बच जाने को ही सरकार अपनी उपलब्धि बताएगी..
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल प्रशासन पिछले करीब 10 महीनों से भवन की जर्जर हालत की जानकारी लगातार अधिकारियों को देता रहा.. कई बार पत्र लिखे गए, मरम्मत की मांग की गई.. और जानकारी के मुताबिक मरम्मत के लिए राशि भी स्वीकृत हो चुकी थी.. फिर सवाल उठता है कि आखिर काम क्यों नहीं हुआ.. अगर पैसा मंजूर था तो फाइल किसकी मेज पर अटकी रही.. किसकी लापरवाही ने मरीजों और डॉक्टरों की जान खतरे में डाल दी..
बीजेपी सरकार अक्सर डबल इंजन सरकार का नारा देकर तेज विकास का दावा करती है.. लेकिन अगर सरकारी अस्पतालों की छतें ही लोगों पर गिरने लगें.. तो ऐसे दावों का क्या मतलब रह जाता है.. स्वास्थ्य जैसी बुनियादी व्यवस्था भी अगर सुरक्षित नहीं है.. तो करोड़ों रुपये के विज्ञापन और भाषण जनता के किस काम के हैं..
सरकार की जिम्मेदारी सिर्फ नई योजनाओं का प्रचार करना नहीं.. बल्कि पहले से मौजूद सरकारी अस्पतालों को सुरक्षित और बेहतर बनाना भी है.. अगर चेतावनी मिलने के बावजूद मरम्मत नहीं कराई गई.. तो यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है..
वहीं यह घटना बताती है कि सरकारी सिस्टम तब तक नहीं जागता.. जब तक कोई बड़ा हादसा न हो जाए.. अगर इस बार किसी की जान चली जाती.. तो क्या सिर्फ जांच समिति बनाकर जिम्मेदारी पूरी हो जाती.. क्या हर हादसे के बाद यही कहा जाएगा कि दोषियों पर कार्रवाई होगी.. जनता यह जानना चाहती है कि जिन अधिकारियों ने लगातार मिल रही चेतावनियों को नजरअंदाज किया.. उन पर क्या कार्रवाई होगी.. क्या सरकार उनकी जवाबदेही तय करेगी या फिर मामला कुछ दिनों की सुर्खियों के बाद ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा..



