इंसानियत बनी सबसे बड़ा धर्म, आग में फंसे लोगों के लिए फरिश्ता बने मुसलमान
आज कल इस गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। लेकिन कायदे से न गतो सिस्टम इसपर गौर करता है और न ही मौजूदा भाजपा सरकार। भाजपा सरकार कुछ करती है तो वो है हिन्दू-मुसलमान।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: आज कल इस गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। लेकिन कायदे से न गतो सिस्टम इसपर गौर करता है और न ही मौजूदा भाजपा सरकार। भाजपा सरकार कुछ करती है तो वो है हिन्दू-मुसलमान।
लेकिन वो कहते हैं न कि इंसानियत का कोई मजहब नहीं होता, और ये एक बार फिर साबित किया है दिल्ली के लोगों ने। दरअसल दिल्ली के मालवीय नगर इलाके के एक होटल में बीते बुधवार को लगी भीषण और दर्दनाक आग ने पूरे देश को झंझोर कर रख दिया है।
इस अग्निकांड में कुल 21 लोगों की जान चली गई, जिनमें से 11 विदेशी नागरिक थे जो अपने परिजनों का इलाज कराने भारत आए थे. लेकिन आग लगने के बाद फायर विभाग और पुलिस पहुंचने से पहले ही आस-पास रहने वाले स्थानीय लोग मदद के लिए आगे आए। खास तौर पर कुछ मुस्लिम युवक और एक पिता-पुत्र ने अपनी जान जोखिम में डालकर कई लोगों को बचाया।
दरअसल होटल के ठीक सामने रजाई-गद्दे की दुकान चलाने वाले रियाज़ुद्दीन मंसूरी और उनके बेटे अरमान मंसूरी ने अपनी जान और दुकान की परवाह न करते हुए जलती इमारत से कूद रहे करीब 12 से 15 लोगों की जान बचा ली. इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अरमान की दुकान का सारा माल इस्तेमाल होने के कारण पूरी तरह बर्बाद हो गया और अब वह बिकने लायक नहीं बचा है. रियाज़ुद्दीन ने बेहद भावुक होते हुए बताया कि युद्ध के चलते बाजार पहले ही मंदा चल रहा था और इस हादसे में उनका करीब डेढ़ से दो लाख रुपये का नुकसान हो गया है.
मंसूरी परिवार के लिए यह नुकसान बहुत बड़ा है क्योंकि दो महीने बाद घर में बेटी की शादी है. छह बेटियों और एक बेटे के पिता रियाज़ुद्दीन कहते हैं, “हम छोटे कारोबारी हैं, हमारे लिए यह बहुत बड़ी रकम है. अगर प्रशासन से थोड़ी मदद मिल जाए तो हम दोबारा खड़े हो जाएंगे.” हालांकि, तमाम तंगी के बावजूद अरमान को इस बात का गर्व है कि उन्होंने अपना सामान बचाने से पहले लोगों की जान बचाने को प्राथमिकता दी.
लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि भाजपा सरकार में इन्ही मुसलमानों को खूब बदनाम किया जाता है नीचे दिखाया जाता है। और जब वक़्त आता है तो मुसलमान यह साबित कर देता है कि उसके लिए सबसे ऊपर है इंसानियत। तभी तो ये लोग बिना किसी धर्म या जाति का भेदभाव किए आग के अंदर घुसे। उन्होंने खिड़कियां तोड़ीं, रस्सियां फेंकीं, CPR किया और सड़क पर गद्दे-बिस्तर बिछाकर लोगों को कूदने में मदद की।
रियाजुद्दीन और उनके बेटे आरमान ने अपनी दुकान के 20-25 नए गद्दे सड़क पर बिछा दिए, जिससे कई लोगों की जान बची। पांच मुस्लिम युवकों अफजल, मोहम्मद शाहरुख, मोहम्मद अनीस, मोहम्मद आमिर और वसीम की बहादुरी की खूब तारीफ हो रही है। इलाके के BJP विधायक सतीश उपाध्याय ने भी इनकी तारीफ की और फोटो शेयर किए।
देश में अक्सर राजनीति धर्म और जाति के नाम पर चलती है। कुछ नेता वोट के लिए हिंदू-मुस्लिम का भेदभाव बढ़ाते हैं। नफरत फैलाने वाली बातें कहते हैं। लेकिन जब असली संकट आता है तो आम लोग इन राजनीतिक खेलों को दरकिनार कर इंसानियत दिखाते हैं। BJP पर अक्सर आरोप लगता है कि वह हिंदू-मुस्लिम विभाजन की राजनीति करती है। कुछ लोग कहते हैं कि पार्टी के कुछ नेता और समर्थक मुसलमानों को हमेशा संदेह की नजर से देखते हैं। लेकिन इस घटना में खुद BJP के विधायक ने मुस्लिम युवकों की सराहना की। यह दिखाता है कि नफरत की राजनीति हमेशा काम नहीं करती। जब इंसानियत सामने आती है तो सारे राजनीतिक नारे फीके पड़ जाते हैं।



