IIT बॉम्बे में सुसाइड मामले पर भड़के अभिजीत दीपके, इंसाफ की मांग तेज!
आईआईटी बॉम्बे के आधिकारिक बयान के मुताबिक, छात्र ने परीक्षा का प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड करके उत्तर जानने की कोशिश की थी।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: इस युवा प्रधान देश में ऐसा समय आ गया है कि छात्रों की जान सस्ती हो गई है। चारों तरफ युवा मारा जा रहा है। कभी महंगाई, बरोजगारी से तो कभी रोजगार करते वक़्त पुलिस की लाठियों से।
और कभी ये छात्र कॉलेज प्रसाशन की सख्ती और मनमानी की वजह से मारे जा रहे हैं। और सरकार इन्हे कीड़े मकोड़े जैसा समझने लगी है। तभी तो एक के बाद एक छात्र सुसाइड कर रहे हैं और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई है। जी हाँ दोस्तों दरअसल हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र के एक ताजे मामले की जहां एक छात्र फिरसे जान गंवा बैठा है।
दरअसल आईआईटी बॉम्बे से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। जहां सामने आई जानकारी के मुताबिक, संस्थान के दूसरे वर्ष के एक छात्र ने अपने हॉस्टल के कमरे में आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि छात्र परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था। आईआईटी बॉम्बे के आधिकारिक बयान के मुताबिक, छात्र ने परीक्षा का प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड करके उत्तर जानने की कोशिश की थी।
इस मामले को लेकर लोगों की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। इसी बीच छात्रों की आवाज़ मुखर होकर उठाने वाले CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने भी बड़ा बयान दिया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि दूर-दराज के आदिवासी इलाकों में भी छात्र मर रहे हैं और मुंबई जैसे बड़े शहर में भी. यह संकट हर जगह फैला हुआ है. छात्रों की जिंदगी को प्राथमिकता देने से पहले और कितने छात्रों को अपनी जान गंवानी पड़ेगी?
वहीं दीपके के अलावा IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में उनकी मां ने प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि उनके बेटे को प्रताड़ित किया गया और मारा गया है. साहिल की मां ने मीडिया से बात करते हुए अपने बेटे के लिए न्याय की मांग की है. इसके साथ ही साहिल की माँ ने मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकी उनके बच्चे को न्याय मिल सके.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, परीक्षा के दौरान जब छात्र के पास मोबाइल फोन पाया गया तो इस मामले की जानकारी संबंधित शिक्षक और विभाग के अधिकारियों को दी गई। संस्थान का कहना है कि छात्र के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। उल्टा, विभागाध्यक्ष और शिक्षक ने छात्र से बातचीत की, उसे समझाया और यह भरोसा भी दिलाया कि इस घटना का उसके शैक्षणिक भविष्य पर कोई नेगेटिव असर नहीं पड़ेगा।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बॉम्बे के एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, दिन में एक परीक्षा के दौरान छात्र को परीक्षा हॉल में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पाया गया। उसने जवाब पाने के लिए परीक्षा का प्रश्न पत्र ChatGPT पर अपलोड किया था। छात्र के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई। इंस्ट्रक्टर और डिपार्टमेंट के हेड ने छात्र से इस मामले पर बात की, उसे समझाया और भरोसा दिलाया कि इस घटना का उसके एकेडमिक करियर पर बुरा असर नहीं पड़ेगा। इसके बाद छात्र अपने हॉस्टल के कमरे में लौट गया। बाद में शाम को वह अपने कमरे में मृत पाया गया।
इस घटना के बाद पूरे आईआईटी बॉम्बे परिसर में शोक का माहौल फैल गया। बड़ी संख्या में छात्र एकत्र हुए और उन्होंने प्रशासन के सामने अपनी चिंताएं रखीं। कई छात्रों ने कहा कि देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई का दबाव, भविष्य की चिंता और मानसिक तनाव जैसे मुद्दों पर अधिक गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 400 से ज्यादा छात्रों ने इस घटना के बाद विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
प्रदर्शन में शामिल छात्रों के मुताबिक इस घटना को देखते हुए चल रही मिड-सेमेस्टर परीक्षा को पोस्टपोन कर दिया गया। एक छात्र ने कहा, “छात्रों की एडमिनिस्ट्रेशन से हमेशा एक ही शिकायत रही है कि सुसाइड जैसी गंभीर घटना के बाद भी वह वैसे ही काम कर रहा है। आज रात, कई लोगों ने इस बर्ताव पर सवाल उठाए, जिसके बाद यह घोषणा की गई कि मिड-सेमेस्टर परीक्षा अब पोस्टपोन कर दी गई है।”
इस मामले को लेकर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्रों ने प्रशासन के इन दावों को सिरे से खारिज किया है. उनका कहना है कि प्रशासन सच्चाई छिपा रहा है. प्रदर्शनकारियों का दावा है कि छात्र को नकल के आरोप में सस्पेंड करने की धमकी दी गई थी.
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि इसी मानसिक दबाव और भविष्य खराब होने के डर के कारण छात्र ने आत्महत्या का कदम उठाया. हालांकि उनके इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है. प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि कैंपस में उन्हें पिंजरे जैसा महसूस होता है. उनका कहना है कि यहां प्रोफेसर्स का अनावश्यक दबाव और डर रहता है.
बड़ी संख्या में छात्र संस्थान के डायरेक्टर प्रोफेसर शिरीष बी. केदारे के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि मामले में पारदर्शी जांच होनी चाहिए. वहीं, IIT पवई डायरेक्टर शिरीष बी. केदारे ने घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मामले में जवाबदेही तय करने की बात की है. उन्होंने कहा, “इस पूरे घटनाक्रम की नैतिक जिम्मेदारी मेरी है और मामले में पूरी जवाबदेही तय की जाएगी.” हालांकि, अपने इस्तीफे से जुड़े सीधे सवाल पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.
प्रशासन की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, “IIT बॉम्बे एक स्टूडेंट की मौत से बहुत दुखी है। संस्थान इस दुखद घटना से प्रभावित स्टूडेंट के दोस्तों, क्लासमेट्स, फैकल्टी मेंबर्स और दूसरे लोगों को सपोर्ट दे रहा है। मौत के हालात की जांच सही अधिकारी कर रहे हैं।”
पवई कैंपस में 6 महीने में आत्महत्या का ये तीसरा मामला है. वहीं IIT दिल्ली में हुए सुसाइड के एक महीने के अंदर ही ये घटना हुई है. आईआईटी बॉम्बे के निदेशक ने छात्रों को संबोधित किया और कहा कि संस्थान इस दुखद घटना से बेहद आहत है। साथ ही प्रभावित छात्रों और परिवार के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की बात भी कही गई।
यह घटना केवल एक छात्र की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चल रही बहस को भी फिर से सामने ले आई है। वहीं इसे लेकर जानकारों का मानना है कि आज के समय में छात्रों पर पढ़ाई, प्रतियोगिता, करियर और सामाजिक अपेक्षाओं का दबाव काफी बढ़ गया है।
कई बार छोटी दिखने वाली घटनाएं भी मानसिक रूप से परेशान व्यक्ति के लिए बहुत बड़ी बन जाती हैं। इसलिए कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में काउंसलिंग, भावनात्मक सहयोग और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
वहीं इस मामले में ChatGPT का नाम सामने आने के कारण परीक्षा में AI के उपयोग पर भी चर्चा शुरू हो गई है। दुनिया भर के शिक्षण संस्थान इस चुनौती का सामना कर रहे हैं कि AI तकनीकों का उपयोग पढ़ाई और सीखने के लिए किया जाए, लेकिन परीक्षा में अनुचित लाभ लेने के लिए नहीं। कई विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को नई तकनीकों के अनुसार अपने नियमों और मूल्यांकन के तरीकों में बदलाव करना होगा।



