माघ मास का महत्व: नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति का समय
सनातन धर्म में माघ मास को शुद्धिकरण और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह का अत्यंत पवित्र काल माना गया है। इस दौरान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश से वातावरण शुद्ध होता है और प्रकृति में सकारात्मकता का संचार होता है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सनातन धर्म में माघ मास को शुद्धिकरण और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह का अत्यंत पवित्र काल माना गया है। इस दौरान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश से वातावरण शुद्ध होता है और प्रकृति में सकारात्मकता का संचार होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मास घर और मन से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने, पारिवारिक कलह को शांत करने तथा मानसिक तनाव से मुक्ति पाने के लिए विशेष रूप से फलदायी होता है।
इस पवित्र मास में माघ स्नान, जप, दान और संयम जैसे सरल उपाय अपनाने से जीवन में शांति, सौहार्द और संतुलन आता है। धर्माचार्यों का मानना है कि इन उपायों से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि मानसिक और पारिवारिक सुख-शांति भी बनी रहती है। माघ मास को आत्मशुद्धि और सकारात्मक जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जाता है।
सनातन धर्म में माघ मास को अत्यंत पुण्यदायी, शुद्ध और ऊर्जा शोधन का काल माना गया है. यह मास सूर्य के
मकर राशि में प्रवेश के बाद आरंभ होता है और वर्ष 2026 में माघ मास 4 जनवरी से प्रारंभ हुआ है और 1
फरवरी तक रहेगा. शास्त्रों के अनुसार, इस अवधि में किए गए धार्मिक, सात्विक और संयमित कर्म घर और
मन से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में विशेष रूप से प्रभावी होते हैं. मान्यता है कि माघ मास में अपनाए
गए सरल उपाय पारिवारिक कलह, मानसिक तनाव और जीवन की अड़चनों से मुक्ति दिलाते हैं.
धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि माघ मास में सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी के बीच एक विशेष संतुलन बनता है,
जिससे वातावरण शुद्ध होता है. इस समय सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है और नकारात्मक शक्तियां
कमजोर पड़ने लगती हैं. यही कारण है कि माघ स्नान, जप, दान और संयम को इस मास में विशेष महत्व
दिया गया है. घर में फैली नकारात्मकता, आपसी मनमुटाव और मानसिक अशांति धीरे-धीरे कम होने लगती
है, यदि श्रद्धा के साथ नियमों का पालन किया जाए.
घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के सरल उपाय
माघ मास में प्रतिदिन प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सूर्यदेव को शुद्ध जल अर्पित करें.
पूजा स्थान में नियमित रूप से दीपक जलाएं और धूप-दीप से वातावरण को पवित्र बनाएं.
घर के मुख्य द्वार, आंगन और पूजा स्थल की विशेष रूप से साफ-सफाई रखें.
संध्या समय मुख्य द्वार पर दीपक जलाना और शुभ मंत्रों का स्मरण करना लाभकारी माना गया है.
सप्ताह में एक बार गंगाजल का घर के कोनों में हल्का छिड़काव करें.
प्रातः और संध्या समय घर में शांत और सात्विक वातावरण बनाए रखें.
पारिवारिक कलह से मुक्ति के धार्मिक उपाय
माघ मास में संयम, धैर्य और मधुर वाणी का विशेष रूप से पालन करें.
अनावश्यक बहस, क्रोध और कटु शब्दों से स्वयं को दूर रखें.
प्रतिदिन भगवान विष्णु या भगवान गणेश का श्रद्धा से स्मरण और नाम जप करें.
गुरुवार या सोमवार को सात्विक भोजन बनाकर परिवार के साथ ग्रहण करें.
घर के बुजुर्गों का सम्मान करें और उनकी सलाह को महत्व दें.
प्रतिदिन कुछ समय परिवार के साथ शांत वातावरण में बिताएं.
दान, सेवा और सात्विक आहार का महत्व
माघ मास को दान का महीना भी कहा गया है. इस दौरान अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़ और गर्म वस्त्र का दान करने
से नकारात्मक ग्रह प्रभाव शांत होते हैं. सात्विक और हल्का भोजन जैसे फल, दूध, दही और घर का बना भोजन
अपनाने से मन शांत रहता है, जिससे कलह की आशंका कम होती है. शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि तामसिक
भोजन, नशा और आलस्य माघ मास की सकारात्मक ऊर्जा को बाधित कर सकते हैं.
माघ मास में मानसिक शांति और सकारात्मक बदलाव
माघ मास केवल धार्मिक कर्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन और जीवन सुधार का अवसर भी देता है.
प्रतिदिन कुछ समय मौन, ध्यान या प्रार्थना में बिताने से मन की नकारात्मकता कम होती है. शास्त्रों के अनुसार, इस मास में किया गया छोटा सा भी सकारात्मक प्रयास लंबे समय तक उत्तम फल देता है. घर में शांति, आपसी समझ और सकारात्मक वातावरण बनने लगता है.



