आपदा आने से 1 घंटे पहले मिलेगा अलर्ट! भारत का नया ऐप बचा सकता है हजारों जानें
दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थियों का आपदा सहायक ऐप हिमालयी क्षेत्र में संभावित आपदा की जानकारी करीब एक घंटे पहले दे सकेगा। सेंसर, सैटेलाइट और इंटरनेट से लैस यह ऐप लोगों को समय रहते सतर्क करेगा।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन समय रहते चेतावनी मिलने से जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने एक ऐसा आपदा सहायक ऐप तैयार किया है, जो हिमालयी क्षेत्र में संभावित आपदा की जानकारी लगभग एक घंटे पहले देकर लोगों को सतर्क कर सकता है।
150 साल के आंकड़ों के अध्ययन से तैयार हुआ ऐप
दिल्ली विश्वविद्यालय के हिमालय अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. बी.डब्ल्यू. पांडेय के अनुसार, इस ऐप को तैयार करने के लिए पिछले 150 वर्षों की आपदाओं के आंकड़ों का अध्ययन किया गया। भूस्खलन, बादल फटना और हिमस्खलन जैसी घटनाओं से जुड़े डेटा का विश्लेषण कर इस तकनीक को विकसित किया गया है। शोध को जिनेवा की जर्नल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन में भी प्रकाशित किया गया है।
सेंसर, सैटेलाइट और इंटरनेट से करता है काम
यह ऐप सेंसर, सैटेलाइट और इंटरनेट तकनीक के माध्यम से संभावित खतरे की जानकारी जुटाता है। ऐप हर पांच मिनट पर आपदा की स्थिति को अपडेट करता है। इसे एंड्रॉयड मोबाइल फोन में गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। फिलहाल आईफोन उपयोगकर्ताओं के लिए भी इसे विकसित करने की प्रक्रिया चल रही है।
पायलट प्रोजेक्ट में दिखा बेहतर परिणाम
शोधार्थियों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में इस ऐप का पायलट परीक्षण किया गया था। परीक्षण के दौरान ऐप ने संभावित आपदा के संकेत करीब एक घंटे पहले दे दिए और अंतिम समय तक लगातार अपडेट उपलब्ध कराए।
बिना इंटरनेट भी देख सकेंगे पुराना डेटा
इस ऐप की खास बात यह है कि इंटरनेट उपलब्ध न होने पर भी उपयोगकर्ता इसमें पहले से मौजूद आपदा संबंधी जानकारी देख सकते हैं। हालांकि, रियल टाइम अलर्ट के लिए इंटरनेट जरूरी होगा। ऐप के जरिए आम लोग भी संभावित आपदा स्थल की जानकारी साझा कर सकेंगे, जो प्रशासन और अन्य लोगों तक पहुंचाई जा सकेगी।
वर्ष 2026 में सफल परीक्षण के बाद इस ऐप को आम लोगों के लिए शुरू किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक आपदा प्रभावित क्षेत्रों में समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
रिपोर्ट – अमरेंद्र पांडेय
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