ईरान का खुला ऐलान- नहीं झुकेंगे! अमेरिका को झटका, ट्रंप का अगला प्लान क्या?
ईरान के साथ जंग के मैदान में बुरी तरह से मुंह की खाने की बाद जब अमेरिका जब टेबल पर बातचीत करने से लिए बैठा तो उसे वहां भी बस निराशा ही हाथ लगी।

4pm न्यूज नेटवर्क: इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई अहम शांति वार्ता बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गई है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रेस को संबोधित करते हुए साफ़ कहा, ‘हम बिना किसी समझौते के लौट रहे हैं।’ क़रीब 21 घंटे तक चली इस बातचीत के दौरान ईरान ने अमेरिका के सामने घुटने टेकने से साफ इनकार कर दिया, जिससे होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने समेत कई बड़े मुद्दों पर बातचीत अटक गई है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ ऐसे बयान दिए जिससे स्थिति बनने के बजाय और बिगड़ती चली गई। एक तरफ जहां उन्होंने ईरान पर अपवी जीत का दम भरा तो लगे हाथ उन्होंने चीन को भी बड़ी धमकी दे डाली। इस बीच स्पेन ने भी बगावती सुर छेड़ते हुए चीन से हाथ मिला लिया तो वहीं कनाडा के पीएम ने अमेरिका को खुली चुनौती दे डाली है। तो कैसे ईरान से लोहा लेने क चक्कर में ट्रंप ने पूरी दुनिया से पंगा ले लिया है और ईरान के इनकार के बाद अब वो अगला क्या कदम उठाने जा रहे हैं।
ईरान के साथ जंग के मैदान में बुरी तरह से मुंह की खाने की बाद जब अमेरिका जब टेबल पर बातचीत करने से लिए बैठा तो उसे वहां भी बस निराशा ही हाथ लगी। इस्लामाबाद टॉक का पोस्टर अब उतर चुका है और अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अब अपने देश वापिस भाग निकले हैं। लेकिन उन्होंने जाने से पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें उन्होंने खुद इस बात को कबूला कि ईरान से उनकी बातचीत बेनतीजा निकली है।
वार्ता ख़त्म होने के बाद सुबह प्रेस ब्रीफिंग में जेडी वेंस ने कहा, ‘हमने ईरान के साथ कई गंभीर और काफ़ी अहम चर्चाएं कीं। यही अच्छी ख़बर है। बुरी ख़बर यह है कि हम कोई समझौता नहीं कर पाए। मुझे लगता है कि यह ईरान के लिए अमेरिका से ज़्यादा बुरी खबर है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हमने अपनी रेड लाइंस बहुत साफ बता दी थीं। हम किन बातों पर सहमत हो सकते हैं और किन पर नहीं, यह हमने पूरी तरह साफ़ कर दिया था। लेकिन ईरान हमारे प्रस्तावों को स्वीकार करने को तैयार नहीं हुआ।’ वेंस ने बताया कि अमेरिका ने लचीला रवैया दिखाया, लेकिन ईरान ने कुछ शर्तें मानने से इनकार कर दिया।
जैसे ही ईरान से अमेरिका की पीस टॉक खत्म हुई वैसे ही सबका ध्यान इस पर गया कि अब अमेरिका क्या कदम उठाएगा। तभी ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल पर एक ऐसा आर्टिकल साझा किया है जिसमें ईरान की आर्थिक नाकेबंदी के विकल्प की बात है। यहाँ तक बात होती तो शायद हमारे लिए चिंता की बात नहीं थी। लेकिन इस आर्टिकल में सीधे तौर पर भारत का भी ऑयल सोर्स काटने की बात है। इसमें कहा गया है कि अगर ईरान शनिवार को अमेरिका की तरफ़ से दी गई फ़ाइनल डील को मानने से मना कर देता है, तो ट्रंप तेहरान पर बमबारी करके उसे “स्टोन एज” में वापस ले जा सकते हैं, जैसा उन्होंने वादा किया था।
या फिर वह अपनी सफल ब्लॉकेड स्ट्रैटेजी को दोहरा सकते हैं ताकि पहले से ही डगमगा रही ईरानी इकॉनमी को दबाया जा सके और चीन और भारत पर डिप्लोमैटिक दबाव बढ़ाकर उनके तेल के एक मुख्य सोर्स को उनसे काट दिया जा सके।” जिस वक्त ईरान और अमेरिका से बीच बातचीत का दौर चल रहा थै तब उसी समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान सामने आया जिसमें वो ईरान पर अमेरिका की बड़ा जीत का दावा कर रहे थे।
जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ईरान पर जीत का बड़ा दावा कर रहे थे तो उसी वक्त एक पत्रकार ने चीन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति से सवाव कर लिया। इस सवाल के जवाब में ट्रंप ने जो जवाब दिया उसने सभी के कान खड़े कर दिए। दरअसल, अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि चीन जल्द ही ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी कर रहा है। इसी को लेकर जब ट्रंप से सवाल पूछा तो डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को सीधी चेतावनी दे डाली। ट्रंप ने साफ कहा कि अगर चीन ने ईरान को हथियार भेजे, तो उसे ‘बड़ी समस्या’ का सामना करना पड़ेगा।
एक तरफ जहां डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ साथ चीन से भी लोहा ले लिया तो वहीं पूरी दुनिया ही ट्रंप के खिलाफ खड़ी नजर आ रही है। आज सुबह ट्रंप ने घोषणा की कि इज़राइल का समर्थन करने से इनकार करने के कारण वह स्पेन के साथ सभी व्यापार बंद कर देंगे। इसके बाद स्पेन ने क्या किया? वो अमेरिका से डर कर चुप नहीं बैठा। न ही उसने राष्ट्रपति ट्रंप के आगे घुुटने टेके। बल्कि स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ अमेरिका के आगे झुकने के बजाय सीधे चीन के दौरे पर पहुंच गए। उधर अमेरिका से सटे देश कनाडा ने भी अमेरिका को आंख दिखाना शुरू कर दिया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका को रक्षा खर्च का 70% हिस्सा भेजने के युग के अंत की घोषणा कर दी है। उन्होंने खुला एलान कर दिया है कि कनाडा अब अमेरिका कों अब पैसा नहीं देगा। कनाडा के प्रधानमंत्री ने जैसे ही इसका एलान किया भीड़ ने खड़े होकर तालियाँ बजा कर इस फैसले का स्वागत किया।
कनाडा अमेरिका का सबसे करीबी सहयोगी रहा। साझा सीमा, साझा संस्कृति, दशकों से एकीकृत रक्षा करने वाला कनाडा जयकारे लगाती भीड़ के सामने एक लकीर खींच रहा है। अमेरिका को लाल आंख दिखा रहा है। तो अपने यहां के विश्वगुरु क्यों अमेरिका का नाम लेने और ट्रंप के सामने जाने से भी घबराते हैं। वहीं कनाडा जैसे देश ने अब अमेरिका को लाल आंख दिखाकरसे साबित कर दिया है कि डोनाल्ड ट्रंप का आतंक अब पूरी दुनिया से खत्म हो गया है। सबको समझ आ गया है कि डोनाल्ड ट्रंप बस बातों के बी शेर हैं। उनसे बस बड़ी बड़ी बाते और डायलॉगबाजी करवा लो।
एक तरफ जहां अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने साफ बता दिया कि ईरान ने उनकी शर्ते मानने सो इनकार कर दिया है जिसके चलते कोई सहमति नहीं बन पाई तो वहीं पीस टॉक कराने के नाम पर उछल रहा पाकिस्तान भी अब ठंडा हो गया है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार का लिखित बयान सामने आया जिसमें उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि ईरान और अमेरिका क्षेत्रीय शांति और समृद्धि के लिए सकारात्मक भावना बनाए रखेंगे। उन्होंने लिखा कि सभी पक्षों से युद्धविराम के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखने का आग्रह किया जाता है। पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने का इरादा रखता है।
आखिरकार इस पूरी कहानी का निष्कर्ष यही निकलता है कि डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक रणनीति फिलहाल उल्टी पड़ती नजर आ रही है। ईरान के सामने सख्त रुख अपनाने और दबाव की राजनीति करने के बावजूद अमेरिका को न तो कूटनीतिक जीत मिली और न ही वैश्विक समर्थन। जेडी वेंस का साफ कहना कि बातचीत बेनतीजा रही, यह दिखाता है कि मामला अब और उलझ चुका है। दूसरी तरफ ईरान ने झुकने से इनकार करके साफ कर दिया है कि वह दबाव में आने वाला नहीं है, जबकि चीन, स्पेन और कनाडा जैसे देशों का रुख भी अमेरिका के लिए चुनौती बनता जा रहा है।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अमेरिका अब कूटनीति के बजाय टकराव का रास्ता चुन रहा है? हालांकि अभी सीधे तौर पर विश्व युद्ध III जैसी स्थिति कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन हालात जरूर चिंताजनक दिशा में बढ़ रहे हैं। अगर इसी तरह बयानबाजी, धमकियां और आर्थिक दबाव जारी रहा, तो वैश्विक अस्थिरता और बढ़ सकती है। फिलहाल दुनिया एक नाजुक मोड़ पर खड़ी है, जहां एक गलत कदम पूरे संतुलन को बिगाड़ सकता है।



