मिडिल ईस्ट जंग में अमेरिका से अलग हुआ इजराइल ट्रंप पीछे हटे, नेतन्याहू बोले – जंग जारी रहेगी

अमेरिका-ईरान जंग में एक तरफ दुनिया को लग रहा था कि शायद डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ इस खूनी खेल को खत्म करेंगे, लेकिन हकीकत इसके उलट है। अमेरिका अंदरखाने एक बहुत बड़ी जंग की तैयारी कर रहा है।

4pm न्यूज नेटवर्क: अमेरिका-ईरान जंग में एक तरफ दुनिया को लग रहा था कि शायद डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ इस खूनी खेल को खत्म करेंगे, लेकिन हकीकत इसके उलट है। अमेरिका अंदरखाने एक बहुत बड़ी जंग की तैयारी कर रहा है।

क्योंकि आज यूके में अमेरिका के ‘किलर’ फाइटर जेट्स अचानक उतरे हैं, जिनका इस्तेमाल खास तौर पर ज़मीनी जंग में होता है। इससे आसार इस बात के बन गए हैं कि ट्रंप जंग से भाग नहीं रहे, बल्कि ईरान को बहला-फुसलाकर गफलत में रखना चाहते हैं। लेकिन इस बीच ट्रंप को ज़ोर का झटका लगा है क्योंकि नेतन्याहू ने साफ कह दिया है कि— “अमेरिका साथ दे या न दे, हम यह जंग नहीं रोकेंगे!” आखिर क्या है इस टकराव के पीछे का सच?

जो ट्रंप कल तक ‘ग्रेट अमेरिका’ का नारा लगाकर ईरान को मटियामेट करने की बात कर रहे थे, आज उनके हाथ-पांव फूल रहे हैं। हर दिन 8,400 करोड़ रुपये स्वाहा हो रहे हैं और अमेरिकी सैनिकों की लाशें घर पहुँच रही हैं। ट्रंप चाहते हैं कि 2-3 हफ्तों में यह जंग खत्म हो जाए ताकि उनकी कुर्सी सलामत रहे। लेकिन नेतन्याहू साहब तो जैसे कसम खाकर बैठे हैं कि जब तक पूरा मिडिल ईस्ट श्मशान नहीं बन जाता, वे चैन से नहीं बैठेंगे। नेतन्याहू ने साफ़ कह दिया है कि इज़राइल पीछे नहीं हटेगा।

ट्रंप की ‘एग्जिट पॉलिसी’ को इज़राइल ने अपनी पीठ में छुरा घोंपना करार दिया है। नेतन्याहू को डर है कि अगर अमेरिका हटा, तो ईरान का पलटवार इज़राइल को नक्शे से मिटा सकता है। इसलिए अब नेतन्याहू अमेरिका को ब्लैकमेल कर रहे हैं कि— “अगर आप गए, तो हम अकेले वो करेंगे जो पूरी दुनिया को दहला देगा।” पहले जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ नेतन्याहू के साथ हुआ करते थे, अब वे लगातार ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के संपर्क में हैं और जंग को खत्म कराने की रस्साकशी होती दिख रही है। हालांकि ईरान को अब भी यकीन नहीं है कि अमेरिका जंग रोकेगा। ईरान ने एक बार नहीं, कई बार साफ़ किया है कि उसे ट्रंप की बात पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है। लेकिन अंदरखाने की खबर यह है कि ट्रंप खुद तो इस आग से निकलना चाहते हैं, पर चाहते हैं कि जंग जारी रहे…

बस खर्चा और खून दूसरों का हो। ट्रंप अब यूएई (UAE) और बहरीन पर दबाव डाल रहे हैं कि वे इस जंग की कमान संभालें। ट्रंप का सीधा तर्क है कि— “होर्मुज आपका है, तेल आपका है, तो लड़िए भी आप!” ऐसे में यूएई ट्रंप के इस झांसे में आता दिख रहा है। यूएई ने अपने गोदामों से हथियार निकाल लिए हैं और वह होर्मुज को खुलवाने के लिए ईरान से सीधे टकराने की तैयारी कर रहा है। ट्रंप की यह चाल समझिए—वह अरबों को ईरान के सामने खड़ा करके खुद तमाशा देखना चाहते हैं। यूएई के शेखों को समझना होगा कि अमेरिका की यह दोस्ती सिर्फ उनकी तिजोरी खाली करने और उन्हें तबाह करने के लिए है।

इस महाजंग के बीच एक और सनसनीखेज खबर आई है। रूस की खुफिया एजेंसियां और अमेरिका की सीआईए (CIA) लगातार संपर्क में हैं। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अमेरिका शांति नहीं चाहता। अब खबरें आ रही हैं कि दोनों देशों की खुफिया एजेंसियां ईरान को लेकर किसी बड़े सौदे या फिर किसी बड़ी तबाही की रूपरेखा तैयार कर रही हैं। रूस जहाँ ईरान को इंटेलिजेंस दे रहा है, वहीं अमेरिका चाहता है कि रूस ईरान को पीछे हटने के लिए मनाए। लेकिन सवाल यह है कि क्या पुतिन ट्रंप पर भरोसा करेंगे? ईरान ने साफ़ लफ़्ज़ों में कहा है कि अमेरिका की फितरत में धोखा है और ईरान की यह बात कहीं न कहीं सही साबित हुई है।

क्योंकि एक तरफ ट्रंप दावा कर रहे हैं कि वे जंग से निकलने वाले हैं और दो से तीन हफ्ते में युद्ध खत्म हो जाएगा, लेकिन दूसरी ओर ट्रंप एक बड़ा खेल भी कर रहे हैं। एक रिपोर्ट सामने आई है जिसने हंगामा मचा दिया है। खबरों के अनुसार, ट्रंप अंदरखाने में बड़ी ज़मीनी जंग की तैयारी कर रहे हैं। खबर पक्की है कि 12 एफ-15सी (F-15C) फाइटर जेट्स हाल ही में ब्रिटेन के मिलिट्री बेस पर उतरे हैं। ये वो जेट्स हैं जो ‘ग्राउंड असॉल्ट’ यानी ज़मीनी हमले के लिए माहिर माने जाते हैं। अमेरिका ने ईरान में संभावित ग्राउंड ऑपरेशन के बीच यूनाइटेड किंगडम के आरएएफ (RAF) लेकेनहीथ बेस पर 12 ए-10सी (A-10C) थंडरबोल्ट II फाइटर एयरक्राफ्ट तैनात किए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये विमान ज़मीनी बलों को सपोर्ट करने और क्लोज एयर सपोर्ट मिशन के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह की तैनाती संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी का बड़ा संकेत है। सवाल यह है कि अगर ट्रंप जंग खत्म करना चाहते हैं, तो फिर ये घातक विमान और हज़ारों मरीन सैनिक मिडिल ईस्ट की तरफ क्यों भेजे जा रहे हैं? क्या यह ईरान के यूरेनियम भंडार पर कब्ज़ा करने की कोई गुप्त योजना है? या फिर ट्रंप होर्मुज से भागने का नाटक करके तेहरान पर सबसे बड़ा हमला बोलने वाले हैं? वैसे भी ट्रंप की आदत है कि कहते कुछ हैं और करते कुछ और हैं।

दूसरी तरफ, ट्रंप के जंग खत्म करने के दावे का बाज़ार पर असर दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के बाद इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। जंग जल्द खत्म होने की उम्मीद से निवेशकों ने राहत की सांस ली है। ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ युद्ध 2-3 हफ्तों में खत्म हो सकता है, जिससे बाज़ार में तनाव कम हुआ और सप्लाई की चिंता घटी। इसके बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 13 प्रतिशत गिरकर 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई। तेल सस्ता होने के साथ ही वैश्विक शेयर बाज़ारों में तेज़ी देखी गई, जबकि तेल कंपनियों के शेयर दबाव में रहे। लेकिन जिस तरह से अचानक यूके के एयरबेस पर ज़मीनी जंग के विमान पहुँचे हैं, उसने दोबारा हड़कंप मचा दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान का परमाणु खतरा खत्म कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अब ईरान परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा। ट्रंप ने मंगलवार को ओवल ऑफिस में कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था और यह लक्ष्य पूरा हो चुका है। हालांकि, कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है कि अमेरिका या इज़राइल ने ईरान के परमाणु ईंधन भंडार को पूरी तरह नष्ट कर दिया हो। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान के पास अब भी पर्याप्त यूरेनियम मौजूद है। दूसरी ओर, जंग के बीच बातचीत के दावों को ईरान ने एक बार फिर खारिज कर दिया है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका को कुछ मैसेज मिले ज़रूर हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच कोई आधिकारिक बातचीत नहीं चल रही है। अराघची ने बताया कि उन्हें स्टीव विटकॉफ से सीधे मैसेज मिलते हैं, लेकिन इसे ‘बातचीत’ नहीं कहा जा सकता। अराघची ने कहा कि ईरान को अमेरिका पर रत्ती भर भरोसा नहीं है; 2015 में भी समझौता हुआ था, लेकिन अमेरिका उससे बाहर निकल गया था।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने भी कहा कि अमेरिका सही तरीके से बात नहीं करता और पहले भी बातचीत के दौरान हमला कर चुका है। ऐसे में साफ़ है कि ईरान, ट्रंप की गढ़ी कहानियों पर भरोसा नहीं कर रहा। खुद ईरान मानता है कि अमेरिका जंग की तैयारी कर रहा है और यही वजह है कि आज ईरान ने अचानक इज़राइल पर तगड़ा हमला बोल दिया है।  ईरान ने इज़राइल पर एक घंटे के भीतर तीसरी बार मिसाइल हमला किया है।

इज़राइली सेना के मुताबिक, देश की ओर मिसाइलों की एक और खेप दागी गई है। सेना ने बताया कि यह तीसरा बड़ा हमला है, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। लगातार हमलों के चलते इज़राइल का एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय है और मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने की कोशिशें जारी हैं।

ट्रंप जंग खत्म करने का बहाना लेकर अंदरखाने में कोई बड़ी ‘खिचड़ी’ पका रहे हैं। यह ईरान पर एक बहुत बड़े हमले की शक्ल में सामने आ सकता है। भले ही ट्रंप और नेतन्याहू के बयान अलग-अलग दिख रहे हों, लेकिन कड़वा सच यह है कि ये दोनों खून के प्यासे हैं। इन्हें अपनी ताकत के दम पर छोटे देशों के लोगों को कुचलने में मज़ा आता है, और यूएई जैसा मुल्क अब इन लोगों की घटिया साज़िश का शिकार होने जा रहा है।

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