Israel की चिंता और Trump का दांव, 28 मार्च को हो सकता है America-Iran ceasefire का बड़ा धमाका
मिडिल ईस्ट से आ रही खबरों ने पूरी दुनिया की धड़कनें तेज कर दी हैं...जंग अपने चरम पर है...मिसाइलें चल रही हैं..

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मिडिल ईस्ट से आ रही खबरों ने पूरी दुनिया की धड़कनें तेज कर दी हैं…जंग अपने चरम पर है…मिसाइलें चल रही हैं…और इसी बीच एक ऐसी चर्चा शुरू हो गई है…जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है कि…क्या 28 मार्च को अचानक सब कुछ थम सकता है?…
क्या अमेरिका सच में ईरान के साथ सीजफायर का ऐलान करने जा रहा है?…अगर हां, तो क्या ये राहत की खबर होगी या किसी बड़े खेल की शुरुआत?…सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बड़ा फैसला लेने की तैयारी में हैं…लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती…असली ट्विस्ट ये है कि इस संभावित सीजफायर से सबसे ज्यादा बेचैनी इजरायल को हो रही है…लेकिन क्यों?…क्योंकि जिस वक्त जंग अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच रही है…उसी वक्त अगर ब्रेक लग गया…तो पूरा समीकरण बदल सकता है….और सबसे अहम बात…ईरान झुकने के मूड में बिल्कुल भी नहीं दिख रहा है…ईरान ने तो साफ-साफ कह दिया है कि ट्रंप की शर्तों पर युद्ध खत्म नहीं होगा…अमेरिका का प्रस्ताव धोखा है…….यानी ईरान साफ कह रहा है कि…वो अपनी शर्तों पर ही बात करेगा…ऐसे में सवाल उठा कि क्या सच में 8 मार्च को ट्रंप सीजफायर का ऐलान करेंगे?..
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही भीषण टकराव की कहानी अब एक ऐसे मोड़ पर आकर खड़ी हो गई है…जहां हर तरफ एक ही सवाल गूंज रहा है कि…क्या सच में 28 मार्च को सीजफायर का ऐलान होने वाला है?…और अगर ऐसा होता है…तो क्या ये जंग खत्म होने की शुरुआत होगी या किसी और बड़े खेल की तैयारी?…सबसे दिलचस्प बात ये है कि जहां दुनिया इस संभावित युद्धविराम को राहत की खबर मान रही है…वहीं इजरायल इससे खुश नहीं बल्कि परेशान नजर आ रहा है…
इजराइली मीडिया में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 28 मार्च को ईरान के साथ सीजफायर का ऐलान कर सकते हैं…ये खबर सामने आते ही कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है…ऐसा इसलिए क्योंकि ये सिर्फ एक साधारण युद्धविराम नहीं होगा…बल्कि इसके पीछे कई बड़े रणनीतिक बदलाव छिपे हो सकते हैं…खासकर तब, जब जंग अपने सबसे अहम दौर में पहुंच चुकी हो…
अब सवाल ये है कि इजरायल आखिर इतना परेशान क्यों है?…तो दरअसल, इजरायल का मानना है कि अभी वो एक मजबूत सैन्य बढ़त की तरफ बढ़ रहा है…ऐसे में अगर अचानक सीजफायर हो जाता है…तो उसे वो रणनीतिक फायदा नहीं मिल पाएगा…जिसके लिए उसने इतनी बड़ी कीमत चुकाई है…यही वजह है कि इजरायल इस संभावित ऐलान को लेकर असहज है…रिपोर्ट्स की मानें तो इजरायल को डर है कि…अमेरिका कहीं एकतरफा फैसला लेकर जंग को रोक न दे…क्योंकि अगर ऐसा होता है…तो ईरान को फिर से संभलने और अपनी ताकत को और मजबूत करने का मौका मिल सकता है…और यही वो बात है जो इजरायल को सबसे ज्यादा परेशान कर रही है…
इसी चिंता के चलते इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने शीर्ष सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की…इस बैठक में साफ तौर पर कहा गया कि अगर सीजफायर का ऐलान होता है…तो उससे पहले हर हाल में ईरान के सैन्य ढांचे को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाना होगा…यानी साफ है कि…इजरायल आखिरी वक्त तक आक्रामक रणनीति अपनाए रखना चाहता है…लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे मजबूत और दिलचस्प बात है….ईरान का रुख….ईरान इस समय किसी भी तरह के दबाव में झुकता हुआ नजर नहीं आ रहा….उल्टा, उसने साफ कर दिया है कि वो अपनी शर्तों पर ही बात करेगा…..चाहे अमेरिका हो या कोई और देश…ईरान बिना ठोस फायदे के पीछे हटने को तैयार नहीं है…
खबरों के मुताबिक, अमेरिका की तरफ से एक 15-पॉइंट सीजफायर प्रस्ताव ईरान को भेजा गया था….जिसे पाकिस्तान के जरिए पहुंचाया गया…लेकिन ईरान ने इस प्रस्ताव को बिना ज्यादा देर लगाए खारिज कर दिया…ये दिखाता है कि ईरान सिर्फ बातचीत के नाम पर समझौता करने के मूड में नहीं है…वो चाहता है कि अगर जंग रुके, तो उसकी शर्तों पर रुके……दोस्तो, यहां एक बात समझना बहुत जरूरी है कि…ईरान अब पहले वाला देश नहीं रहा…जो अंतरराष्ट्रीय दबाव में आसानी से झुक जाए…पिछले कुछ सालों में उसने अपनी सैन्य ताकत, खासकर मिसाइल और ड्रोन टेक्नोलॉजी में जबरदस्त बढ़त हासिल की है…यही वजह है कि आज वो अमेरिका और उसके सहयोगियों के सामने मजबूती से खड़ा है…
ईरान की रणनीति काफी साफ नजर आती है…वो सीधे टकराव से पीछे नहीं हटेगा…लेकिन वो इस जंग को अपनी शर्तों पर खत्म करना चाहता है…यही कारण है कि उसने सीजफायर प्रस्ताव को ठुकरा दिया और दुनिया को ये संदेश दे दिया कि…अब वो किसी के दबाव में आने वाला नहीं है…दूसरी तरफ, अमेरिका की कंडीशन भी थोड़ी पेचीदा है…एक ओर उसे अपने सहयोगी इजरायल का साथ देना है…वहीं दूसरी ओर वो इस युद्ध को लंबा खींचने के जोखिम को भी समझता है…क्योंकि अगर ये जंग और आगे बढ़ती है…तो इसका असर सिर्फ मिडिस ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा…बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सप्लाई पर पड़ सकता है…
यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से सीजफायर की पहल को एक कूटनीतिक चाल के तौर पर भी देखा जा रहा है…माना जा रहा है कि अमेरिका इस युद्ध को एक ऐसे मोड़ पर रोकना चाहता है…जहां से बातचीत की नई शुरुआत हो सके…लेकिन यहां सबसे बड़ा ट्विस्ट ये है कि इजरायल इस रणनीति से पूरी तरह सहमत नजर नहीं आता है…इजरायल को लगता है कि अगर अभी जंग रोकी गई…तो ईरान को फिर से ताकत इकट्ठा करने का मौका मिल जाएगा…और भविष्य में ये खतरा और बड़ा हो सकता है…
इस बीच, अमेरिका और इजरायल के बीच तालमेल को लेकर भी कई तरह की बातें सामने आ रही हैं…हालांकि आधिकारिक तौर पर दोनों देशों के रिश्ते मजबूत बताए जा रहे हैं…लेकिन अंदरखाने रणनीति को लेकर मतभेद की खबरें भी सामने आ रही हैं…जल्द ही अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख का इजरायल दौरा प्रस्तावित है…जहां आगे की रणनीति पर चर्चा होगी…अब अगर हम पूरे घटनाक्रम को एक साथ जोड़कर देखें…तो तस्वीर काफी दिलचस्प बनती है…एक तरफ अमेरिका है…जो जंग को रोककर बातचीत का रास्ता खोलना चाहता है…दूसरी तरफ इजरायल है…जो आखिरी वक्त तक अपनी सैन्य बढ़त को मजबूत करना चाहता है…और तीसरी तरफ ईरान है…जो बिना शर्त झुकने को तैयार नहीं और खुद को एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में पेश कर रहा है…
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि…क्या 28 मार्च को सच में सीजफायर का ऐलान होगा?…अगर होता है…तो क्या ईरान उसे मानेगा?…और अगर नहीं मानता…तो क्या जंग और भयानक रूप ले सकती है?….फिलहाल जो संकेत मिल रहे हैं…उनसे यही लगता है कि आने वाले कुछ दिन बेहद अहम होने वाले हैं…हर फैसला इस जंग की दिशा तय करेगा…लेकिन एक बात साफ है कि इस बार ईरान कमजोर नहीं, बल्कि एक मजबूत और आत्मविश्वासी खिलाड़ी के तौर पर सामने आया है…और शायद यही वजह है कि दुनिया अब सिर्फ युद्ध की खबर नहीं देख रही…बल्कि ये भी समझने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे खेल में असली बढ़त किसके पास है..



