जय श्री राम नहीं, जय महाराष्ट्र…’ संजय राउत का बीजेपी पर जोरदार हमला!
महाराष्ट्र में इन दिनों BMC चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। सभी दलों के नेता अपने खेमों को मजबूत करने में जुटे हुए हैं। एक तरफ जहां नेताओं की पाला बदलने की खबरें सामने आ रही हैं तो वहीं दूसरी तरफ राजनेता एक दूसरे पर जमकर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: महाराष्ट्र में इन दिनों BMC चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। सभी दलों के नेता अपने खेमों को मजबूत करने में जुटे हुए हैं। एक तरफ जहां नेताओं की पाला बदलने की खबरें सामने आ रही हैं तो वहीं दूसरी तरफ राजनेता एक दूसरे पर जमकर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।
वहीँ इसी बीच शिवसेना उद्धव गुट के नेता और सांसद संजय राउत ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना और बीजेपी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने शिंदे गुट को “अमित शाह की शिवसेना” बताते हुए कहा कि असली शिवसेना वही है, जिसका नेतृत्व उद्धव ठाकरे कर रहे हैं. इतना ही नहीं राउत ने साफ शब्दों में कहा कि चाहे मुंबई महानगरपालिका चुनाव हो या महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव, उनकी पार्टी अपने दम पर मैदान में उतरती है और किसी के सामने भिख नहीं मांगती.
इसके साथ ही राउत ने बीजेपी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, योगी आदित्यनाथ और अन्य बड़े नेताओं को स्टार प्रचारक बनाए जाने पर भी राउत ने सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इस चुनाव में मोदी जी को आने की क्या जरूरत है, क्या महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री सक्षम नहीं हैं. राउत ने आरोप लगाया कि योगी आदित्यनाथ और अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लाकर माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि अगर कोई कहता है कि मुंबई में सिर्फ जय श्री राम का नारा चलेगा, तो वे मानते हैं कि मुंबई में जय महाराष्ट्र का नारा ही चलेगा.
मुंबई में आगामी बीएमसी चुनावों से पहले सियासी माहौल को और गरमाता दिख रहा है. विधानसभा चुनाव में बनी महायुति की एकता अब पूरी तरह से बिखरती हुई नजर आ रही है। कई जगह ऐसी हैं जहां बीजेपी और शिंदे गुट अलग-अलग चुनाव लड़ने वाले हैं क्योंकि दोनों के बीच बात नहीं बन पाई है। छत्रपति संभाजीनगर और पुणे महानगर पालिका चुनावों में बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना अकेले चुनाव लड़ेंगी.
दोनों पार्टियों के बीच सीट बंटवारे की बातचीत विफल हो गई है. सत्तारूढ़ महायुति में सहयोगी रहे दोनों दलों के नेता अब गठबंधन टूटने को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं. छत्रपति संभाजीनगर में शिवसेना विधायक और मंत्री संजय शिरसाट ने दावा किया कि बीजेपी ने क्षेत्र में अपनी बढ़ती ताकत के कारण ‘अहंकार’ में आकर गठबंधन तोड़ा है.
शिरसाट ने कहा कि उनकी पार्टी ने महानगर पालिका चुनावों के लिए बीजेपी के साथ गठबंधन पर लगातार जोर दिया था और क्षेत्र के मतदाताओं की भी यही राय थी. उन्होंने कहा, ‘‘ हालांकि, कुछ स्थानीय बीजेपी नेताओं ने जानबूझकर गठबंधन तोड़ दिया. हमें इस गठबंधन के टूटने का दुख हैं.’’ उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ विवादित सीटों पर गतिरोध को सुलझाने के लिए हुई बातचीत के बावजूद, इस मुद्दे को जानबूझकर फिर से उठाया गया.
शिवसेना के मंत्री ने दावा किया कि बीजेपी ने शिवसेना को ‘अंधेरे में रखकर’ सीट बंटवारे पर बातचीत जारी रखी और साथ ही अपने उम्मीदवारों को तैयार करती रही. उन्होंने कहा कि शिवसेना ने अब अपने सभी उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने को कहा है और संभावित बाधाओं को लेकर आशंका व्यक्त की है.
इन दिनों महाराष्ट्र में एक तरफ जहां चुनावी तैयारियां चल रही हैं। तो वहीं दूसरी तरफ बयानों की बरसात हो रही है। इसी बीच शिरसाट के आरोपों को खारिज करते हुए बीजेपी मंत्री अतुल सावे ने शिवसेना नेताओं पर सीट बंटवारे पर बार-बार अपना रुख बदलने का आरोप लगाया. सावे ने कहा, ‘शिवसेना नेताओं ने उन सीटों की मांग की जहां से बीजेपी पार्षद लगातार जीतते आ रहे हैं.
उनके अहंकार के कारण ही गठबंधन टूटा.’’ उन्होंने कहा कि बीजेपी अब भी गठबंधन की इच्छुक है, लेकिन शिवसेना को आगे आना होगा, क्योंकि नामांकन दाखिल करने के लिए केवल कुछ ही घंटे बचे हैं. बीजेपी नेता और राज्यसभा सदस्य भगवत कराड ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बीजेपी ने शिवसेना को अधिक सीटें देने की ‘उदारता’ दिखाई थी, लेकिन उसकी मांगें बढ़ गईं.
पुणे में भी, सीट बंटवारे की बातचीत विफल होने के बाद बीजेपी और शिवसेना ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है. पिछले कुछ दिनों में गहन बातचीत के बावजूद, कथित तौर पर शिवसेना को अपेक्षित सीटें न मिलने के कारण बात नहीं बन पाई. शिवसेना नेता नाना भानगिरे ने कहा कि बीजेपी द्वारा केवल 16 सीटें देने के बाद पार्टी ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया. उन्होंने कहा कि पार्टी पुणे में 165 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और सभी उम्मीदवारों को ‘एबी’ फॉर्म दिए जाएंगे.
महाराष्ट्र के लातूर नगर निगम चुनाव को लेकर चल भी रही राजनीतिक चर्चाओं पर अब विराम लग गया है. लंबे समय से जिस भाजपा-राकांपा गठबंधन की अटकलें लगाई जा रही थीं, वह अब होता हुआ नजर नहीं आ रहा है. भाजपा ने साफ कर दिया है कि वह लातूर नगर निगम की सभी 70 सीटों पर अकेले ही चुनाव लड़ेगी. भाजपा के चुनाव प्रभारी और राज्य के पूर्व मंत्री संभाजीराव पाटिल नीलांगेकर ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि भाजपा ने राकांपा के साथ गठबंधन को लेकर गंभीर प्रयास किए थे, लेकिन बात नहीं बन सकी.
नीलांगेकर के मुताबिक, जिले में राकांपा के कई वरिष्ठ नेता गठबंधन के पक्ष में थे और उन्होंने इसके लिए इच्छा भी जताई थी. हालांकि, पार्टी के दूसरे और तीसरे स्तर के पदाधिकारियों के विरोध की वजह से यह गठबंधन साकार नहीं हो पाया. उन्होंने दावा किया कि इन्हीं अंदरूनी मतभेदों के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी. भाजपा नेता ने यह भी कहा कि राकांपा के कई बड़े चेहरे, जिनमें मंत्री बाबासाहेब पाटिल, पूर्व मंत्री संजय बंसोड़े और एमएलसी विक्रम काले शामिल हैं, गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने के लिए उत्सुक थे. इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व के साथ खड़े कुछ पदाधिकारियों ने इस समझौते को कथित तौर पर नाकाम कर दिया.
गठबंधन टूटने के लिए जिम्मेदार लोगों के नाम लेने से नीलांगेकर ने इनकार कर दिया. हालांकि उन्होंने राकांपा के जिला नेतृत्व को सलाह दी कि वे ऐसी ताकतों से सतर्क रहें जो भविष्य में भी राजनीतिक तालमेल को नुकसान पहुंचा सकती हैं.इस बार के चुनाव में बीजेपी के सहयोगी दल उनका साथ नहीं दे रहे हैं। यही वजह है कि बीजेपी को कई जगहों पर आलोचनाओं और विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं सहयोगी दलों के अकेले चुनाव लड़ने के इस फैसले ने बीजेपी को मुश्किलों में डाल दिया है। वहीं गठबंधन टूटने के लिए जिम्मेदार लोगों के नाम लेने से नीलांगेकर ने इनकार कर दिया. हालांकि उन्होंने राकांपा के जिला नेतृत्व को सलाह दी कि वे ऐसी ताकतों से सतर्क रहें जो भविष्य में भी राजनीतिक तालमेल को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने नागपुर महानगरपालिका चुनाव की सभी 151 सीट के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी. महायुति में शामिल अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने अलग से चुनाव लड़ने का फैसला किया है. अधिकतम 143 सीट पर चुनाव लड़ेगी और शिवसेना के लिए केवल आठ सीट छोड़ी जाएगी. बीजेपी की नागपुर इकाई के अध्यक्ष दयाशंकर तिवारी ने सूची साझा की है. इसी से संबंधित एक घटनाक्रम में, महा विकास आघाडी (एमवीए) के घटक दलों- कांग्रेस और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) ने नागपुर निगम चुनाव अलग-अलग लड़ने का फैसला किया है. शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी ने कांग्रेस पर 15 सीट आवंटित न करने का आरोप लगाया है.
एनसीपी (SP) की नागपुर इकाई के अध्यक्ष दुनेश्वर पेठे ने दावा किया कि कांग्रेस के नेताओं के साथ बातचीत जारी रही. उन्होंने कहा कि बाद में नेताओं ने उनके फोन का जवाब देना बंद कर दिया, जिससे संकेत मिलता है कि वे गठबंधन नहीं करना चाहते. एनसीपी नेता ने आरोप लगाया, ‘‘ऐसा लगता है कि कांग्रेस बीजेपी की मदद करना चाहती है और इसलिए उसने हमारे साथ गठबंधन न करने का फैसला किया है.’’ महाराष्ट्र में 29 नगर निकायों के चुनाव 15 जनवरी को होंगे और मतगणना अगले दिन होगी. जिसे लेकर सभी दल एक्टिव मोड में नजर आ रहे हैं और जमकर तैयरियां हो रही हैं अब देखना ये होगा कि इन चुनावों में किस दल को कितनी सीटें मिलते हैं और किसे हार का सामना करना पड़ेगा।



