मोदी की तारीफ करते नहीं थकती कंगना, राहुल गांधी को ‘ट्यूशन’ देने चलीं, हो गई फजीहत

जनता सड़कों पर इधर उधर भटक रही है और सरकारी अफसर और राजनेताओं बीजेपी में बैठे आलाकमानों को खुश करने में लगे हुए हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बीजेपी राज में जो हो जाए वही कम है, सरकार में विकास हो न हो लेकिन विनास ज़यादा हो रहा है। जनता सड़कों पर इधर उधर भटक रही है और सरकारी अफसर और राजनेताओं बीजेपी में बैठे आलाकमानों को खुश करने में लगे हुए हैं।

आलम ये है कि राजनेता अपने गिरहबान झाँकने के बजाय अपने आकाओं को खुश करने के लिए जनता के मुद्दों को उठाने वाले विपक्ष पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कहा तो ये भी जाता है कि बीजेपी में जो जितनी चाटुकारिता करता है वो उतना आगे जाता है। शायद ये बात कहीं न कहीं सच भी है। और इस बात को बॉलीवुड अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने कुछ ज्यादा ही सीरियसली ले लिया है। तभी तो वो कोई भी मौका नहीं छोड़ती हैं।

हाल ही में कंगना ने कांग्रेस नेता राहुल गाँधी के खिलाफ फिरसे जहर उगला है। भाजपा सांसद कंगना रनौत ने हाल ही में लोकसभा में राहुल गांधी पर तंज कसा और कहा कि उन्हें “ट्यूशन” देनी चाहिए। यह बयान इंसॉल्वेंसी एंड बैंकRUPTCY कोड संशोधन विधेयक की चर्चा के दौरान आया। कंगना ने दावा किया कि राहुल गांधी विदेश जाकर भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में गलत बातें करते हैं। उन्होंने कहा कि राहुल हर जगह जाकर देश की छवि खराब करते हैं, इसलिए उन्हें ट्यूशन की जरूरत है ताकि वे सही तथ्य समझें।

बयान भाजपा की पुरानी आदत को दिखाता है। भाजपा नेता अक्सर विरोधी नेताओं को छोटा करके पेश करते हैं। राहुल गांधी जैसे अनुभवी नेता, जो देश भर में यात्राएं करते हैं और जनता की समस्याएं उठाते हैं, उन्हें ट्यूशन जैसे शब्द से अपमानित करना सही नहीं है।

राहुल गांधी ने संसद में और बाहर कई बार मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं। वे बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की दिक्कत और युवाओं की नौकरी की कमी जैसी मुद्दों पर बोलते हैं। लेकिन भाजपा इन्हें देशद्रोह या देश की बदनामी बताती है।

यह घटना भाजपा के अंदरूनी घमंड को उजागर करती है। कंगना रनौत जैसी नेता, जो फिल्मों से राजनीति में आई हैं, संसद में ऐसे बयान देकर ध्यान खींचने की कोशिश करती हैं। लेकिन राहुल गांधी वर्षों से राजनीति में हैं। उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा जैसी पहल की, जिसमें लाखों लोग शामिल हुए। वे गरीबों, किसानों और मजदूरों की आवाज बनते हैं।

भाजपा उन्हें ट्यूशन देने की बात करके उनकी लोकप्रियता को कम करने की कोशिश कर रही है। लेकिन जनता जानती है कि असली ट्यूशन किसे चाहिए। सरकार को जनता की समस्याओं का समाधान करने की ट्यूशन की जरूरत है, न कि राहुल गांधी को।

इस बयान ने विपक्ष में नाराजगी पैदा कर दी। कई कांग्रेस नेताओं ने कंगना के बयान को गलत और ध्यान भटकाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की आलोचना करना हर विपक्षी का अधिकार है। देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनाने के लिए सच्ची चर्चा जरूरी है, न कि व्यक्तिगत हमले। लेकिन भाजपा हर बार विरोधियों को चुप कराने की कोशिश करती है। पहले भी कई बार राहुल गांधी पर “पप्पू” जैसे मजाक किए गए, लेकिन उनकी लोकप्रियता बढ़ती गई। अब “ट्यूशन” वाला तंज भी उसी सिलसिले का हिस्सा लगता है।

कंगना एक तरफ जहां विपक्ष की आलोचना करती हैं तो वहीं दूसरी तरफ मोदी की जमकर तारीफ भी करती हैं। जिस वजह से वो ट्रोल भी होती हैं। मोदी की चाटुकारिता में कंगना इतना मसरूफ हैं जिसकी कोई हद्द नहीं है। ऐसा ही एक बयान उनका पहले भी वायरल हो चुका है, जिसमें वो मोदी की तुलना चाँद से करती हुई नजर आ रही हैं।

भाजपा की यह शैली लोकतंत्र के लिए खतरा है। संसद में चर्चा का मतलब है मुद्दों पर बहस, न कि एक-दूसरे को अपमानित करना। कंगना रनौत ने राहुल गांधी के व्यवहार को भी “टपोरी” जैसा बताया था, जिससे महिलाएं असहज महसूस करती हैं। यह बयान भी विवादास्पद था। ऐसी टिप्पणियां राजनीति को नीचे स्तर पर ले जाती हैं। भाजपा को समझना चाहिए कि जनता विकास, रोजगार और अच्छी नीतियों की मांग करती है, न कि ऐसे व्यक्तिगत हमलों की।

राहुल गांधी की आलोचना अक्सर सही साबित होती है। उन्होंने किसान कानूनों का विरोध किया, जो बाद में वापस ले लिए गए। उन्होंने महंगाई और बेरोजगारी पर सवाल उठाए, जो आज भी देश का बड़ा मुद्दा है। मोदी सरकार की कई योजनाएं अच्छी लगती हैं, लेकिन उनके अमल में कमी है। कंगना जैसे नेता इन कमियों को नजरअंदाज करके सिर्फ मोदी की तारीफ करते नहीं थकते। लेकिन सच्चाई यह है कि सरकार को विपक्ष की आलोचना से सीखना चाहिए, न कि उसे ट्यूशन देने की सलाह देनी चाहिए।

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