चुनाव आयोग की मदद से बीजेपी को मिल रही बढ़त, कन्हैया कुमार ने कसा तंज
पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 294 सीटें हैं, जिनमें से 293 पर ही वोटों की गिनती हो रही है. यहां दो चरणों में मतदान हुआ था.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: आज पश्चिम बंगाल समेत देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की वोटों की गिनती जारी है. जिन राज्यों में चुनाव के नतीजे घोषित होंगे, उनमें पश्चिम बंगाल के अलावा तमिलनाडु, केरल, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी शामिल हैं.
पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 294 सीटें हैं, जिनमें से 293 पर ही वोटों की गिनती हो रही है. यहां दो चरणों में मतदान हुआ था. पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर वोटिंग हुई थी, जबकि दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान हुआ था. यहां ममता बनर्जी लगातार चौथी बार सत्ता में लौटने की कोशिश में जुटी हुई हैं, वहीं बीजेपी इस बार सत्ता में आने की लड़ाई लड़ रही है.
वहीं अब बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 के रुझानों में बीजेपी आगे दिख रही है। कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने ट्वीट करके तंज कसा कि अगर बंगाल में भी बीजेपी नहीं जीती तो चुनाव आयोग पर भरोसा उठ जाएगा। यह बयान विपक्षी दलों की नजर में चुनाव आयोग पर सवाल उठाने वाला है। वहीं आपको बता दें कि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पहले ही चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा चुकी है। मुद्दा मुख्य रूप से वोटर लिस्ट की सफाई यानी SIR का है।
टीएमसी का आरोप है कि चुनाव आयोग ने बंगाल में लाखों genuine वोटरों के नाम काट दिए, खासकर अल्पसंख्यक और गरीब इलाकों में। ममता बनर्जी ने खुद सुप्रीम कोर्ट में कहा कि न्याय बंद कमरे में रो रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह सफाई असली नागरिकों को वोट देने से रोकने की साजिश है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई की और चुनाव आयोग को निर्देश दिए कि हर genuine वोटर का नाम लिस्ट में होना चाहिए। लेकिन विपक्ष कहता है कि आयोग ने बीजेपी के पक्ष में काम किया।
कई विपक्षी नेता मानते हैं कि बंगाल में पिछले चुनावों में हिंसा और booth capturing की शिकायतें रही हैं। अब SIR में करीब 27 लाख नाम हटाए गए। टीएमसी इसे मुसलमानों और गरीबों को टारगेट करने वाला बता रही है। ममता बनर्जी ने आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया और गिनती के समय केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती पर भी सुप्रीम कोर्ट गए। वे कहती हैं कि राज्य सरकार का भरोसा आयोग पर कम हो रहा है।
कन्हैया कुमार का तंज इसी माहौल में आया। उन्होंने कहा कि अमित शाह बंगाल में डर की बात करते हैं, लेकिन खुद आयोग डरता है या नहीं? विपक्ष का कहना है कि जब बीजेपी जीतती है तो आयोग ठीक, लेकिन हार की आशंका में सवाल। बंगाल में उच्च मतदान हुआ, सुरक्षा भी ज्यादा थी, फिर भी विवाद हैं।
चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करता है। उसने कहा कि SIR डुप्लिकेट, मृत और फर्जी वोटर हटाने के लिए था। बंगाल में लाखों नाम गलत थे। आयोग ने कहा कि यह निष्पक्ष प्रक्रिया है और कोर्ट की निगरानी में चल रही है। बीजेपी का पक्ष है कि पिछले सालों में बांग्लादेशी घुसपैठ से वोटर लिस्ट फुल गई थी, जिसे अब साफ किया जा रहा है। अपनी सफाई में वे कहते हैं कि विपक्ष हार के बहाने बना रहा है।
यह विवाद लोकतंत्र के लिए गंभीर है। चुनाव आयोग भारत का सबसे भरोसेमंद संस्थान माना जाता है। अगर हर हार के बाद उस पर सवाल उठे तो संस्था कमजोर होगी। लेकिन विपक्ष कहता है कि संस्थाओं की स्वतंत्रता बचानी जरूरी है।
वहीं कहीं अगर बंगाल के रुझान बीजेपी के पक्ष में रहे तो यह बहस और तेज होगी। खैर यह कोई पहला मौका नहीं है जब चुनाव आयोग पर ऐसे आरोप लगे हों लेकिन अफ़सोस की बात ये है कि चुनाव आयोग सत्ताधारी दल की चाटुकारिता करने में इस कदर मसगूल है जिसकी कोई हद्द ही नहीं है।



