कटघरे में नहीं बातचीत की मेज पर सुलझेगी खान सर कंट्रोवर्सी

- मानहानि की लड़ाई में अदालत ने चुना संवाद का रास्ता
- 4PM संपादक संजय शर्मा एंकर अंजना ओम कश्यप और खान सर कंट्रोवर्सी
- वीडियो हटाने के मामले में भी एंकर अंजना को फौरी राहत नहीं
- बहस से बवाल, बवाल से अदालत, अदालत से संवाद तक
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। अदालतें कई बार सिर्फ फैसला नहीं सुनाती बल्कि वह समाज को आईना भी दिखाने का काम करती है। एंकर अंजना ओम कश्यप द्वारा 4PM संपादक संजय शर्मा और अन्य लोगों पर किये गये मानहानि और वीडियो हटाने के मुकदमें में आज कुछ ऐसा ही दृश्य दिखायी दिया। दिल्ली हाई कोर्ट में आज की सुनवाई में सिर्फ अगली तारीख तय करने की कार्यवाही नहीं हुई बल्कि अदालत ने एक अलग रास्ता चुना। अदालत ने टकराव से पहले संवाद को अहमियत देते हुए इस पूरे मामले को मध्यस्थता के पास भेज दिया है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने कहा कि जो नुकसान होना था वह हो चुका है। अब दोनों पक्ष केवल स्थिति को संभाल सकते हैं।
नीट पेपर लीक से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा विवाद नीट एक्जाम से जुड़ी एक टीवी डिबेट के बाद शुरू हुआ। टीवी डिबेट के दौरान अंजना ओम कश्यप ने आनलाइन पढ़ाने वाले शिक्षकों को फ्रॉड और व्यूज के पीछे भागने वाले एक्सप्लेनर कहा। इसके बाद खान सर और अन्य शिक्षकों ने प्रतिक्रिया देते हुए कथित तौर पर अंजना ओम कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क के खिलाफ बिकाऊ पत्रकार, चाटुकार, दलाली, फेक न्यूज की दुकान जैसे शब्दों का प्रयोग किया। इन टिप्पणियों को मानहानिकारक बताते हुए अंजना ओम कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क ने 2 करोड़ रुपये के मानहानि हर्जाने की मांग करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में 4PM संपादक संजय शर्मा और अन्य लोगों पर मुकदमा दायर किया है तथा आपत्तिजनक टिप्पणियों को हटाने की मांग की है। दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई निर्धारित की है। तब तक अदालत मध्यस्थता की कार्यवाही के परिणाम का इंतजार करेगी।
वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव मध्यस्थ नियुक्त
अदालत ने दोनों पक्षों को आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की सलाह दी और वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव को मध्यस्थ नियुक्त कर दिया। यह वही मुकदमा है जिसमें टीवी एंकर अंजना ओम कश्यप ने खान सर सहित कई प्रतिवादियों और 4PM न्यूज चैनल सहित कई अन्य डिजिटल मंचों के खिलाफ मानहानि का दावा किया है। पिछली सुनवाई में अदालत ने तत्काल वीडियो हटाने या अंतरिम राहत देने से इनकार किया था और पक्षकारों से जवाब मांगा था। आज अदालत ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेजते हुए संकेत दिया कि जहां संभव हो बातचीत से समाधान तलाशना चाहिए। यह आदेश केवल इस मुकदमे तक सीमित नहीं है। यह आदेश बताता है कि हर तीखी टिप्पणी मानहानि नहीं हो सकती और हर आलोचना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी नही है। क्या अदालत का काम केवल जीत और हार तय करना है या कभी कभी संवाद की संभावना को भी बचाना है। यही वह प्रश्न हैं जो आज की सुनवाई को महत्वपूर्ण बनाता हैं। कानून कहता है कि प्रतिष्ठा भी एक अधिकार है। लोकतंत्र कहता है कि सवाल पूछना भी एक अधिकार है। इन दोनों अधिकारों के बीच संतुलन ही अदालतों की सबसे कठिन परीक्षा है। आज अदालत ने कोई अंतिम फैसला नहीं दिया। किसी पक्ष को विजेता घोषित नहीं किया। लेकिन इतना जरूर कहा कि जहां संवाद की संभावना बची हो वहां उसे मौका मिलना चाहिए। और शायद यही इस मुकदमे का सबसे बड़ा संदेश भी है कि डिजिटल युग में शब्द सेकंडों में लाखों लोगों तक पहुंच जाते हैं। लेकिन उन शब्दों के असर को समझने और विवाद सुलझाने के लिए कानून अब भी धैर्य प्रक्रिया और संतुलन का रास्ता चुनता है।
अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति गेडेला ने अंजना के वकील की दलील सुनने के बाद कहा कि किसी की आलोचना करना गलत नहीं है लेकिन आलोचना शालीन और मर्यादित भाषा में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संभव है कि शिक्षकों की प्रतिक्रिया अंजना ओम कश्यप की टिप्पणियों के जवाब में आयी हो। खान सर की ओर से अधिवक्ता मुरारी तिवारी ने अदालत को बताया कि एंकर अंजना ओम कश्यप के बच्चों से संबंधित जानकारी हटा दी जाएगी। उन्होंने मांग की शिक्षकों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां को भी हटाया जाए और इसे बंद किया जाए। इसके बाद अदालत ने दोनों पक्षों के वकीलों को साथ बैठकर उन शब्दों और टिप्पणियों पर चर्चा करने का निर्देश दिया जिन पर दोनों पक्षों को आपत्ति है ताकि विवाद का समाधान निकाला जा सके।




