कुर्ला लैंडस्लाइड: 8 साल पहले ही खतरे का अलर्ट, फिर क्यों नहीं हुई कार्रवाई?

रिपोर्ट में कहा गया, "खड़ी ढलान, जुड़ी हुई चट्टानों तथा दरारों में जड़ों के फैलने को देखते हुए, इन चट्टानों के गिरने की काफी संभावना है. इस वजह से जान-माल का खतरा भी हो सकता है."

4पीएम न्यूज नेटवर्क: रिपोर्ट में कहा गया, “खड़ी ढलान, जुड़ी हुई चट्टानों तथा दरारों में जड़ों के फैलने को देखते हुए, इन चट्टानों के गिरने की काफी संभावना है. इस वजह से जान-माल का खतरा भी हो सकता है.”

महाराष्ट्र के कुर्ला में 2 दिन पहले हुए लैंडस्लाइड हादसे के बाद एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें कहा गया है कि इसको लेकर काफी पहले ही आगाह कर दिया गया था. इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 8 हो गई है. सरकारी रिकॉर्ड से यह पता चला कि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) ने करीब आठ साल पहले ही बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) को अलर्ट कर दिया था कि कुर्ला की पहाड़ी का यह हिस्सा कभी भी गिर सकता है, जो बुधवार को ढह गया.

साथ ही GSI ने इसके बचाव के लिए कुछ सुझाव भी दिए थे, लेकिन इस पर काम ही नहीं किया गया. अंग्रेजी अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने अपनी एक रिपोर्ट में उन दस्तावेजों का जिक्र करते हुए दावा किया है कि GSI ने साकीनाका की ‘हिल नंबर 3’ पर “तत्काल ध्यान दिए” जाने का सुझाव दिया था. इससे पहले 2005 और 2008 के बीच यहां 3 बार लैंडस्लाइड हुआ था, जिसमें 16 लोगों की मौत हुई थी और कम से कम 26 घर तबाह हो गए थे.

2 साल तक फील्ड सर्वे के बाद बनाई रिपोर्ट
लैंडस्लाइड के स्टडी के लिए केंद्र की नोडल एजेंसी, GSI ने मुंबई के 74 लैंडस्लाइड संभावित इलाकों में 2 साल तक फील्ड विजिट और तकनीकी अध्ययन करने के बाद 2018 में 435 पेज की रिस्क असेसमेंट रिपोर्ट (Risk Assessment Report) तैयार की थी. एजेंसी ने BMC से शहर के संवेदनशील इलाकों के लिए जमीन के इस्तेमाल की नीति (Land-Use Policy) बनाने का सुझाव भी दिया था.

रिपोर्ट में कुर्ला को मुंबई के 5 अहम लैंडस्लाइड रिस्क जोन में शामिल किया गया था, साथ ही भांडुप, घाटकोपर, विक्रोली और चेंबूर का भी जिक्र किया गया था. ‘हिल नंबर 3’ भी उस लिस्ट में शामिल थी. चूंकि यह पहाड़ी ढलान पर खड़ी है और यहां जुड़ी हुई चट्टानें और कमजोर मिट्टी है, ऐसी स्थिति भारी बारिश के दौरान ढलान के नीचे गिरने का खतरा बना रहता है, जबकि और इसके बेस और किनारे पर घर बने हुए हैं.

हाई रिस्क जोन में रखा जहां हुआ लैंडस्लाइड
ढलान पर बसी 2 बस्तियों, नेताजी नगर और मिलिंद नगर का आकलन करने के बाद, GSI ने पाया कि वहां जान-माल का खतरा महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों की तुलना में “कई गुना” अधिक है. यहीं कुर्ला में बुधवार को लैंडस्लाइड तब शुरू हो गया जब भारी बारिश में ढलान पर लगा पीपल का पेड़ उखड़ गया,

जिससे बड़ी संख्या में चट्टानें और बड़े-बड़े पत्थर नीचे बनी झुग्गियों पर आ गिरे. साल 2018 की इस रिपोर्ट में इस प्रक्रिया की ओर इशारा करते हुए आगाह किया गया था कि चट्टानों के बीच की प्राकृतिक दरारों (Joint Planes) में पानी रिसने और इसके जड़ों के फैलने से खतरा बढ़ जाता है.

हादसा टालने को लेकर दिए थे कई सुझाव
रिपोर्ट में आगे कहा गया, “खड़ी ढलान, जुड़ी हुई चट्टानों तथा दरारों में जड़ों के फैलने को देखते हुए, इन चट्टानों के गिरने की काफी संभावना है. इस वजह से जान-माल का खतरा भी हो सकता है. पहाड़ी ढलान के किनारे और बेस पर बसी बस्तियों को काफी नुकसान पहुंच सकता है. इस पर तुरंत ध्यान दिया जाना चाहिए.”

GSI ने हिल नंबर 3 को ‘क्लास II’ या ‘बहुत अधिक जोखिम वाले जोन’ में भी रखा था. एजेंसी ने सलाह दी थी कि ढलान को और न काटा जाए, साथ ही किसी तरह का और कोई निर्माण भी नहीं कराया जाए. इसके अलावा पेड़ों की जड़ों की नियमित छंटाई, छोटे पेड़ों को हटाना, बस्तियों के पीछे खुली ढलान पर ‘वीप होल्स’ (पानी निकलने के छेद) और ‘टो ड्रेन’ (निचले हिस्से में नाली) के साथ रिटेनिंग वॉल बनाया जाना चाहिए. सैनिटरी पानी के निस्तारण के लिए ड्रेनेज सिस्टम भी बनाना बहुत जरूरी है. तब यह भी कहा गया कि इस इलाके से कोई बड़ी नाली भी नहीं गुजरती है.

लैंडस्लाइड की घटना के बाद GSI के एक अधिकारी ने बताया कि घरों के लिए जगह बनाने के मकसद से पहाड़ी ढलानों को काटना और प्राकृतिक ड्रेनेज सिस्टम में बदलाव करने से लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ जाता है. जब भारी बारिश होती है तो ढलान पूरी तरह पानी से भर जाती है, तो वह धंस जाती है.

उन्होंने कहा, “हम पूरे भरोसे के साथ कह सकते हैं कि लैंडस्लाइट अचानक नहीं होता, बल्कि ढलान के आकार और जमीन के इस्तेमाल के तरीके में बदलाव इसे और गंभीर बना देते हैं.” उन्होंने आगे कहा, “ऐसी स्थितियों से बचने के लिए जमीन के इस्तेमाल की नीति अपनानी चाहिए. साथ ही ड्रेनेज सिस्टम को भी सुरक्षित बनाना होगा. हमने 2018 में BMC और राज्य के डिजास्टर सेल को सौंपी गई जोखिम आकलन रिपोर्ट में ये सुझाव दिए थे.” लेकिन 8 साल बीत जाने के बाद भी इनमें से कुछ नहीं किया गया.

शिवसेना पार्षद का दावा- आगाह किया था
BMC के रिकॉर्ड बताते हैं कि 2023 में हिल नंबर 3 को नगर निकाय की भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों की सूची में शामिल किया गया था, जहां रिटेनिंग वॉल बनाना प्राथमिकता थी.

वहीं कुर्ला से शिवसेना पार्षद विजेंद्र शिंदे ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने 3 महीने पहले ही BMC हाउस में इस खतरे को लेकर आगाह किया था. उन्होंने कहा, “मई में, मैंने BMC हाउस में इस मुद्दे को उठाया था और प्रशासन से पहाड़ियों की ढलानों पर मेटल की जाली लगाने का अनुरोध किया था. ये जालियां चट्टानों को गिरने से रोकतीं… लेकिन प्रशासन ने तब ध्यान नहीं दिया, और अब यह घटना हो गई.”

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