राधा-कृष्ण बनकर बच्चों ने जीता सबका दिल, पिरामिड बनाकर फोड़ी दही हांडी
गोरखपुर के रत्न मेमोरियल पब्लिक स्कूल में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर राधा-कृष्ण रूप सज्जा प्रतियोगिता हुई। बच्चों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं और पिरामिड बनाकर दही हांडी फोड़ी।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: गोरखपुर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का रंग उस समय और गहरा हो गया, जब नन्हे बच्चों ने राधा-कृष्ण का रूप धारण कर अपनी मासूम अदाओं और प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। रत्न मेमोरियल पब्लिक स्कूल रैम्पस के सभागार में गुरुवार को श्री राधाकृष्ण रूप सज्जा प्रतियोगिता आयोजित हुई। कार्यक्रम में बच्चों की प्रस्तुतियों के साथ दही हांडी फोड़ने की आकर्षक प्रस्तुति खास आकर्षण रही।
राधा-कृष्ण के रूप में नजर आए नन्हे कलाकार
प्रतियोगिता में बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण और राधा के विभिन्न रूप धारण किए। नन्हे प्रतिभागियों ने भावपूर्ण नृत्य, अभिनय और अलग-अलग मुद्राओं के जरिए अपनी प्रतिभा दिखाई। रंगकर्मी एवं समाजसेवी रीना जायसवाल ने प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका निभाई।
कार्यक्रम का सबसे खास पल तब आया, जब बच्चों ने पिरामिड बनाकर दही हांडी फोड़ी। उनकी प्रस्तुति देखकर सभागार तालियों से गूंज उठा।

अलग-अलग वर्गों में बच्चों ने हासिल किए स्थान
प्री-नर्सरी वर्ग में अनवित प्रथम, दिशु द्वितीय और आन्या तृतीय रहीं। प्लेवे वर्ग में कियांश ने पहला, आद्विका ने दूसरा और हालिम ने तीसरा स्थान हासिल किया। काव्या यादव और आद्या को सांत्वना पुरस्कार मिला।
एलकेजी में ईतांश प्रथम, काश्वी पांडेय द्वितीय और रुद्र प्रताप तृतीय रहे। श्रेया और आर्य प्रताप को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। यूकेजी में ट्विशा जायसवाल प्रथम, उदिशा मिश्रा द्वितीय और समृद्धि मिश्रा तृतीय रहीं। जीवा श्रीवास्तव और रिया सिंह को सांत्वना पुरस्कार मिला।

विजेता बच्चों को झूले में झुलाकर बढ़ाया उत्साह
विद्यालय की प्रशासिका विनीता श्रीवास्तव ने सर्वश्रेष्ठ राधा-कृष्ण बने बच्चों को स्वयं झूले में झुलाकर उनकी कला की सराहना की। प्रबंधक विवेक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि श्रीकृष्ण के गीता उपदेश पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायी हैं और बच्चों को माता-पिता का सम्मान करना चाहिए।
प्रशासिका ने कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों की छिपी प्रतिभा सामने आती है। प्रधानाचार्य राज कुमार श्रीवास्तव ने विजेताओं को शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षकों का योगदान रहा।
रिपोर्ट – अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर
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