रिपोर्टिंग के दौरान 4PM पत्रकार के साथ दिल्ली पुलिस की मारपीट
हैरेसमेंट, डराने की कोशिश

- शाबाश शाहीन भारत को आप पर गर्व है आप ने बता दिया कि जिंदा है असली पत्रकारिता
- खान नाम सुनते ही बढ़ी मारपीट?
- कैमरे पर शाहीन ने दिखाया बांह पर चोट के निशान
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली । आज दिल्ली में 4PM की पत्रकार शाहीन के साथ जो हुआ वह बेहद गंभीर और डराने वाला है। शाहीन अपने एक साथी के साथ मोबाइल कैमरे से रिपोर्टिंग करने कार्यक्रम स्थल पर थी कि अचानक उनको दिल्ली पुलिस के कोपभजन का शिकार बनना पड़ा। उनको पुलिस वैन में जर्बदस्ती बिठा कर थाने लाया गया और उनकी जाति से संबधित सवाल पूछे गये। शाहीन का अरोप है कि दिल्ली पुलिस ने उनके साथ खराब बर्ताव यह जानकर किया कि उनके नाम के आगे खान लगा है और वह मुसलमान है। पुलिस स्टेशन में शाहीन ने पुलिस की मौजूदगी में अपने साथ हुए जुल्म की कहानी वीडियो के जरिये पूरी दुनिया के सामने रखी तो देखने वालों के रोंगेटे खड़े हो गये। सोशल मीडिया पर आज की यह घटना ट्रेंड करने लगी और हर कोई दिल्ली पुलिस की इस दरंदगी की भर्तस्ना करता दिखायी दिया। आज का दिन पत्रकारिता के इतिहास में काला दिन साबित हुआ जब युवा महिला पत्रकार को उसके काम के एवज में पुलिसिया उत्पीडऩ का शिकार बनना पड़ा। दिल्ली पुलिस ने ऐसा इसलिए किया कि 4PM दिल्ली सरकार और सीएम रेखा गुप्ता की आंख की किरकिरी बना हुआ है। 4PM दिल्ली सरकार के कारनामों को लगातार अपने फ्रंट पेज पर छाप रहा है और अपने यूटयूब चैनल के जरिये दिखा रहा है।
लंबे समय से सरकार के निशाने पर है 4PM
आज जो कुछ हुआ वह पहली बार नहीं हुआ है और न ही अंतिम बार। संपादक संजय शर्मा सरकार की हिट लिस्ट में बहुत पहले से हैं और उन पर सरकार की दमनात्मक कार्रवाईयों कि लिस्ट भी लंबी है। उनको सरकारी एजेंसियों ने जांच केजरिये डारने की कोशिश की। 4PM चैनल को दो बार बंद कराया गया जो एक बार सुप्रीम कोर्ट और एक बार हाईकोर्ट के आदेश के बाद खुला। 4 दिन पहले 4PM के बैनर तले निर्मित फिल्मकार संजय शर्मा की बहुप्रतिक्षित फिल्म सहिया को रद्द कर दिया गया। ४क्करू की पत्रकार फिजा के इंस्टापेज को ब्लाक किया गया और आज शाहीन पर दिल्ली पुलिस का हमला। हमारे उपर सरकार की मेहरबानी से उत्पीडऩात्मक कार्रवाईयां जारी है। हम सरकार से यह कहना चाहते हैं कि न तो हम पहले डरे थे और न ही आगे डरेंगे। 4PM में काम करने वाले पत्रकारों का जत्था जुननी है 4PM की टीम अपने संपादक, आपने बॉस, अपने मेंटोर सच्चे पत्रकार संपादक संजय शर्मा के साथ हर हाल हर दिशा में खड़ी है और सच्ची पत्रकारिता के साथ सरकार की आंख में आंख डालकर सवाल पूछती रहेगी।
4PM पर जुल्म की हर चोट के बाद और बुलंद होगा सच
जुल्म की उम्र लंबी नहीं होती लेकिन सच की आवाज सदियों तक गूंजती है। आज अगर किसी पत्रकार को सत्ता से सवाल पूछने की कीमत चुकानी पड़ रही है अगर कैमरा उठाने वाले हाथों को डराने की कोशिश हो रही है अगर सवाल पूछने वाली आवाज को पुलिस की ताकत से खामोश कराने का दुस्साहस किया जा रहा है तो यह सिर्फ 4PM पर हमला नहीं है। यह उस लोकतंत्र की आत्मा को चुनौती है जिसमें सत्ता से सवाल पूछना पत्रकार का अधिकार ही नहीं उसकी जिम्मेदारी भी है। लेकिन सत्ता के गलियारों में बैठे लोगों को एक बात साफ समझ लेनी चाहिए कि 4PM डरने वाला नाम नहीं है। आप दबाव डाल सकते हैं आप धमका सकते हैं आप रास्ते रोक सकते हैं आप पत्रकार को थाने तक ले जा सकते हैं आप कैमरे के सामने खड़ी आवाज को डराने की कोशिश कर सकते हैं लेकिन सच को गिरफ्तार नहीं कर सकते। आजादी की लड़ाई में अंग्रेजी हुकूमत के पास ताकत थी जेल थी कानून था लाठियां थीं। उसके सामने भगत सिंह और चन्द्रशेखर आजाद के पास क्या था? एक अदम्य साहस एक विचार और यह विश्वास कि अन्याय के सामने सिर झुकाना जिंदगी नहीं है। भगत सिंह ने सवाल करना नहीं छोड़ा। आजाद ने गुलामी स्वीकार नहीं की। और इतिहास ने तय कर दिया कि सत्ता की ताकत बड़ी थी या उनकी आवाज। आज लड़ाई का मैदान बदल गया है आज हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं डर के उस माहौल से है जिसमें सत्ता को सवाल पसंद नहीं आते। हम किसी से युद्ध नहीं चाहते हम किसी से टकराव नहीं चाहते। हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि मुख्यमंत्री से सवाल पूछा जा सके। मंत्री से सवाल पूछा जा सके। पुलिस से सवाल पूछा जा सके। सरकार से सवाल पूछा जा सके। क्योंकि लोकतंत्र में सवाल अपराध नहीं होता और अगर सवाल अपराध है तो फिर लोकतंत्र का अर्थ क्या है? 4PM ने कभी सत्ता की आरती उतारने के लिए पत्रकारिता नहीं की। हमने सड़क पर उतरकर खबर की है लोगों के बीच जाकर सवाल किए हैं और जहां व्यवस्था कमजोर दिखी वहां सवाल खड़ा किया है। इसलिए हमें चुप कराने की कोशिश मत कीजिए एक पत्रकार को डराओगे तो दस सवाल खड़े होंगे। दस पत्रकारों को दबाओगे तो सौ कैमरे उठेंगे। आवाजों को रोकने की कोशिश करोगे तो पूरा समाज सवाल पूछेगा। यह लड़ाई किसी एक शाहीन की नहीं है यह लड़ाई किसी एक पत्रकार की नहीं है यह लड़ाई उस अधिकार की है जिसके बिना पत्रकारिता सिर्फ सरकारी विज्ञप्तियों की नकल बनकर रह जाएगी और 4PM नकल करने के लिए पैदा नहीं हुआ। हम सवाल पूछेंगे हम सच दिखाएंगे हम अन्याय पर बोलेंगे और दबाव चाहे जितना हो कलम नहीं रुकेगी क्योंकि याद रखिए जुल्म की हर चोट हमारी आवाज को कमजोर नहीं करती उसे और बुलंद करती है। आप 4PM पर चाहे जितने जुल्म कर लो सच की आवाज को दबा नहीं सकते क्योकि 4PM सिर्फ एक चैनल नहीं सवाल पूछने की जिद है।
शाहीन का कहना है
4PM की पत्रकार शाहीन दिल्ली की मुख्यमंत्री से सवाल पूछना चाहती थी। सवाल पूछना पत्रकार का धर्म है और कर्म भी। यही काम शाहीन भी कर रही थी। लेकिन शाहीन का सवाल पूछना दिल्ली पुलिस को अखर गया और दिल्ली पुलिस ने अपनी लक्ष्मण रेखा को लांघते हुए वह कर दिया जो कभी अंग्रेजों के जमाने में भारत में हुआ करता था। अंग्रेज सवाल पूछने के जवाब में कोड़े मारते थे और शाहीन को दिल्ली पुलिस ने डंडों से पीटा। उनकी बाह पर नीले निशान है और शरीर पर खरोंचों के निशान बता रहे है कि उनके साथ कितनी ज्यादती कि गयी। उन्हें जर्बदस्ती पुलिस वैन में बिठा कर थाने लाया गया।




