टिबरेवाल का खेल, लंदन का मेल… हजारों करोड़ और लखनऊ की वर्चस्व मीडिया कंपनी
अक्षत को भारत लाने की कोशिश क्यों नहीं कर रही ईडी!

- महादेव एप का सबसे बड़ा खिलाड़ी है टिबरेवाल
- मारीशस की कंपनियों से भारत आ रहा है हजारों करोड़ रुपया
- अबतक की सबसे अहम खबर शातिर टिबरेवाल एंड संस कैसे शेयर बाजार में आग लगा कर अर्थव्यवथा को कर रहे हैं तहस नहस
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। नाम तो आपने सुना होगा हरिशंकर टिबरेवाल, फ्राड, हवाला नेटवर्क और वित्तीय धोखाधड़ी का मास्टर माइंड जोकि लंदन में अपने बेटे अक्षत टिबरेवाल और अपने गिरोह के दूसरे सदस्यों के साथ भारत की अर्थव्यवस्था को तार तार कर करोड़ों/अरबों कमा रहा है।
टिबरेवाल के उपर केस दर्ज है और उसे ईडी को अबतक लंदन से भारत ले आना चाहिए था लेकिन वह अपने ऊंचे कनेक्शन के बल पर बचता आ रहा है। रोज नित्य नये खुलासे हो रहे हैं जांच एजेंसिया और अदालतें आदेश पर आदेश दे रही है लेकिन कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ पा रहा। चर्चाएं है कि उसकी पकड़ सीधे पीएमओ और उससे आगे तक है… उसी टिबरेवाल की इस पूरे कॉकस पर 4PM न्यूज नेटवर्क ने पूरे जोखिम के साथ सच को सामने लाया है। टिबरेवाल उसका ताजा अपराध और लखनऊ के नेहरू एनक्लेव में चल रही वर्चस्व मीडिया कंपनी की कहानी।

पैसे की कहानी में हर मोड़ पर नया ट्विस्ट
रिश्ते अब सपाट नहीं रहे पैसे की कहानी में हर मोड़ पर नया ट्विस्ट है। एक तरफ विदेशी फंडों की लंबी कतार दूसरी तरफ भारतीय कंपनियों में निवेश बीच में दुबई और लंदन की बैठकें और फिर शेयर बाजार में ऐसा खेल जिसमें भाव ऊपर जाएं तो बल्ले -बल्ले और नीचे आये तो और भी ज्यादा फायदा। अब इस पूरी कहानी में 765.77 करोड़ रुपये का आंकड़ा भी सामने आया है। रायपुर की विशेष अदालत के 29 सितंबर के आदेश में ईडी की ओर से लगाए गए आरोपों का जिक्र है कि विदेशी संस्थाओं के जरिए इतनी बड़ी रकम ऐसे नेटवर्क तक पहुंची जिसका सीधा कनेक्शन हरिशंकर टिबरेवाल से है। कहानी यहीं खत्म नहीं होती कहानी का अगला सीन लंदन में खुलता है। टिबरेवाल के बेटे अक्षत टिबरेवाल के ब्रिटेन में कारोबार और उसमें लगी बड़ी पूंजी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पैसा कहां से आ रहा है किसके जरिए लाया जा रहा है और कारोबार में किस किसका पैसा लगाया जा रहा है और क्या इसका कोई सिरा उस वित्तीय नेटवर्क तक पहुंचता है जिसकी जांच ईडी कर रही है।
भंडारी ने भारतीय कंपनियों के नाम ईडी को बताये हैं
भंडारी के बयान में जिन भारतीय कंपनियो के नाम सामने आये हैं उनमें एबिलिटी गेम्स, बीएलबी, निश्चय ट्रेडिंग, कांतिलाल छगनलाल, स्वर्णभूमि वाणिज्य, एबिलिटी स्मार्ट टेक, ड्रीम अचीवर्स कंसल्टेंसी आदि। बयान में दावा किया गया है कि इनमें से कुछ भारतीय संस्थाएं टिबरेवाल से जुड़े एजेंटों के नियंत्रण में थीं और उसके निर्देश पर निवेश करती थीं। अब कहानी यहां से और गंभीर हो जाती है। कि किसी सूचीबद्ध कंपनी को पैसा चाहिए होता था तो उसके प्रवर्तकों से संपर्क किया जाता था। फिर प्रस्ताव टिबरेवाल तक जाता था। इसके बाद दुबई लंदन या श्रीलंका में बैठकें होती थीं और सौदे की शर्तें तय होती थी। भंडारी के बयान में कहा गया कि कुछ शेयरों के दाम दो से पांच गुना तक बढऩे के बाद टिबरेवाल से जुड़ी संस्थाएं अपनी हिस्सेदारी बाजार में बेचती थीं जिससे छोटे निवेशक धराशाही हो जात थे। क्योंकि अगर किसी शेयर का भाव ऊपर जा रहा है तो आम निवेशक उसे कंपनी की तरक्की का संकेत मानता है।
भारत में करोड़ों रुपये के धन प्रवाह और शेयर बाजार में हेरफेर
एक तरफ विदेशी फंड है तो दूसरी तरफ भारतीय कंपनियां बीच में दुबई लंदन और श्रीलंका में बैठकों का दौर और फिर शेयर बाजार में दाम बढऩे के बाद हिस्सेदारी बेचने के किस्से। अब इसी कहानी में एक और नाम जुड़ रहा है और वह नाम है अक्षत टिबरेवाल का लंदन में कंपनियां कारोबार संपत्तियां और सवाल सीधा है कि जिस नेटवर्क पर भारत में करोड़ों रुपये के धन प्रवाह और शेयर बाजार में हेरफेर के आरोपों की जांच चल रही है क्या जांच की कोई कड़ी लंदन तक भी पहुंचती है। हम यह नहीं कह रहे कि अक्षत का कारोबार गैरकानूनी है। हम यह भी नहीं कह रहे कि हरिशंकर टिबरेवाल से जुड़े आरोप साबित हो चुके हैं। हम सिर्फ दस्तावेजों के आधार पर सवाल पूछ रहे हैं कि पैसा कहां से आया? किसके जरिए लाया गया? पूरा खेल किसके नियंत्रण में था? और आखिर फायदा किसे हुआ? क्योंकि बात अब 765 करोड़ रुपये से ऊपर तक पहुंच चुकी है। ईडी के रायपुर कार्यालय में 8 मई 2025 को सुनील भंडारी का बयान दर्ज होता है जिसमें उन्हें श्रेष्ठ फिनवेस्ट लिमिटेड का पूर्णकालिक निदेशक बताया गया है और बयान धनशोधन निवारण कानून की धारा 50 के तहत दर्ज होने की बात कही गई है। भंडारी के बयान में कई विदेशी संस्थाओं का जिक्र है। दुबई, सिंगापुर, मलेशिया और लंदन बयान में दावा किया गया है कि इनमें से कुछ कपंनियां हरिशंकर टिबरेवाल के नियंत्रण और स्वामित्व में थीं और भारतीय कंपनियों में निवेश करती थीं। बयान में नॉर्थ स्टार अपॉर्चुनिटीज फंड, कोयस ग्लोबल अपॉर्चुनिटीज फंड, सिक्स्टीन्थ स्ट्रीट ग्लोबल फंड, थ्री सिग्मा कैपिटल और कैप्री ग्लोबल कैपिटल जैसे नाम शामिल किये गये हैं। आगे कई और विदेशी संस्थाओं के नाम भी दर्ज हैं। कुछ संस्थाओं के सामने बालू फोर्ज और स्वान एनर्जी जैसी कंपनियों में निवेश का उल्लेख भी है। यहां यह बताना जरूरी है कि किसी कंपनी का नाम दस्तावेज में आ जाना अपने आप में अपराध साबित नहीं होता यही वजह है कि असली सवाल नामों की लंबी सूची में नहीं है बल्कि असली सवाल है कि इन कंपनियों का असली नियंत्रण किसके पास था? पैसा किसका था? निवेश का फैसला कौन करता था और मुनाफा किसकी जेब में जाता था?
अब आते हैं अक्षत टिबरेवाल पर
अक्षत टिबरेवाल जोकि हरिशंकर टिबरेवाल का बेटा है ब्रिटेन के कंपनी रिकॉर्ड से जुड़े विवरणों के मुताबिक अक्षत की कई कारोबारी संस्थाओं में निदेशक और महत्वपूर्ण नियंत्रण वाली भूमिका बताई गई है। अब सवाल यह है कि अक्षत टिबरेवाल के कारोबारों की शुरुआती पूंजी कहां से आयी। अपनी कमाई निवेशक बैंक परिवार या कोई विदेशी वित्तीय व्यवस्था सिर्फ कम उम्र में कंपनी बनाना कोई अपराध नहीं है लेकिन जब दूसरी तरफ उसी परिवार से जुड़े व्यक्ति पर भारत में गंभीर वित्तीय आरोपों की जांच चल रही हो तब पूंजी के स्रोत की पड़ताल एक वैध जांच प्रश्न बन जाता है। और सबसे महत्वपूर्ण बात है भंडारी के बयान। 4PM सवाल पूछता है कि क्या जांच एजेंसियों ने इस कड़ी को जांचा अगर जांचा है तो नतीजा क्या निकला अगर नहीं जांचा तो क्यों नहीं जांचा।
खुलासे बढ़े तो खतरा भी बढ़ा संजय शर्मा की जान को लेकर गंभीर सवाल
4PM न्यूज नेटवर्क के संपादक संजय शर्मा लगातार नए दस्तावेज और नए सवाल सामने रख रहे हैं। टिबरेवाल पर हर खुलासे के साथ कहानी बड़ी होती जा रही है और अब मामला सिर्फ शेयर बाजार विदेशी फंड या करोड़ों के लेनदेन तक सीमित नहीं रह गया है। बात इससे आगे निकल चुकी है और संपादक संजय शर्मा ने अपनी जान को खतरा बताया है। अगर कोई पत्रकार किसी बड़े वित्तीय नेटवर्क से जुड़े दस्तावेज सामने रख रहा है विदेशी संस्थाओं के नाम बता रहा है धन प्रवाह और शेयर बाजार में हेरफेर के तरीकों पर सवाल उठा रहा है और इसके बाद खुद अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहा है तो संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि उपलब्ध दस्तावेजी सामग्री में ईडी की जांच से जुड़े एक बयान में विदेशी संस्थाओं भारतीय कंपनियों दुबई लंदन जैसी जगहों पर बैठकों और शेयरों की कीमत बढऩे के बाद हिस्सेदारी बेचने जैसे आरोप दर्ज हैं। इसके बाद रायपुर की विशेष अदालत के 29 सितंबर 2026 के आदेश में 765 करोड़ 77 लाख रुपये के विदेशी धन प्रवाह का उल्लेख भी सामने लाया है ।



