Modi ने हवा में उड़ाई प्रभु श्री हनुमान जी की पतंग, सनातनियों की आस्था का किया अपमान

हनुमान जी, जिन्हें सनातन धर्म में मर्यादा, भक्ति, बल और त्याग का प्रतीक माना जाता है…उन्हें पतंग के तौर पर हवा में उड़ाना क्या सच में श्रद्धा का प्रतीक है?

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सनातन, धर्म और आस्था का राग अलापने वाले हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुलेआम हवा में प्रभु श्री हनुमान जी महाराज की पतंग हवा में उड़ाकर उन तमाम सनातनियों और देशवासियों की आस्था को ठेस पहुंचा रहे हैं….या फिर यूं कहें कि देवी-देवताओं के प्रति लोगों की आस्था का खुलेआम मजाक उड़ा रहे हैं.

आपने अकसर ही कई बार सुना होगा कि देश में जब भी सनातन, धर्म और आस्था की बात होती है…तो सबसे ऊंची आवाज भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुनाई देती है….बड़े-बड़े चुनावी मंचों से लेकर सरकारी आयोजनों तक….हर जगह धर्म का हवाला दिया जाता है…..लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि क्या ये आस्था सच्ची है या सिर्फ राजनीतिक इस्तेमाल का जरिया?….याफिर सिर्फ भारतीय जनता पार्टी का कोई चुनावी एजेंड़ा? दरअसल, अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जर्मन चांसलर के साथ बजरंगबली की तस्वीर वाली पतंग उड़ाने को लेकर अब सियासी विवाद खड़ा हो गया है……प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रभु श्री हनुमान जी की तस्वीर वाली पतंग उड़ाने की घटना ने करोड़ों सनातनियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या ये आस्था का सम्मान है या खुलेआम मज़ाक….वो भी एक विदेशी अतिथि के सामने?….सोचिए की यूं जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के सामने बजरंगबली की पतंग हवा में उड़ाने से क्या संदेश गया होगा कि कैसे हम अपने देवी-देवताओं का मजाक उड़ा रहे हैं?….

हनुमान जी, जिन्हें सनातन धर्म में मर्यादा, भक्ति, बल और त्याग का प्रतीक माना जाता है…उन्हें पतंग के तौर पर हवा में उड़ाना क्या सच में श्रद्धा का प्रतीक है?….या फिर ये उस धर्म का स्पष्टीकरण है…..जिसे भाजपा हमेशा गंभीर और पवित्र बताती रही है?……अगर यही काम कोई आम व्यक्ति या विपक्ष का कोई नेता करता…तो अब तक देश में बवाल मच चुका होता……तमाम टीवी डिबेट, FIR, सड़कों पर प्रदर्शन और सोशल मीडिया ट्रायल….ये सब कुछ शुरू हो गया होता…..लेकिन जब ये सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते हैं….तो वही लोग चुप्पी साध लेते हैं जो ज़रा-ज़रा सी बात पर धार्मिक भावनाओं के आहत होने का ढोल पीटते हैं…….ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यही भाजपा का दोहरा चरित्र है?…..क्या यही उसका नकाब है…जो अब धीरे-धीरे उतरता जा रहा है…..सवाल ये नहीं है कि पतंग उड़ाना गलत है या नहीं….सवाल तो ये है कि देवी-देवताओं को राजनीतिक इवेंट और पब्लिसिटी स्टंट का हिस्सा बनाना कितना सही है?…..वो भी हर मौके पर?…..

हनुमान जी कोई खिलौना नहीं हैं….वो करोड़ों लोगों के आराध्य हैं…….यूं तो भाजपा और उसके सहयोगी संगठन हमेशा कहते हैं कि हिंदू धर्म खतरे में है….लेकिन जब खुद प्रधानमंत्री हिंदू धर्म के सबसे पूज्य प्रतीकों को मनोरंजन या फोटो-ऑप में बदल देते हैं….तो खतरा किससे है?….. जैसे ही पीएम मोदी द्वारा बजरंगबली की पतंग उड़ाने का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया तो भारी बवाल मच गया और लोगों ने इसे सीधा सनातनियों की आस्था को ठेस पहुंचाने और देवी-देवताओं का अपमान करने जैसा बताया……वहीं विपक्ष का आरोप है कि भाजपा को आस्था से नहीं…..सिर्फ सत्ता से मतलब है…..इस पूरे मामले को लेकर आम लोगों से लेकर राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी…..विपक्ष ने पूरे मामले को लेकर तीखा हमला बोला है…

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि…. इनकी घड़ी घड़ी की नौटंकी तो झेल ही रहे हैं लेकिन अपने देवी देवताओं का अपमान कैसे सहें? पवनसुत हनुमान जी को पतंग बनाकर उड़ाने की हिम्मत कैसे हो रही है इनकी? सनातन की बात करने वाले सारे फ़र्ज़ी कहाँ ग़ायब हैं? मुँह में दही जम गई क्या?…….वहीं कांग्रेस नेता BV श्रीनिवास ने सवाल पूछा कि…नरेंद्र मोदी द्वारा भगवान हनुमान को पतंग की तरह उड़ाना क्या शोभनीय है?

विपक्ष का ये सवाल सीधा और साफ है कि क्या सनातन सिर्फ वोट बैंक है?….क्या देवी-देवता सिर्फ चुनावी पोस्टर और इवेंट मैनेजमेंट का हिस्सा बनकर रह गए हैं?……….और तो और सबसे बड़ा सवाल तो बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों पर भी उठ रहा है…..ये वही संगठन हैं जो फिल्मों, विज्ञापनों, किताबों और यहां तक कि कपड़ों के रंग पर भी धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप लगा देते हैं……लेकिन जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हनुमान जी को पतंग बनाकर उड़ाते हैं….तो इन संगठनों की ज़ुबान पर ताला क्यों लग जाता है?….क्या इनके लिए आस्था की परिभाषा व्यक्ति देखकर बदल जाती है?…..

अगर यही काम किसी मुस्लिम नेता ने किया होता….या किसी गैर-भाजपा मुख्यमंत्री ने किसी देवी-देवता की तस्वीर के साथ ऐसा सार्वजनिक प्रदर्शन किया होता…तो अब तक उसे हिंदू विरोधी, सनातन विरोधी और देशद्रोही घोषित कर दिया गया होता…लेकिन मोदी जी के मामले में हर गलती को श्रद्धा, संस्कृति और परंपरा बताकर ढक दिया जाता है…विपक्ष का कहना है कि भाजपा ने धर्म को इतना हल्का बना दिया है कि अब वो सिर्फ कैमरे के सामने किया जाने वाला प्रदर्शन बनकर रह गया है…कभी मंदिर में फोटोशूट, कभी पूजा के नाम पर राजनीतिक भाषण और अब देवी-देवताओं को पतंग और कार्यक्रमों का हिस्सा बनाना……..क्या यही सनातन की रक्षा है?…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार खुद को सनातन और धर्म का रक्षक बताते हैं…लेकिन सच्ची भक्ति दिखावे से नहीं…मर्यादा से होती है…..हनुमान जी का जीवन विनम्रता और सेवा का प्रतीक है…न कि प्रचार और आत्मप्रशंसा का….विपक्ष अकसर ही आरोप लगाता रहा है कि मोदी जी ने भक्ति को ब्रांडिंग बना दिया है….देश के कई संत-महात्मा भी निजी बातचीत में ये सवाल उठा रहे हैं कि क्या धार्मिक प्रतीकों को इस तरह सार्वजनिक तमाशा बनाना ठीक है…लेकिन डर के कारण कोई खुलकर सामने नहीं आ रहा…यही भाजपा की राजनीति का सबसे खतरनाक पहलू है…जहां असहमति को देश और धर्म विरोधी बता दिया जाता है…

भाजपा हमेशा कहती है कि वो हिंदू संस्कृति की रक्षक है…..लेकिन सच तो ये है कि उसने संस्कृति को राजनीति का औजार बना दिया है…मंदिर, भगवान, पूजा-पाठ….ये सब कुछ चुनावी रणनीति का हिस्सा बन चुका है….और हनुमान जी को पतंग बनाकर उड़ाना उसी राजनीति की अगली कड़ी है…….जिसे लेकर आम जनता पूछ रही है कि….क्या यही वो संस्कार हैं…जिनकी बात प्रधानमंत्री करते हैं?….क्या यही वो नया भारत है….जहां भगवान भी इवेंट मैनेजमेंट का हिस्सा बन जाएं? और अगर आस्था का यही स्तर रह गया है…तो फिर भाजपा को दूसरों पर उंगली उठाने का कोई हक नहीं….

इस घटना ने एक बार फिर ये साबित कर दिया है कि भाजपा के लिए धर्म सम्मान का विषय नहीं…..बल्कि इस्तेमाल की चीज है….जब तक फायदा है….तब तक भगवान साथ हैं….जब सवाल उठे….तो चुप्पी और बचाव….आज देश का सनातनी समाज ये सवाल पूछ रहा है कि क्या उनकी भावनाएं सिर्फ सत्ता की सीढ़ी हैं?…..क्या उनकी आस्था सिर्फ भाषणों और तस्वीरों तक सीमित है?….हनुमान जी को पतंग बनाकर उड़ाना सिर्फ एक घटना नहीं….बल्कि भाजपा की पूरी सोच का आईना है….

ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को अब तय करना होगा कि वो सच में सनातन का सम्मान करते हैं या सिर्फ उसका राजनीतिक इस्तेमाल……क्योंकि आस्था खिलौना नहीं होती और भगवान प्रचार का माध्यम नहीं होते…..अगर भाजपा यही करती रही….तो वो दिन दूर नहीं जब लोग पूछेंगे कि सबसे बड़ा अपमान आस्था का नहीं…..बल्कि आस्था के नाम पर राजनीति का है……….कबतक यूं ही धर्म के नाम पर राजनीति होती रहेगी?….और आखिर कबतक हम यूं ही देवी देवताओं का अपमान सहते रहेंगें?..

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