AMU में मंदिर बनाने की मांग कर फंसे देवकीनंदन ठाकुर, बीजेपी ने ही कर लिया किनारा!

भाजपा की इस सरकार में जो हो जाए वही कम है, कोई भी कुछ भी बयानबाजी कर देता है और जिससे राज्य में इस कदर माहौल खराब होता है सियासी बहस का विषय बन जाता है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा की इस सरकार में जो हो जाए वही कम है, कोई भी कुछ भी बयानबाजी कर देता है और जिससे राज्य में इस कदर माहौल खराब होता है सियासी बहस का विषय बन जाता है। लेकिन सरकार इसपर कुछ खास ध्यान नहीं देती या यूँ कह लें कि सरकार को इन सबसे ज्यादा फायदा नजर आता है।

यानी जितना ज्यादा हिन्दू मुसलमान उतना ज्यादा ही वोटों का फायदा। तभी तो धर्म के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा के राज में सबसे ज्यादा हिन्दू मुसलमान की राजनीति पनप चुकी है। अब आलम ये है कि शिक्षा को भी ये लोग धर्म का चोला पहनाना चाह रहे हैं। देवकीनंदन ठाकुर ने ऐसा ऐसा बयान दे डाला जिसे लेकर सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। दरअसल देवकीनंदन ठाकुर अलीगढ़ के खुर्जा स्थित शारदा जैन में श्री कुंज बिहारी सेवा परिकर के चतुर्थ वार्षिकोत्सव के अवसर पर चल रही मीरा चरित्र कथा में शामिल होने पहुंचे थे, जहां उन्होंने मंच से कई अहम बयान दिए. उन्होंने कहा कि अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में काम करने वाला एक सनातनी वहां तिलक लगाकर चला गया तो उसे मना कर दिया कि तुम तिलक नहीं लगाकर आओगे.

तो उसने जवाब दिया हम तिलक नहीं लगाएंगे तुम गारंटी लो कि तुम टोपी नहीं लगाओगे. यूनिवर्सिटी सरकार के पैसे से चलती है किसी के पैसे से नहीं चलती. तो अगर वहां मस्जिद है तो वहां मंदिर भी बनना चाहिए, वहां टोपी है तो तिलक भी लगना चाहिए, क्योंकि यह भारत मेरे राम का है मेरे कृष्ण का है. अगर मैं रामायण नहीं पढ़ सकता तो तुम क़ुरान भी नहीं पढ़ सकते. देवकीनंदन ने कहा कि हम सभी को हिंदू राष्ट्र सनातन राष्ट्र, सनातनी बहन बेटियों को बचाने की मुहिम, कल से नहीं इसकी आज से ही शुरुआत करनी होगी.

हमें यह प्रयास करना होगा कि हमारे सनातनी बांग्लादेश में भी बचे.. इंग्लैंड में भी बचे और हिंदुस्तान में किसी को बुरी नजर ना लगे. इसकी तैयारी हमें बिना एक दिन भी गंवाये करनी चाहिए. उन्होंने कहा हमारा ड्रीम है एक तिलकधारी एक भगवाधारी बांग्लादेश में भी रूल करेगा और पाकिस्तान में भी रूल करेगा. धर्म परिवर्तन करके जो मुस्लिम बने हैं वह इसी देश के हैं. आज 1 हजार वर्ष बाद भी सोमनाथ मंदिर वही है, भगवान राम का मंदिर बन गया है. हम फिर धीरे-धीरे जा रहे हैं कृष्ण मंदिर भी बनेगा, काशी विश्वनाथ मंदिर बनेगा. हम सब सनातन की इस पवित्र भूमि पर सनातन की ध्वजा का ध्वजारोहण करेंगे.

देवकीनंदन ठाकुर का तर्क था कि AMU एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है, जो सरकारी अनुदान से चलता है और भारत एक सेकुलर देश है, इसलिए वहाँ सभी धर्मों के प्रतीकों और पूजा स्थलों को समान अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “भारत मेरे राम और मेरे कृष्ण का है”, और यदि वहाँ रामायण पढ़ने पर रोक लगे तो कुरान पढ़ने पर भी रोक होनी चाहिए। उनका मुख्य मुद्दा समानता और पारस्परिक सम्मान पर आधारित था, जिसमें उन्होंने AMU में पहले से मौजूद मस्जिद का हवाला देते हुए मंदिर की मांग की। वहीं यह बयान बहुत तेजी से वायरल हुआ और विभिन्न मीडिया चैनलों पर खूब दिखाया जा रहा है। कुछ जगहों पर इसे विवादित करार दिया गया, जबकि हिंदुत्ववादी समूहों ने इसका समर्थन किया। AMU के मुख्य मुफ्ती मौलाना चौधरी इफ्राहीम हुसैन ने प्रतिक्रिया में कहा कि विश्वविद्यालय में सभी समुदायों के छात्र पढ़ते हैं और संविधान सभी को धार्मिक स्वतंत्रता देता है, इसलिए यदि मांग संवैधानिक भावना से की गई है तो आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

देवकीनंदन ठाकुर के इस बयान को लेकर सियासत भी तेज हो गई हैं. समाजवादी पार्टी के नेता और प्रवक्ता मनोज कुमार काका की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने कहा कि जो समाज में कटुता का प्रसार कर रहे हैं वो संत नहीं है. लेकिन इन सबके बीच दिलचस्प बात यह है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी ने फिलहाल कथावाचक के बयान से किनारा कर लिया है। पार्टी सूत्रों और प्रवक्ताओं का कहना है कि यह देवकीनंदन ठाकुर के निजी विचार हो सकते हैं और सरकार या पार्टी का इससे कोई सीधा लेना-देना नहीं है। बीजेपी नेताओं ने स्पष्ट किया कि किसी भी संस्थान में नियमों का पालन होना चाहिए, लेकिन मंदिर निर्माण जैसे भावनात्मक मुद्दों पर वे फिलहाल कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं करना चाहते। कुल मिलाकर, यह घटना धार्मिक समानता, सेकुलरिज्म और विश्वविद्यालयों में धार्मिक प्रतीकों के मुद्दे पर नई बहस छेड़ गई है, जो भारत में अक्सर चर्चा में रहता है।

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