हिमाचल में मानसूनी बारिश से भारी तबाही, 157 लोगों की मौत और ₹886 करोड़ की क्षति
मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के कई जिलों में भारी बारिश का खतरा बना हुआ है. राज्य के 5 जिलों में अभी भी ऑरेंज अलर्ट है. SEOC रिपोर्ट बताती है कि इस आपदा में करीब 900 संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के कई जिलों में भारी बारिश का खतरा बना हुआ है. राज्य के 5 जिलों में अभी भी ऑरेंज अलर्ट है. SEOC रिपोर्ट बताती है कि इस आपदा में करीब 900 संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है.
हिमाचल प्रदेश में इस बार भी भीषण बारिश ने जमकर तबाही मचाई है. जान-माल का भारी नुकसान हुआ है. कई सड़कें भी टूट गई है जिसकी वजह से इसे बंद करना पड़ा है. इस पहाड़ी प्रदेश में 30 जून से 9 अगस्त के बीच मानसून के कहर से कम से कम 157 लोगों की मौत हो गई जबकि 257 लोग घायल हुए हैं.
राज्य में पिछले कुछ हफ्तों में भारी बारिश हुई है. मरने वालों में से 89 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई, जबकि 68 लोगों की मौत भूस्खलन, डूबने, सांप के काटने या फिर गिरने से हुई. राज्य में इस प्राकृतिक आपदा की वजह से सबसे अधिक मौतें चंबा जिले में हुईं, जहां 24 लोगों की जान गई. इसके बाद कुल्लू और कांगड़ा में 21-21 लोगों की मौत हुई. इसी तरह राजधानी शिमला में 20 तो स्पीति और लाहौल में 18-18 लोगों की जान चली गई.
हिमाचल के 5 जिलों में ऑरेंज अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के कई जिलों में भारी बारिश का खतरा बना हुआ है. राज्य के 5 जिलों में अभी भी ऑरेंज अलर्ट है. हिमाचल सरकार की ओर से जारी स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर (SEOC) की ताजा रिपोर्ट से पता चला है कि इस आपदा में करीब 900 संपत्तियों और सार्वजनिक निर्माण कार्यों को खासा नुकसान पहुंचा है, जिससे 886 करोड़ रुपये की संपत्ति बर्बाद हो गई है.
क्या जलवायु परिवर्तन जिम्मेदार?
क्या जलवायु परिवर्तन और अवैज्ञानिक निर्माण गतिविधियां हिमाचल प्रदेश में आपदाओं का कारण बन रही हैं, लोकसभा में पूछे गए इस सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने कल मंगलवार को बताया कि जलवायु परिवर्तन की वजह से हिमालयी क्षेत्र में बारिश की बहुत अधिक घटनाएं होने लगी हैं और अब यह आम बात हो गई है. हालांकि, सरकार यह भी मानती है कि इंसानी गतिविधियों से भी आपदा का खतरा बढ़ रहा है.
स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर (SEOC) की रिपोर्ट में बताया गया है कि बारिश और भूस्खलन की वजह से राज्य में 259 सड़कें बंद हो गई हैं. मंडी में सबसे अधिक 120 सड़कों पर असर पड़ा. इसके बाद चंबा का नंबर आता है और यहां पर 42 सड़क तबाह हो गई हैं. कुल्लू में 40 तो शिमला में 30 सड़कें प्रभावित हुईं.
बारिश से बिजली सप्लाई पर असर
इसके अलावा, आपदा की वजह से पूरे हिमाचल प्रदेश में बिजली सप्लाई पर भी असर पड़ा है. मंडी पर ही सबसे अधिक मार पड़ी है, यहां पर 63 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफ़ॉर्मर रीजन (DTR) खराब हो गए हैं. अन्य जिलों में 3 और DTR पर असर पड़ा है. खराब मौसम की वजह से पानी सप्लाई पर भी असर पड़ा है. लगातार बारिश होने, सड़कें टूटने और पानी की सप्लाई बाधित होने की अधिकतर घटनाएं शिमला में हुईं, और यहां पर इस तरह की 12 घटनाएं सामने आईं. जबकि हमीरपुर में 5 और बिलासपुर में 2 जगह सप्लाई बाधित हुई है.



