Moradabad: तेंदुओं के खिलाफ रेस्क्यू अभियान जारी, एक और तेंदुआ पिंजरे में कैद

मुरादाबाद के मलकपुर सेमली में एक और तेंदुआ पिंजरे में कैद. 46 पिंजरों और ड्रोन निगरानी से 3 अगस्त से अब तक 14 तेंदुए रेस्क्यू.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मुरादाबाद के मलकपुर सेमली में एक और तेंदुआ पिंजरे में कैद. 46 पिंजरों और ड्रोन निगरानी से 3 अगस्त से अब तक 14 तेंदुए रेस्क्यू.

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद में लंबे समय से बना तेंदुओं का आतंक अब धीरे-धीरे थमने लगा है. वन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे ‘मेगा रेस्क्यू ऑपरेशन’ के तहत ठाकुरद्वारा तहसील क्षेत्र के मलकपुर सेमली गांव में एक और तेंदुआ सफलतापूर्वक पिंजरे में कैद हो गया है.

इसके साथ ही, 3 अगस्त से शुरू हुए इस वृहद अभियान के तहत अब तक कुल 14 तेंदुओं (ठाकुरद्वारा से 13 और कांठ तहसील से 1) को रेस्क्यू किया जा चुका है. इस सफलता के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, हालांकि क्षेत्र में सतर्कता अभी भी बरकरार है.

गौरतलब है कि बीते कुछ महीनों के भीतर तेंदुओं के हिंसक हमलों ने पूरे मुरादाबाद क्षेत्र को थर्रा दिया था. इन हमलों में चार लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी थी, जबकि एक दर्जन से अधिक ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हुए थे. इसके अलावा, अज्ञात वाहनों की टक्कर से ठाकुरद्वारा और छजलेट थाना क्षेत्रों में दो तेंदुओं की सड़क हादसों में मौत भी हो चुकी थी. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने कार्रवाई की गति बढ़ा दी. शुरुआत में जहां केवल 16 पिंजरों से तलाश शुरू की गई थी, वहीं अब 46 पिंजरे सक्रिय कर दिए गए हैं.

ड्रोन और कैमरा ट्रैप से हाई-टेक निगरानी

तेंदुओं की सटीक लोकेशन ट्रेस करने और घने जंगलों तथा खेतों पर पैनी नजर रखने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है. वन विभाग की टीमें घने जंगलों और गन्ने के खेतों में ड्रोन कैमरों से सर्विलांस कर रही हैं. तेंदुओं की आवाजाही वाले रास्तों पर कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं. इन्हीं आधुनिक संसाधनों और लगातार गश्त की मदद से तेंदुओं को बिना नुकसान पहुंचाए लगातार पकड़ा जा रहा है.

जिलाधिकारी का बयान: हमलों की संख्या हुई लगभग शून्य

रेस्क्यू अभियान की प्रगति पर जानकारी देते हुए मुरादाबाद के जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने बताया कि 3 अगस्त से वन विभाग, राजस्व और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीमें दिन-रात मुस्तैदी से इलाकों में गश्त कर रही हैं.

डीएम डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने कहा- त्वरित रेस्क्यू, आधुनिक तकनीक और जन-जागरूकता के मेल से अब तेंदुओं के हमले और हादसों की संख्या लगभग शून्य हो गई है. पकड़े जा रहे तेंदुओं को पूरी सुरक्षा के साथ उनके प्राकृतिक वास या चिड़ियाघर में पुनर्वासित किया जा रहा है. प्रशासन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ वन्यजीवों का सुरक्षित बचाव करना है.

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