सीधे ट्रंप से बात करेंगे मुजतबा खामेनेई? जंग खत्म होने के संकेत
तेहरान और वाशिंगटन के गलियारों से जो खबरें छनकर आ रही हैं, उन्होंने पूरी दुनिया के होश उड़ा दिए हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: क्या मिडिल ईस्ट की दहकती आग अब ठंडी होने वाली है? क्या दुनिया के सबसे बड़े दुश्मन अब एक मेज़ पर बैठने जा रहे हैं?
तेहरान और वाशिंगटन के गलियारों से जो खबरें छनकर आ रही हैं, उन्होंने पूरी दुनिया के होश उड़ा दिए हैं। खबर है कि ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई अब सीधे डोनाल्ड ट्रंप से बात कर सकते हैं।
वही ट्रंप जो कल तक ईरान को मिटाने की कसमें खा रहे थे, आज ईरान की शर्तों के आगे बेबस नज़र आ रहे हैं। इस पूरे मामले में ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़िर कालिबाफ़ का नाम सबसे ऊपर है। दावा किया जा रहा है कि कालिबाफ़ ने ट्रंप से गुप्त तरीके से सीधी बात की है और समझौते का एक खाका तैयार हो चुका है।
कूटनीति की दुनिया में अक्सर जो दिखता है, वो होता नहीं। जहाँ ट्रंप मीडिया के सामने ’15 पॉइंट’ की बात कर रहे थे, वहीं पर्दे के पीछे कालिबाफ़ के ज़रिए एक बड़ा खेल खेला गया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़िर कालिबाफ़, जिन्हें सुप्रीम लीडर का बेहद करीबी माना जाता है, उनके बारे में दावा है कि ट्रंप प्रशासन से उनकी सीधी बातचीत चल रही है। ईरानी मीडिया और कुछ पश्चिमी न्यूज़ एजेंसियों के मुताबिक, कालिबाफ़ ने ट्रंप को दो-टूक कह दिया है कि अगर अमेरिका अपनी ‘सुपर पावर’ वाली हेकड़ी छोड़ दे, तो ईरान पुरानी जंग खत्म करने को तैयार है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बाकायदा मीडिया के सामने दावा किया है कि वे ईरान के एक बड़े नेता के साथ बातचीत कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में अनुमान लगाया जा रहा है कि ये बड़े नेता ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर कालिबाफ़ हो सकते हैं। कालिबाफ़ का जन्म 1961 में ईरान के तोरकाबेह शहर में हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत सेना से की और वे ईरान की वायुसेना में पायलट रह चुके हैं।
बाद में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और कई अहम पद संभाले। वे देश के पुलिस प्रमुख रहे, फिर तेहरान के मेयर बने और 2020 से ईरान की संसद के अध्यक्ष हैं। उनसे पहले यह पद अली लारीजानी के पास था। कालिबाफ़ कई बार राष्ट्रपति चुनाव भी लड़ चुके हैं, लेकिन वे जीत नहीं पाए। 2024 के चुनाव में वे तीसरे नंबर पर रहे थे, जिसमें मसूद पजेश्कियान की जीत हुई थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान से बातचीत के लिए कालिबाफ़ को एक अहम कड़ी मान रहा है। हालांकि, कालिबाफ़ ने फिलहाल कहा है कि अभी तक अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है और उन्होंने सोशल मीडिया पर ट्रंप की नीतियों पर तंज भी कसा है। लेकिन कालिबाफ़ को मुजतबा खामेनेई का बेहद करीबी माना जाता है, इसलिए उनकी भूमिका संदिग्ध और महत्वपूर्ण है। सऊदी अरब के न्यूज़ चैनल ‘अल अरबिया’ ने इज़रायली मीडिया के हवाले से बताया है कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई अमेरिका के साथ बातचीत करने और समझौता करने पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने ईरान की कुछ शर्तें रखी हैं, जिसके बाद वे जंग को जल्द खत्म करने पर राजी हुए हैं।
अमेरिका-ईरान युद्ध को खत्म कराने के लिए मध्यस्थता की कोशिशें तेज़ चल रही हैं। कई देशों के नाम सामने आए हैं, जिनमें पाकिस्तान भी शामिल है। न्यूज़ एजेंसी आईएनएस (IANS) के मुताबिक, पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने की कोशिश करता नज़र आ रहा है। वह अमेरिका और ईरान के संदेशों को एक-दूसरे तक पहुँचा रहा है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर से फोन पर बात की। व्हाइट हाउस के मुताबिक, चर्चा का मुख्य विषय ईरान युद्ध ही था।
अमेरिकी समाचार आउटलेट ‘इंटरसेप्ट’ (The Intercept) की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के अधिकारियों की इसी कड़ी में पाकिस्तान में मुलाकात संभव है। पाकिस्तान में अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच यह बैठक इसी सप्ताह हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने इस्लामाबाद द्वारा किए गए राजनयिक प्रयासों के बारे में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियान को सूचित किया है।
हालांकि ट्रंप, जो अपनी अर्थव्यवस्था को डूबते देख रहे हैं, उन्होंने इस बातचीत को लपक लिया है। ट्रंप को समझ आ गया है कि मिसाइलों से ईरान नहीं झुकेगा, इसलिए अब वे ‘सौदागर’ की भूमिका में आ गए हैं। हालांकि यह बात भी सच है कि ईरान कोई ‘खैरात’ नहीं मांग रहा, बल्कि अपनी शर्तों पर जंग खत्म करना चाहता है। ईरान ने साफ़ कर दिया है कि अगर बातचीत होगी, तो उसकी शर्तें कड़ी होंगी। ईरान की ओर से जो दावे सामने आए हैं, उनमें ट्रंप को अपने पुराने वादों पर वापस आना होगा, यानी परमाणु समझौते (JCPOA) की बहाली करनी होगी।
ईरान की डिमांड है कि उस पर लगे सारे प्रतिबंध हटाए जाएं, तेल और बैंकिंग सप्लाई पर लगे बैन तुरंत खत्म होने चाहिए। साथ ही कतर और ईरान के एनर्जी प्लांट्स को जो नुकसान हुआ है, उसका हर्जाना अमेरिका या इज़राइल को देना होगा। इसके अलावा, नेतन्याहू की ‘किलिंग मशीन’ को अमेरिका फौरन फंड देना बंद करे। ताज़ा अपडेट यह है कि ट्रंप प्रशासन इन शर्तों में से कुछ को मानने के लिए तैयार होता दिख रहा है। ट्रंप को डर है कि अगर जंग और खिंची, तो अमेरिका का दिवाला निकल जाएगा।
इस पूरे समझौते में अगर कोई सबसे ज़्यादा डरा हुआ है, तो वह है बेंजामिन नेतन्याहू। नेतन्याहू को लग रहा है कि ट्रंप उन्हें बीच मँझधार में छोड़कर ईरान से हाथ मिला लेंगे। हकीकत भी यही है; ट्रंप की नीयत हमेशा अपना फायदा देखने की रही है। नेतन्याहू ने जिस जंग को अपनी कुर्सी बचाने का ज़रिया बनाया था, आज वही जंग उनकी राजनीतिक मौत का कारण बनने वाली है। दूसरी ओर, नेतन्याहू और इज़राइल कभी नहीं चाहते कि युद्ध खत्म हो। इज़राइल के एक अधिकारी ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए कोई समझौता फिलहाल मुमकिन नहीं दिख रहा। अधिकारी के मुताबिक, ईरान अभी किसी तरह की रियायत देने के मूड में नहीं है और मौजूदा बातचीत को सिर्फ ‘वक्त हासिल करने’ की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
इज़्राइल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने भी मंगलवार को साफ़ कर दिया कि हमले रुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इज़राइल पूरी ताकत से ईरान पर हमले जारी रखे हुए है। इज़राइली सेना का कहना है कि ईरान में अभी हज़ारों टारगेट बाकी हैं और युद्ध कई हफ्तों तक जारी रह सकता है। यह रुख अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान से बिल्कुल अलग नज़र आता है, जो लगातार कह रहे हैं कि बातचीत के ज़रिए इस संघर्ष को खत्म किया जा सकता है। लेकिन ट्रंप जानते हैं कि अगर इज़राइल के चक्कर में अमेरिका की इकोनॉमी बैठ गई, तो उन्हें घर के अंदर ही विद्रोह का सामना करना पड़ेगा।
हालांकि अभी इस खबर में बहुत संशय है कि मुजतबा खामेनेई की ट्रंप से सीधी बातचीत होगी या नहीं, लेकिन अगर यह बातचीत कामयाब होती है, तो यह सदी का सबसे बड़ा ‘यू-टर्न’ होगा। सवाल वही है कि क्या अमेरिका और इज़राइल अपनी फितरत बदलेंगे? या फिर यह सिर्फ एक और कूटनीतिक चाल है? मुजतबा खामेनेई ने साफ़ कहा है कि ईरान की उंगली अब भी ट्रिगर पर है। यानी अगर ट्रंप ने धोखा दिया, तो जवाब पहले से भी ज़्यादा खौफनाक होगा।



