भागवत के बयान पर मुमताज का पलटवार, ‘भारतीय मुस्लिम के तौर पर आज भी घर ढूंढना मुश्किल’

RSS प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में दिए बयान पर कांग्रेस नेता मुमताज पटेल ने सवाल उठाए हैं... उन्होंने कहा कि देश की मौजूदा स्थिति... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में दिए गए एक बयान को लेकर कांग्रेस नेता मुमताज पटेल ने सवाल खड़े किए हैं.. मुमताज पटेल ने कहा कि देश की मौजूदा स्थिति को देखते हुए विदेश जाकर हिंदुत्व, भारतीयता.. और सभी लोगों को साथ लेकर चलने की बातें करने से ज्यादा जरूरी यह है कि.. इन्हीं बातों को भारत में भी जमीन पर लागू किया जाए.. मुमताज पटेल ने कहा कि एक भारतीय मुस्लिम के तौर पर वह यह सवाल उठाने के लिए मजबूर हैं कि अगर भारत सभी नागरिकों का देश है.. और सभी भारतीयों को बराबरी का अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए.. तो फिर देश में अल्पसंख्यकों को रोजमर्रा की जिंदगी में इस तरह की परेशानियों का सामना क्यों करना पड़ता है..

उन्होंने अपने परिवार का उदाहरण देते हुए गुजरात में किराए का घर लेने में आ रही कथित परेशानी का भी जिक्र किया.. मुमताज पटेल के मुताबिक, उनका परिवार पिछले करीब छह महीनों से किराए का एग्रीमेंट साइन कराने के लिए संघर्ष कर रहा है.. उनका कहना है कि जिस इलाके में संपत्ति है.. वह हिंदू बहुल क्षेत्र है और इसी वजह से उन्हें किराए का समझौता करने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है.. मुमताज पटेल ने कहा कि देश की स्थिति बेहद गंभीर है.. ऐसे में जब विदेश में जाकर इस तरह के बयान दिए जाते हैं.. तो उनके मुताबिक सवाल यह उठता है कि.. उन विचारों को भारत में लागू करने की कोशिश कितनी गंभीरता से की जा रही है..

उन्होंने कहा कि अगर हिंदुत्व या भारतीयता का अर्थ सभी भारतीयों को साथ लेकर चलना है.. अगर इसका मतलब यह है कि भारत में रहने वाला हर व्यक्ति बराबर है.. और यह देश सभी का है.. तो इसकी असली परीक्षा विदेश में नहीं.. बल्कि भारत में होनी चाहिए। मुमताज पटेल ने कहा कि वह एक भारतीय मुस्लिम के तौर पर यह बात दोबारा कहना चाहती हैं कि.. भारत में आज भी मुसलमानों के लिए घर ढूंढना कई जगहों पर मुश्किल है.. और उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक बहस का विषय नहीं है.. बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा सवाल है..

आपको बता दें कि उन्होंने मोहन भागवत का जिक्र करते हुए कहा कि अगर वह वास्तव में यह संदेश देना चाहते हैं कि भारत सभी भारतीयों का देश है.. तो उन्हें गुजरात आकर भी जमीनी स्थिति को देखना चाहिए.. मुमताज पटेल ने कहा कि गुजरात में उनके अपने परिवार को किराए का समझौता करने में परेशानी हो रही है.. उनके मुताबिक, पिछले छह महीनों से परिवार इस प्रक्रिया को पूरा करने की कोशिश कर रहा है.. लेकिन अब तक यह संभव नहीं हो पाया है.. उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक परिवार को सिर्फ इसलिए किराए का घर लेने में दिक्कत का सामना करना पड़े कि संपत्ति हिंदू बहुल इलाके में है.. तो ऐसे में समानता और भाईचारे की बातों का जमीन पर क्या असर रह जाता है..

मुमताज पटेल ने कहा कि इस तरह की घटनाएं सिर्फ किसी एक परिवार तक सीमित नहीं हैं.. उनके मुताबिक, देश के अलग-अलग हिस्सों में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को घर किराए पर लेने.. संपत्ति खरीदने और कई बार अपनी पसंद के इलाके में रहने को लेकर भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.. उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति को बार-बार उसकी पहचान के आधार पर यह महसूस कराया जाता है.. कि वह किसी खास इलाके में आसानी से नहीं रह सकता.. तो इससे उसके मन में असुरक्षा की भावना पैदा होती है..

मुमताज पटेल ने आगे कहा कि ऐसी रोजमर्रा की परेशानियां और अल्पसंख्यकों के साथ होने वाला कथित भेदभाव बार-बार यह महसूस कराता है कि शायद यह देश उनका नहीं है.. और उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए यह स्थिति चिंता का विषय होनी चाहिए.. उन्होंने कहा कि अगर किसी नेता या संगठन की ओर से यह कहा जाता है कि सभी भारतीय एक हैं.. तो इस संदेश को केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए.. इसे लोगों के अनुभव में भी दिखाई देना चाहिए..

मुमताज पटेल ने मोहन भागवत के विदेश में दिए गए बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर इस तरह की बातें विदेश में कही जा रही हैं.. तो उससे पहले यह देखना जरूरी है कि भारत में रहने वाले अल्पसंख्यक नागरिक उन बातों को अपनी जिंदगी में कितना महसूस कर पा रहे हैं.. उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले लोगों के लिए यह ज्यादा महत्वपूर्ण है कि उन्हें अपने घर, नौकरी, शिक्षा.. और रोजमर्रा की जिंदगी में बराबरी का व्यवहार मिले.. उनके मुताबिक, केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि सभी भारतीय समान हैं.. लोगों को यह समानता व्यवहार में भी महसूस होनी चाहिए..

 

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