लखीमपुर में बाघ की रहस्यमयी मौत, पोस्टमार्टम के लिए IVRI भेजा गया शव
लखीमपुर खीरी के महेशपुर क्षेत्र में एक बाघ मृत मिला। वन विभाग ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए IVRI बरेली भेज दिया है। मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद होगा।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के दक्षिण खीरी क्षेत्र से मंगलवार सुबह वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई। महेशपुर क्षेत्र में एक बाघ मृत अवस्था में मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई करते हुए बाघ के शव को अपने कब्जे में ले लिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मृत मिला यही बाघ सोमवार को एक किसान पर हमले की घटना से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि, इसकी पुष्टि और अन्य तथ्यों की जांच वन विभाग द्वारा की जा रही है।
महेशपुर क्षेत्र में मिला बाघ का शव
मंगलवार सुबह स्थानीय लोगों ने महेशपुर क्षेत्र में बाघ का शव देखा, जिसके बाद इसकी सूचना वन विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही विभागीय अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे तथा घटनास्थल का निरीक्षण किया। वन विभाग ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए बाघ के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया पूरी की।
पोस्टमार्टम के लिए IVRI बरेली भेजा गया शव
वन विभाग ने बाघ के शव को भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली भेज दिया है। विशेषज्ञों की निगरानी में पोस्टमार्टम किया जाएगा, जिससे मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बाघ की मौत किन परिस्थितियों में हुई।
किसान पर हमले से जोड़ा जा रहा है मामला
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, सोमवार को एक किसान पर हुए हमले के मामले में इसी बाघ का उल्लेख किया जा रहा था। हालांकि, वन विभाग पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहा है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई
वन विभाग का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यदि किसी प्रकार की असामान्य परिस्थिति सामने आती है तो उसकी भी विस्तृत जांच कराई जाएगी। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि संरक्षित वन्यजीवों की मौत के प्रत्येक मामले की वैज्ञानिक जांच आवश्यक होती है, ताकि वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए उचित कदम उठाए जा सकें।
रिपोर्ट – प्रभाकर श्रीवास्तव
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