बिजली विभाग की लापरवाही से लोगों को लग रहा झटका

बिजली मीटर की रीडिंग लेने नहीं आ रहा रीडर

3-3 महीने का बिल एक साथ भेज बिगाड़ रहा उपभोक्त ाओं का बजट
शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेते अधिकारी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। आजकल यूपी केलोग बिजली कटौती व बढ़े बिलको लेकर ही परेशान नही हैं वे इसलिए भी बिजली विभाग के शोषण के शिकार हो रहे क्योंकि उन्हें समय से बिजली बिल नहीं मिल रहा है। बिल भी ऐसा मिल रहा है कि आम उपभेक्ताओं का बजट बिगाड़ दे रहा है।
बिजली का बिल समय पर मिले, मीटर की सही रीडिंग दर्ज हो और उपभोक्ता को जितनी बिजली इस्तेमाल की है, उतने की ही राशि का भुगतान करना पड़े-यह हर बिजली उपभोक्ता की सामान्य अपेक्षा है। लेकिन कई उपभोक्ताओं की शिकायतें ऐसी हैं, जो बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। कई इलाकों में उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली मीटर की रीडिंग लेने के लिए विभाग का कर्मचारी समय पर नहीं पहुंचता। मीटर घर के बाहर लगा हो या परिसर में, रीडिंग लेने की व्यवस्था नियमित दिखाई नहीं देती। ऐसे में उपभोक्ता खुद मीटर की रीडिंग लेकर विभाग तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनकी शिकायत है कि रीडिंग देने के बावजूद समय पर बिल जनरेट नहीं होता।

शिकायत करने के बाद विभाग की ओर से अनदेखी

सबसे बड़ी परेशानी तब सामने आती है, जब लंबे समय तक बिल नहीं आता और शिकायत करने के बाद विभाग की ओर से दो या तीन महीने की खपत का बिल एक साथ भेज दिया जाता है। जिस बिजली का भुगतान उपभोक्ता हर महीने थोड़ा-थोड़ा करके आसानी से कर सकता था, वही रकम एक साथ आने पर परिवार के बजट पर भारी पडऩे लगती है।

ये लापरवाही है या व्यवस्था की कोई कमी?

यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मीटर की रीडिंग समय पर क्यों नहीं ली जा रही? यदि विभाग के पास उपभोक्ता की मीटर रीडिंग उपलब्ध नहीं हो पा रही है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? और यदि उपभोक्ता स्वयं रीडिंग उपलब्ध करा रहा है, तो उसके आधार पर समय पर बिल क्यों नहीं बन रहा?इन सवालों का जवाब बिजली विभाग को देना चाहिए। यह भी जांच का विषय है कि कहीं रीडिंग लेने, बिल बनाने और उसे उपभोक्ता तक पहुंचाने की प्रक्रिया में कोई तकनीकी या प्रशासनिक गड़बड़ी तो नहीं है। बिना ठोस प्रमाण के किसी तरह के भ्रष्टाचार या खेल का आरोप लगाना उचित नहीं होगा, लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों की निष्पक्ष जांच जरूर होनी चाहिए।

एक साथ बिल भेजना उपभोक्ता को देता है तनाव

मान लीजिए किसी परिवार का सामान्य बिजली बिल हर महीने 1,5०० रुपये आता है। यदि तीन महीने तक नियमित बिल नहीं आता और अचानक 4,5०० रुपये का बिल भेज दिया जाता है, तो मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवार के लिए यह रकम अचानक जुटाना मुश्किल हो सकता है।समस्या सिर्फ रकम की नहीं है। कई बार लंबे अंतराल के बाद बिल आने पर उपभोक्ता को यह समझना भी मुश्किल हो जाता है कि किस महीने कितनी यूनिट खपत हुई और किस आधार पर बिल तैयार किया गया।ऐसे में विभाग को उपभोक्ताओं को स्पष्ट विवरण देना चाहिए और यदि देरी विभागीय स्तर पर हुई है, तो उसका आर्थिक बोझ सीधे उपभोक्ता पर नहीं पडऩा चाहिए।

उपभोक्ताओं की गुहार

मीटर की रीडिंग समय पर और नियमित रूप से ली जाए। उपभोक्ता द्वारा दी गई मीटर रीडिंग को रिकॉर्ड में शामिल करने की व्यवस्था सरल हो।रीडिंग लेने के बाद बिल समय पर जनरेट हो।लंबे अंतराल के बाद बिल भेजने की स्थिति में उपभोक्ता को स्पष्ट कारण बताया जाए। गलत या अनावश्यक रूप से बढ़े हुए बिल की शिकायत का समयबद्ध निस्तारण हो।विभागीय देरी के कारण एक साथ भारी बिल आने पर उपभोक्ता को उचित राहत और भुगतान विकल्प दिए जाएं।बिजली उपभोक्ता अपना बिल देने से पीछे नहीं हटता। वह सिर्फ इतना चाहता है कि उसे सही मीटर रीडिंग के आधार पर समय पर और पारदर्शी बिल मिले। अगर विभाग का कर्मचारी रीडिंग लेने नहीं आता, उपभोक्ता खुद रीडिंग देने की कोशिश करता है और फिर भी समय पर बिल नहीं बनता, तो यह निश्चित रूप से व्यवस्था की गंभीर समस्या है।

रीडिंग की पारदर्शी व्यवस्था नहीं?

आज जब तकनीक के माध्यम से बिजली मीटर की रीडिंग, बिलिंग और भुगतान की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया जा सकता है, तब भी यदि उपभोक्ता को बार-बार बिजली विभाग के कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ें, तो यह व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।

कर्नाटक में दो हादसों में सात की मौत

फ्रिज फटने से चार लोगों ने गंवाई जान, दूध टैंकर की टक्कर में तीन की मौत
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
बंगलूरू। कर्नाटक में मंगलवार को दो अगल-अलग घटनाओं में सात लोगों की मौत हो गई। पहली घटना रेफ्रि जरेटर फटने से हुई है। वहीं, दूसरी घटना दूध के टैंकर ने पीछे से एक मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। पुलिस ने मंगलवार को बताया कि बेलगावी एक घर में कथित तौर पर रेफ्रिजरेटर फटने से एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई। वहीं, दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्होंने बताया कि यह घटना सोमवार देर रात चावत गली में घटी।
पुलिस ने बताया कि मृतकों की पहचान गजानन धमोणे (65), रोशन धमोणे (21), शारदा धमोणे (45) और भारती धमोणे (5०) के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि इस घटना में प्रिया धामोने (28) और गंगा धामोने (25) गंभीर रूप से घायल हो गईं और उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। वहीं, मांड्या जिले में मंगलवार तडक़े एक दूध के टैंकर ने पीछे से एक मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी, जिससे एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई, जिनमें एक नौ वर्षीय बच्ची भी शामिल थी। पुलिस ने बताया कि यह दुर्घटना मांड्या जिले के मद्दूर तालुक के अंतर्गत कोप्पा पुलिस स्टेशन क्षेत्र में सुबह 5.3० बजे से 6 बजे के बीच हुई।

बंगाल में उपचुनाव, तेज हुआ सियासी टकराव

कांग्रेस ने ममता बनर्जी को दिया झटका

उपचुनाव में गठबंधन के लिए दीदी की पार्टी का प्रस्ताव ठुकराया
भाजपा ने भी साधे टीएमसी पर निशाने

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में उपचुनाव से पहले एक बार फिर से सियासत गरमा गई है। जहंा टीएमसी व भाजपा में टकराव जारी है। पर अब एक नई टकराहट देखने को मिली रही है इसबार इसकी वजह बीजेपी नहीं है बल्कि इंडिया गठबंधन के ही दो पार्टनर टीएमसी और कांग्रेस है। दरअसल, टीएमसी ने कांग्रेस को उपचुनाव में गठबंधन का प्रस्ताव दिया जिसे कांग्रेस ने सीधे ठुकरा दिया। अब देखने वाली बात होगी कि बंगाल की राजनीति किस ओर करवट लेती है। वहीं एक नजारा और देखने को मिल रहा है कि टीएमसी के बागी गुट वाले पूर्व सीएम ममता बनर्जी के लिए अपनी सीट छोडऩें को तैयार भी हो गए हैं।
बंगाल में होने वाले उपचुनावों के लिए टीएमसी के ममता बनर्जी गुट ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करने की कोशिश की, लेकिन कांग्रेस के अकेले चुनाव लडऩे के फैसले के कारण यह कोशिश कामयाब नहीं हो सकी। टीएमसी ने नंदीग्राम और रेजीनगर में अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान तब किया, जब कांग्रेस पहले ही अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुकी थी।
टीएमसी ने उपचुनावों में तालमेल बिठाने के लिए कांग्रेस से संपर्क किया था। प्रस्ताव यह था कि कांग्रेस नंदीग्राम से चुनाव लड़े और तृणमूल रेजीनगर से। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि बंगाल कांग्रेस इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं हुई क्योंकि वह राज्य में अपना आधार फिर से मजबूत करना चाहती है और अभी गठबंधन करने से यह प्रक्रिया कमजोर पड़ सकती है।

प. बंगाल उपचुनाव 2 सीटों पर

पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर 26 को उपचुनाव होने वाला है। वहीं, 9 अक्टूबर 26 को काउंटिंग होगी। इस चुनाव में बीजेपी और टीएमसी के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि लगभग साढ़े 4 महीने बाद बंगाल में सियासी माहौल बदला है या नहीं।

नंदीग्राम से शुभेंदु अधिकारी तो रेजीनगर से हुमायूं कबीर ने दिया इस्तीफा

बता दें कि पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट से मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस्तीफा दिया था। वह कोलकाता के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से भी निर्वाचित हुए थे। वहीं, मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर सीट से आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर ने चुनाव जीता था। उन्होंने नोदा विधानसभा सीट से भी चुनाव जीता था। बाद में उन्होंने रेजीनगर से इस्तीफा दे दिया था और नोदा विधानसभा के जनप्रतिनिधि के रूप में शपथ ली थी।

गुरुग्राम हिट एंड रन केस का आरोपी गिरफ्तार राजस्थान से पकड़ा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड पर महिला बाइक राइडर को कार से टक्कर मारने के मामले में पुलिस ने आरोपी कल्याण बैसला को राजस्थान के दौसा से हिरासत में ले लिया है। आरोपी को पकडऩे के लिए गुरुग्राम पुलिस की एक टीम राजस्थान पहुंची थी। फिलहाल पुलिस आरोपी को दौसा से गुरुग्राम लेकर आएगी। इसके बाद उससे पूरे मामले को लेकर पूछताछ की जाएगी।
दरअसल, रविवार 13 सितंबर की सुबह गोल्फ कोर्स रोड पर महिला बाइक राइडर को कार से टक्कर मारने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद गुरुग्राम पुलिस ने मामले का खुद से संज्ञान लिया और थाना सेक्टर-56 में केस दर्ज किया इसके बाद पुलिस ने आरोपी की पहचान और उसे पकडऩे के लिए जांच तेज कर दी थी।

पुलिस ने घटनास्थल के साथ-साथ आसपास लगे सीसीटीव कैमरों की फुटेज भी खंगाली। वायरल वीडियो और सीसीटीव फुटेज की बारीकी से जांच की गई। जांच के आधार पर पुलिस ने मामले में हत्या के प्रयास की धारा 1०9 बीएनएस भी जोड़ दी. इसके बाद आरोपी की तलाश में पुलिस की टीम राजस्थान पहुंची और दौसा से कल्याण बैसला को हिरासत में ले लिया। सिया स्पोट्र्स बाइक राइडर हैं और रविवार सुबह अपने दोस्तों के साथ राइड पर निकली थीं. आरोप है कि गोल्फ कोर्स रोड पर कार सवार युवक ने उन्हें रुकने का इशारा किया. जब सिया नहीं रुकीं तो कार चालक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।

बिहार में दारोगा भर्ती को लेकर पटना में बवाल

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
पटना । बिहार दरोगा भर्ती, बीपीएससी 7०वीं परीक्षा समेत 13 सूत्री मांगों को लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों ने मंगलवार को पटना में जमकर प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्र गांधी मैदान से राजभवन मार्च के लिए निकले, लेकिन जेपी गोलंबर के पास पटना पुलिस और सीआरपीएफ की टीम ने उन्हें रोक दिया।
पुलिस की ओर से बैरिकेडिंग लगाए जाने के बाद कुछ छात्र उस पर चढ़ गए और नारेबाजी करने लगे। इससे मौके पर कुछ देर के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई। गांधी मैदान से राजभवन की ओर बढ़ रहे छात्र-अभ्यर्थियों को जेपी गोलंबर के पास पुलिस ने आगे जाने से रोक दिया। मौके पर पटना पुलिस के साथ सीआरपीएफ की टीम भी तैनात थी। पुलिस की बैरिकेडिंग के बावजूद कुछ छात्र उस पर चढ़ गए और सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे। इसके बाद कुछ छात्र एग्जीबिशन रोड के रास्ते डाक बंगला चौराहे की ओर बढऩे लगे। हालांकि यहां भी पुलिस टीम ने उन्हें रोक लिया। पुलिस ने छात्रों को आगे बढऩे से रोकने के लिए बैरिकेडिंग कर रखी थी। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि 1799 पदों पर हुई दरोगा भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी हुई थी। इस मामले की जांच आर्थिक अपराध इकाई यानी ईओयू कर रही है, लेकिन अब तक परीक्षा रद्द नहीं की गई है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि जब परीक्षा में गड़बड़ी की जांच चल रही है तो इसे रद्द कर दोबारा परीक्षा कराई जानी चाहिए। छात्रों ने बीपीएससी 7० वीं परीक्षा को लेकर भी सवाल उठाए।
उनका कहना है कि इस परीक्षा में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ है, लेकिन इसके बावजूद परीक्षा को रद्द नहीं किया जा रहा है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि बीएसएससी की परीक्षा भी नहीं हो रही है।

यूसीसी को लेकर बिहार में रार, राजद ने दिया जदयू को ऑफर

भाई वीरेंद्र बोले- भाजपा को लात मारें, साथ मिलकर बनाएं सरकार

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
पटना। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर जारी सियासी घमासान के बीच राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने जदयू को बड़ा ऑफर दे दिया है। जदयू को उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि आइए, हम और आप मिलकर बिहार में नई सरकार बनाएं और भाजपा जैसी क थित सांप्रदायिक दलों से राज्य की जनता को मुक्ति दिलाएं।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार वैसे लोगों को छोड़ें। धर्मििरपेक्ष राज्य है, यहां सभी को अपना-अपना धर्म मानने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि नीतीश के साथ कुछ ऐसे लोग लगे हुए हैं जो बर्बाद कर रहे हैं। सामाजिक न्याय वाले लोग साथ आएं, भाजपा को लात मारें। इस संदर्भ में जब राजद के शीर्ष नेतृत्व से बात हुई तो उन्होंने गठबंधन के लिए स्पष्ट रूप से कुछ तो नहीं कहा, लेकिन यूसीसी पर एनडीए, विशेषकर भाजपा से उनका मतभेद उभरकर सामने आ गया।
राजद नेतृत्व का कहना है कि भाजपा तत्कालिक और महत्वपूर्ण मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए यूसीसी जैसे मुद्दे उछालती रही है। बिहार की प्रकृति सर्वधर्म समभाव और सामाजिक सौहाद्र्र की रही है। यहां विभाजनकारी शक्तियिों के मंसूबे कभी फलीभूत नहीं हुए और आगे भी नहीं होंगे। सभी धर्म-संंप्रदाय को राजद बराबर की दृिष्ट से देखता है, और सामाजिक विभाजन के किसी भी प्रयास का विरोध करेगा। उल्लेखनीय है कि बिहार में जदयू के साथ राजद दो बार सत्ता की साझेदारी कर चुका है। वह दोनों दौर मिलाकर लगभग तीन वर्षों की साझेदारी रही है, लेकिन उस दौरान दोनों के अंतर्भेद सार्वजनिक हुए हैं।
और कई एक मुद्दों पर मतभेद इतना गहरा हुआ किसरकार परिवर्तन की नौबत आ गई। दोनों बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रहे हैं और जब-जब सत्ता परिवर्तन हुआ, तब-तब वे भाजपा के पाले में आए। उन्होंने कहा है किराजद के गठबंधन कर बिहार में सरकार बनाएं।

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