बच्चों में बढ़ते मायोपिया पर लगेगी लगाम, लाल रोशनी थेरेपी से इलाज की नई उम्मीद

गोरखपुर में मित्तल आई हॉस्पिटल ने 'मिशन रीस्टोर' के तहत बच्चों में बढ़ते मायोपिया को नियंत्रित करने के लिए रेड लाइट थेरेपी शुरू की। नि:शुल्क शिविर में 150 बच्चों की जांच हुई, जिनमें 30% में दृष्टि दोष मिला।

4पीएम न्यूज नेटवर्क:  बच्चों में लगातार बढ़ रहे निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) को लेकर विशेषज्ञ लंबे समय से चिंता जता रहे हैं। बढ़ता स्क्रीन टाइम, मोबाइल और टैबलेट का अधिक इस्तेमाल तथा आउटडोर गतिविधियों में कमी इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। ऐसे में गोरखपुर से बच्चों की आंखों की सुरक्षा के लिए एक नई पहल सामने आई है।

मिशन रीस्टोर के तहत शुरू हुई रेड लाइट थेरेपी

मित्तल आई हॉस्पिटल की 10वीं वर्षगांठ पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने ‘मिशन रीस्टोर’ अभियान का शुभारंभ किया। इस अभियान के तहत बच्चों को विजन थेरेपी के साथ रेड लाइट (लाल रोशनी) थेरेपी की सुविधा भी दी जाएगी। बाल नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित मित्तल के अनुसार, नियंत्रित लाल रोशनी पर आधारित यह तकनीक बच्चों में मायोपिया की बढ़ती रफ्तार को कम करने में सहायक मानी जा रही है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में यह सुविधा उपलब्ध कराने वाली पहली मशीन मित्तल आई हॉस्पिटल में स्थापित की गई है।

नि:शुल्क शिविर में 150 बच्चों की हुई जांच

अभियान के तहत आयोजित नि:शुल्क नेत्र जांच शिविर में करीब 150 बच्चों की आंखों की जांच की गई। इनमें लगभग 30 प्रतिशत बच्चों में किसी न किसी प्रकार का दृष्टि दोष पाया गया। वहीं, मात्र 13 दिन के एक शिशु की आंखों में भी समस्या की पहचान हुई। शिविर में भेंगापन, लेज़ी आई सहित अन्य नेत्र रोगों की जांच कर जरूरतमंद बच्चों को उपचार और परामर्श दिया गया।

red light therapy myopia

विशेषज्ञों ने अभिभावकों को दी यह सलाह

नेत्र विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अनावश्यक मोबाइल और गैजेट्स से दूर रखें। साथ ही स्क्रीन टाइम सीमित करें, पर्याप्त रोशनी में पढ़ाई कराएं, बीच-बीच में आंखों को आराम दें, नियमित रूप से बाहर खेलने के लिए प्रेरित करें और समय-समय पर आंखों की जांच जरूर कराएं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते जांच और सही उपचार से बच्चों की दृष्टि को बेहतर तरीके से सुरक्षित रखा जा सकता है।

रिपोर्ट – अमरेंद्र पांडे, गोरखपुर

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