तेल, ताकत और टकराव बढ़ा तनाव

- भारत में गैस की किल्लत की आहट, आसमान में आफत
- कटते सर, गिरती लाशें, महंगी होती दुनिया
- जंग में अगले 48 घंटे अतिमहत्वपूर्ण
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। आसमान में चमकती आग की लकीरें और जमीन पर उठते धुएं के गुबार इस बात का संकेत हैं कि दुनिया के सबसे विस्फोटक इलाकों में शुमार होने वाला मध्य पूर्व का इलाका एक बार फिर युद्ध की लपटों में घिरता जा रहा है। ईरान—अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ता सैन्य टकराव अब सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं रह गया है। बल्कि यह तेल ताकत और वैश्विक राजनीति की ऐसी जंग बनता जा रहा है जिसका असर पूरी दुनिया महसूस कर रही है। भारत भी जंग के असर से अछूता नहीं है और महंगाई के तौर पर जंग का एक बड़ा वार भारत की ओर बढ़़ रहा है। गैस के दाम बढ़ाये जा चुके हैं, पेट्रोल प्राइस हाइक के साथ दूसरी अन्य चीजों के भाव बढ़ने की लोगों के बीच अशांकाए तेजी से फैल रही है।
सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं युद्ध
युद्ध के मैदान में गिरती लाशें सिर्फ दो देशों की त्रासदी नहीं हैं। यह उस दुनिया की कहानी भी है जहां हर मिसाइल के साथ तेल की कीमतें बढ़ती हैं हर धमाके के साथ बाजार हिलता है और हर तनाव का असर लाखों करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। मिडिल ईस्ट की इस आग ने एक बार फिर यह याद दिला दिया है कि आधुनिक युद्ध सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहते। उनका धुआं बहुत दूर तक फैलता है। इतना दूर कि उसकी तपिश दुनिया के हर कोने तक महसूस होने लगती है।
कच्चे तेल की कीमतें 100 डालर के पार
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है और कई बाजारों में कीमतें 100 डालर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध या संघर्ष की स्थिति में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ जाती है जिससे बाजार में कीमतें तेजी से ऊपर जा सकती हैं। अगर तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो तेल की कीमतों में और बढ़ोत्तरी की संभावना भी जताई जा रही है। इसका असर पेट्रोल, डीजल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
और फैलता जा रहा युद्ध
इस संघर्ष में दोनों पक्षों की सैन्य ताकत खुलकर सामने आ रही है। मिसाइल हमले ड्रोन स्ट्राइक और जवाबी कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र को तनाव के घेरे में ला दिया है। ईरान के ताबड़तोड़ हमलों ने पूरे इलाके में दहशत का महौल बना दिया है। कतर, बहरीन, दुबई और सउदी अरब में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान की ओर से खुलकर अटैक किये जा रहे हैं। बीती रात बहरीन स्थित एक अमरीकी सैन्य ठिकानें पर कि गयी कार्रवाई में अमरीकी सैनिकों के मारे जाने की खबरें भी आई हैं। वहीं सउदी अरब ने रूस से अपील की है कि वह ईरानी हमलों को रोकने के लिए ईरान से बात करे जिसे रूस ने ठुकरा दिया है। बदले में आज तड़के अमरीकी जंगी जहाजों में ईरान के मशहद में बमों की बारिश की जिससे सहरी करते ईरानी सहम गये और बड़ी तादात में लोगों के मारे जाने की खबरें है। हर घंटे अटैक जारी है और सायरन की आवाजों ने सम्पूर्ण इलाके में दहशत को और ज्यादा खतरनाक बना दिया है।
ड्रोन की दहशत
मिसाइलों और ड्रोन से हो रहे हमलों ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। सीमाओं के पार से दागे जा रहे हथियार और लगातार हो रहे जवाबी हमले इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि हालात तेजी से नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं। कई शहरों में सायरन बज रहे हैं लोग बंकरों में छिपने को मजबूर हैं और सैन्य ठिकानों पर हमलों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष अब उस मोड़ पर पहुंच गया है जहां हर फैसला अगले बड़े कदम की दिशा तय करेगा। यही वजह है कि सैन्य विश्लेषक बार-बार कह रहे हैं कि अगले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। अगर इन घंटों में हमलों की तीव्रता बढ़ती है तो यह जंग और भी व्यापक रूप ले सकती है।
मिडिल ईस्ट उर्जा नक्शे का केन्द्र बिंदू
इस युद्ध का सबसे बड़ा असर केवल युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं है। मिडिल ईस्ट दुनिया के ऊर्जा नक्शे का केंद्र है। और यही कारण है कि यहां की हर हलचल वैश्विक बाजारों को झकझोर देती है। तेल के कुएं समुद्री व्यापार मार्ग और ऊर्जा आपूर्ति की धमनियां इसी क्षेत्र से होकर गुजरती हैं। अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसकी कीमत पूरी दुनिया को चुकानी पड़ सकती है। तेल की कीमतों में तेजी से उछाल। गैस की आपूर्ति पर बढ़ता दबाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता यह सब संकेत दे रहे हैं कि जंग का असर आम लोगों की जेब तक पहुंचने वाला है। पेट्रोल-डीजल से लेकर रसोई गैस तक हर चीज की कीमत पर इसका असर पडऩा शुरू हो गया है।
एलपीजी कीमतों पर ममता बनर्जी का हमला
रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोत्तरी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एलपीजी की कीमतों में वृद्धि को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। उनके अनुसार रसोई गैस जैसी जरूरी चीजों के महंगे होने से घर का बजट बिगड़ जाता है। ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि सरकार को आम लोगों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
भारत ने कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कच्चे तेल की खरीद को विविध स्रोतों से बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता को देखते हुए सरकार और तेल कंपनियां अन्य देशों से आयात बढ़ाने की दिशा में काम कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत पहले से ही कई देशों से कच्चा तेल खरीदता है लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए आयात के स्रोतों को और संतुलित करने की कोशिश की जा रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अगर किसी क्षेत्र में आपूर्ति प्रभावित होती है तो देश की ऊर्जा जरूरतों पर ज्यादा असर न पड़े। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल उपभोक्ता देशों में से एक है और अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर सीधे देश की अर्थव्यवस्था और ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है।
एयर इंडिया की अतिरिक्त उड़ानें
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और यात्रा संबंधी जरूरतों को देखते हुए एयर इंडिया ने कई अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर अतिरिक्त उड़ानों की घोषणा की है। कंपनी ने नौ मार्गों पर कुल 78 अतिरिक्त उड़ानें संचालित करने का फैसला किया है। एयरलाइन के अनुसार इसका उद्देश्य यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना और संभावित भीड़ को संभालना है। क्षेत्रीय तनाव के दौरान एयरलाइंस को अपने रूट और सेवाओं में बदलाव करना पड़ता है ताकि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित की जा सके।




