लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है विपक्ष, लगाए गंभीर आरोप

विपक्षी पार्टियां लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही हैं। समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि लोकसभा स्पीकर सदन में पक्षपात करते हैं। विपक्ष ने यह आरोप ऐसे समय लगाया है, जब विपक्ष आरोप लगा रहा है कि राहुल गांधी को संसद में बोलने नहीं दिया जा रहा है। इस मुद्दे पर संसद में बीते कई दिनों से हंगामा हो रहा है। लोकसभा स्पीकर के खिलाफ विपक्ष में नाराजगी बढ़ने की एक अन्य वजह उनका एक बयान है, जिस पर भी खासा विवाद हो रहा है।
राहुल गांधी को बोलने से रोकने का आरोप
लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बोलते हुए राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के एक अप्रकाशित संस्मरण का हवाला देते हुए चीन से टकराव के मुद्दे पर गंभीर आरोप लगाए थे और दावा किया कि डोकलाम में चीनी टैंक घुस आए थे। हालांकि सरकार ने इन्हें खारिज कर दिया था। जिसके बाद स्पीकर ने राहुल गांधी को बोलने से रोक दिया, जिस पर हंगामा हुआ।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि लोकसभा में उन्हें बोलने से रोकना परंपरा का उल्लंघन है और साथ ही यह गंभीर चिंता भी पैदा करता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर बोलने से रोका जा रहा है।
विपक्षी सांसदों ने इस मुद्दे पर खासा हंगामा किया और हंगामे के दौरान विपक्षी सांसदों ने आसन की तरफ कागज उछाले, जिसके बाद आठ विपक्षी सांसदों को सदन की अवमानना के आरोप में पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया।
लोकसभा स्पीकर के बयान पर हुआ विवाद
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बीते गुरुवार को एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने कल (बुधवार) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में आने से रोका था। बिरला ने आशंका जताई कि अगर प्रधानमंत्री सदन आते तो उनके साथ कोई अप्रत्याशित और अप्रिय घटना घट सकती थी।
प्रधानमंत्री मोदी को बुधवार को लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देना था, लेकिन आखिरी समय पर उनका संबोधन टाल दिया गया।
इसके अगले दिन स्पीकर ओम बिरला ने बताया, ‘मेरे पास जानकारी आई कि कांग्रेस के सांसद पीएम के आसन पर जाकर अप्रत्याशित घटना कर सकते थे। मुझे डर था कि प्रधानमंत्री के साथ कुछ भी हो सकता है। अगर वह घटना हो जाती, तो वह बेहद अप्रिय होती और लोकतंत्र के लिए काला दिन साबित होती।’ इस बयान पर खासा विवाद हुआ और विपक्षी सांसदों ने इसकी कड़ी आलोचना की।



