राम मंदिर दान चोरी प्रकरण पर पूरे देश में शुरू होगा विपक्ष का रण

  • ट्रस्ट भंग कर शंकराचार्यो को मिले जिम्मेदारी: विपक्ष
  • सारे दल करेंगे प्रदर्शन
  • रघुपति राघव राजा राम सत्याग्रह से आज से होगी शुरुआत
  • ट्रस्ट की बैठक, निर्णयों और नियुक्तियों को विपक्ष मान रहा है लीपा पोती

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। आखिरकार चंपत राय और अनिल मिश्रा को इस्तीफा देना ही पड़ा। दबाव भरे माहौल में आहूत मंदिर ट्रस्ट की बैठक में डैमेज कंट्रोल करने की सभी कोशिशें की गयी। ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को बुलाई गयी है जिसमें ट्रस्ट के भीतर सीईओ की नियुक्ति की जाएगी। सीईओ बनाने के लिए तीन सदस्य कमेटी का अलग से गठन किया है। कमेटी सीईओ के नाम की घोषणा करेगी।
वहीं चंपत राय की जगह कृष्ण मोहन का ट्रस्ट का नया कार्यवाहक महासचिव बनया गया है। उनकी टीम चंपत राय की जगह लेगी। कुल मिलाकर मंदिर दान चोरी प्रकरण में ट्रस्ट की जिस बैठक का इंतजार लंबे समय से किया जा रहा था वह सम्पन्न हो चुकी है। दान चोरी मामले में पकड़े गये लोगों से पूछताछ जारी है। उम्मीद है कि ट्रस्ट की अगली बैठक से पहले एसआईटी अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक कर दे। वहीं ट्रस्ट की बैठक के बाद वह राजनीतिक पार्टियां जो मौजूदा समय में विपक्ष में है के तेवर सांतवे आसमान पर पहुंच चुके हैं। विपक्षी राजनीतिक पार्टियां ट्रस्ट की बैठक को लीपा पोती बता रही है और बड़े सियासी लोगों को बचाने की नजर से देख रही है। विपक्ष का कहना है कि सीबीआई जांच हो और राम मंदिर ट्रस्ट भंग कर नई व्यवस्था बनाई जाए जिसमें शंकराचार्यों और अयोध्या के प्रतिनिधियों को जिम्मेदारी मिलनी चाहिए।

राम मंदिर ट्रस्ट भंग कर नई व्यवस्था बनाई जाए

ट्रस्ट में बड़े बदलाव हो चुके हैं। महासचिव बदल चुके हैं जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण हो रहा है और जांच अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रही है। लेकिन विपक्ष कह रहा है कि यह पर्याप्त नहीं है। कांग्रेस के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने मांग उठाई है कि मौजूदा ट्रस्ट को भंग कर नई व्यवस्था बनाई जाए जिसमें शंकराचार्यों और अयोध्या के प्रतिनिधियों को प्रमुख जिम्मेदारी दी जाए। इससे पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। यहीं से शुरू होती है असली राजनीतिक लड़ाई। क्या यह केवल जवाबदेही की मांग है? क्या यह प्रशासनिक सुधार का प्रस्ताव है? या फिर आस्था के सबसे बड़े प्रतीक पर राजनीतिक वर्चस्व की नई जंग? देश देख रहा है कि एक ओर सरकार और ट्रस्ट बदलावों के जरिए भरोसा बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं तो दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि केवल चेहरे बदलने से काम नहीं चलेगा व्यवस्था बदलनी होगी। सड़कों पर प्रदर्शन हो रहे हैं बयान तेज हो रहे हैं और अदालत में जांच से जुड़े मामले आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल राजनीति से भी बड़ा है और वह यह है कि जिस राम मंदिर को करोड़ों श्रद्धालुओं ने वर्षों की प्रतीक्षा और बड़े संघर्ष कर बनाया वहां दान चोरी जैसी घटनाओं से उन्हें आघात पहुंचा है सवाल यही है कि क्या भक्तों का विश्वास पुन: इस बात को लेकर बहाल हो जाएगा कि फिर से इस तरह की कोई घटना अस्त्तिव में न आये।

अजय राय के आरोप

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने राम मंदिर चढ़ावा विवाद अग्निवीर योजना भाजपा और उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि ट्रस्ट से जुड़े हालिया घटनाक्रम के बाद लोगों का विश्वास प्रभावित हुआ है। संबंधित पदाधिकारी का इस्तीफा स्वीकार किया जाना इस बात का संकेत है कि मामले में गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में कई लोग शामिल हैं और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अजय राय ने कहा है कि हमारी पार्टी को मौजूदा ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भरोसा नहीं है। हमारी मांग है कि राम मंदिर ट्रस्ट को भंग कर नई व्यवस्था बनाई जाए जिसमें चारों पीठों के शंकराचार्यों, प्रमुख धर्माचार्यों और अयोध्या के स्थानीय प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। इससे श्रद्धालुओं का विश्वास दोबारा स्थापित हो सकेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर से जुड़े मामलों में व्यापक स्तर पर जांच कराई जाए तो कई अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। उन्होंने दावा किया कि केवल चढ़ावे ही नहीं बल्कि जमीन से जुड़े मामलों की भी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

आज से राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी कांग्रेस

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर महाराष्ट्र कांग्रेस आज से भाजपा और आरएसएस के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने बयान जारी करते हुए बताया है कि राम भक्तों ने अयोध्या स्थित भगवान राम मंदिर में करोड़ों रुपए के साथ-साथ सोने-चांदी के आभूषण भी दान किए जिन्हें ट्रस्ट के जिम्मेदार लोगों ने लूट लिया। इस पूरी लूट के लिए भाजपा तथा आरएसएस जिम्मेदार है। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह सिर्फ पैसे या दान की चोरी नहीं है बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ भगवान श्रीराम के नाम पर की गई डकैती है। इस पूरे प्रकरण पर कांग्रेस आंदोलन करेगी और इसकी औपचारिक शुरुआत आज से नासिक के ऐतिहासिक कालाराम मंदिर से होगी। इसके बाद 9 से 14 जुलाई तक राज्य के सभी जिलों में रघुपति राघव राजा राम सत्याग्रह आयोजित किया जाएगा। जिला मुख्यालयों में स्थित राम शिव या हनुमान मंदिरों में यह सत्याग्रह किया जाएगा। कांग्रेस का ऐलान शिवसेना यूबीटी के 5 जुलाई को शुरू किए गए राज्यव्यापी राम रक्षा आंदोलन के एक दिन बाद आया है। शिवसेना यूबीटी ने भी अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं और चढ़ावे के गबन के विरोध में आंदोलन शुरू किया है।

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