पश्चिम बंगाल में बागी टीएमसी गुट पर सियासी संकट विकट

बंगाल विस सचिवालय ने 7 दिनों में मांगा जवाब

  • दल-बदल मामले में टीमएसी गुट के 1० विधायकों को अयोग्यता नोटिस
  • बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ है बागी गुट

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर शुरू हुआ अंदरूनी सत्ता संघर्ष अब औपचारिक दल-बदल विरोधी कानूनी कार्यवाही में बदल चुका है। पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिवालय ने बागी टीएमसी गुट के 10 प्रमुख विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन विधायकों से ममता बनर्जी गुट द्वारा दायर अयोग्यता याचिका पर 7 दिनों के भीतर अपना आधिकारिक जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है। यह कदम वरिष्ठ टीएमसी विधायक सोवनदेब चट्टोपाध्याय द्वारा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के ठीक एक दिन बाद उठाया गया है। चट्टोपाध्याय ने बागी गुट के नेता और विपक्ष के नेता रिताब्रत बनर्जी समेत 10 विधायकों को दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित करने की मांग की है। यह विवाद अब विधानसभा, अदालतों, संसद और चुनाव आयोग समेत कई मंचों पर चल रहा है। ये नोटिस रिताब्रत बनर्जी, अरूप रॉय, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, अखरुज़्ज़मान अंसारी, शिउली साहा, सबीना यास्मीन, बिप्लब मित्रा, जावेद खान और रथिन घोष को जारी किए गए। विधानसभा सूत्रों ने बताया कि उनसे सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया है।
यह संकट मई में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में टीएमसी की हार के बाद पैदा हुआ था। यह टकराव संसद तक भी पहुंच गया है, जहां बागी गुट के 20 लोकसभा सांसदों ने टीएमसी छोडक़र नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया जॉइन कर ली है, जो बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ है। लोकसभा सचिवालय ने भी दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराने की याचिकाओं पर इन 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किए हैं। ये नोटिस सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद जारी किए गए, जिसमें लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने का निर्णय लिया गया था।

पार्टी के भीतर इस मामले पर होगी चर्चा : अंसारी

यह मामला मंगलवार देर रात सामने आया, जब अंसारी ने नोटिस मिलने की पुष्टि की। उन्होंने कहा, हम पार्टी के भीतर इस मामले पर चर्चा करेंगे और समय पर उसी के अनुसार जवाब देंगे। चट्टोपाध्याय, जो विधानसभा में विपक्ष के नेता पद के लिए ममता बनर्जी गुट के उम्मीदवार हैं, ने 7 जुलाई को स्पीकर रथिन बोस को पत्र लिखकर 10 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि इन विधायकों ने पार्टी के हितों के खिलाफ काम किया है। विपक्ष के नेता की नियुक्ति का मुद्दा पहले से ही कलकत्ता हाई कोर्ट में है, जहां चट्टोपाध्याय ने इस पद के लिए रिताब्रत बनर्जी को मान्यता देने के स्पीकर के फैसले को चुनौती दी है। दल-बदल विरोधी कार्यवाही उन घटनाओं के बाद शुरू हुई जब ममता बनर्जी गुट द्वारा चट्टोपाध्याय को नामित किए जाने के बावजूद रिताब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुन लिया गया। बागी गुट ने पार्टी के 80 में से 65 विधायकों के समर्थन का दावा किया है। बाद में उन्होंने अंसारी को मुख्य सचेतक (चीफ़ व्हिप) चुना और पार्टी नेतृत्व के अधिकार को चुनौती देते हुए समानांतर संगठनात्मक गतिविधियां शुरू कीं।

कल्याण बनर्जी ने संभाला मोर्चा

पार्टी नेता और वकील कल्याण बनर्जी ने कहा है कि याचिका में विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग उसी आधार पर की गई है, जैसा बागी सांसदों के खिलाफ कार्यवाही में बताया गया था। हालाँकि, बागी गुट ने इस कदम को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है और विधानसभा सचिवालय के नोटिस को सामान्य प्रक्रिया करार दिया है।

टीएमसी की रैली को मिली अनुमति के खिलाफ याचिका पर 17 सितंबर को सुनवाई

कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक पीठ 17 सितंबर को पश्चिम बंगाल सरकार की उस पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करेगी, जिसमें ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस को हुगली जिले के श्रीरामपुर में एक निजी ज़मीन पर जनसभा करने की अदालत से मिली मंज़ूरी को चुनौती दी गई है। यह जनसभा 11 सितंबर को होनी थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने इस पर रोक लगा दी। अतिरिक्त महाधिवक्ता बिल्वदल भट्टाचार्य ने मंगलवार को अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वि_लराव घुगे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ की अनुमति से पुनर्विचार याचिका दायर की है। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि पुनर्विचार याचिका पर 17 सितंबर को सुनवाई होगी। खंडपीठ ने राज्य सरकार और निजी जमीन के मालिक को पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की अनुमति दे दी। राज्य सरकार और ज़मीन के मालिक ने खंडपीठ के सामने यह सवाल उठाया कि क्या जगन्नाथ ज्यू ट्रस्टी बोर्ड की ज़मीन पर कोई राजनीतिक रैली, आंदोलन या बैठक की जा सकती है। एकल पीठ के आदेश पर श्रीरामपुर में एक निजी ज़मीन पर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की जनसभा आयोजित की जानी थी। राज्य सरकार और निजी मालिक की अपील को वापस लिए जाने के आधार पर निपटाते हुए, खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश पीठ से अनुरोध किया कि अगर कोई पुनर्विचार याचिका दायर की जाती है, तो उस पर 25 सितंबर तक फैसला किया जाए।

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