एसआईआर पर महाराष्ट्र में मचा सियासी घमासान
शरद पवार और उद्धव गुट ने भाजपा पर बोला हमला

- महाराष्ट्र में 2 करोड़ से ज्यादा नाम हटा दिए गए हैं: क्लाइड क्रैस्टो
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन/एसआईआर) को लेकर सियासत तेज हो गई है। एनसीपी (शरद पवार गुट) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड कै्रस्टो ने दावा किया कि राज्य में 2 करोड़ से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं, जो कुल वोटर्स का करीब 21 फीसदी है। वहीं शिवसेना (उद्धव गुट) के एमएलसी अंबादास दानवे ने आरोप लगाया कि बंगाल में भी 98 लाख लोगों के साथ यही तरीका अपनाया गया था, भाजपा हर राज्य में इस प्रक्रिया का इस्तेमाल चुनावी रणनीति के तहत कर रही है।
एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि एसआईआर का मामला देखिए। महाराष्ट्र में 2 करोड़ से ज्यादा नाम हटा दिए गए हैं। अब, जब 2024 में लोकसभा चुनाव हुए, तो चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव से पहले लिस्ट में 40 लाख नाम रजिस्टर किए थे। अब, उन्होंने 2 करोड़ नाम हटा दिए हैं। यह कैसे हुआ? यह बहुत गंभीर मामला है क्योंकि 21 फीसदी नाम हटा दिए गए हैं। 9 करोड़ नाम लिस्ट में थे, अब सिर्फ 7-7.5 करोड़ नाम हैं। क्लाइड क्रैस्टो ने कहा कि जेन-जी इस देश का भविष्य है। आपने देखा कि उन्होंने जंतर-मंतर पर कैसे प्रोटेस्ट किया और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। जिस तरह से वे प्रोटेस्ट कर रहे थे और अपनी मांगें रख रहे थे, उससे पता चलता है कि जेन-जी ही भविष्य है। अगर अखिलेश यादव जेन-जी के साथ काम कर रहे हैं और उन्हें आगे बढ़ा रहे हैं, तो यह बहुत अच्छी बात है।
विमान हादसे में एफआईआर तक दर्ज नहीं हुयी
एनसीपी (शरद पवार गुट) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड कै्रस्टो ने कहा, हमारे अजीत दादा अब हमारे बीच नहीं रहे। हादसे में जो कुछ भी हुआ, जिसमें उनकी जान चली गई, भारतीय जनता पार्टी इस पर जिस तरह की राजनीति कर रही है, वह गलत है। मैं क्यों कह रहा हूं कि भाजपा इस मामले पर राजनीति कर रही है? क्योंकि, आज भी हादसे से संबंधित कोई एफआईआर रजिस्टर नहीं हुई है। भाजपा सरकार में है, तो ऐसा क्यों हो रहा है? हमारी बस यही मांग है कि जो हुआ उसकी एफआईआर रजिस्टर हो और सच, चाहे जो भी हो, सामने आए।?
भाजपा अपने फायदे के लिए कर रही एसआईआरका इस्तेमाल :अंबादास
एसआईआर को लेकर शिवसेना (उद्धव गुट) एमएलसी अंबादास दानवे ने कहा, मैं आपको बता दूं, बंगाल में 98 लाख लोगों के लिए यही तरीका अपनाया गया था। मामला अभी भी कोर्ट में पेंडिंग है। अगर उन 98 लाख लोगों को नहीं हटाया गया होता, तो शायद ममता बनर्जी के लिए चुनाव का नतीजा अलग हो सकता था। इसी तरह, हर राज्य में, भारतीय जनता पार्टी इस प्रोसेस का इस्तेमाल पूरी तरह से अपने राजनीतिक फायदे और अपनी चुनावी रणनीति के तहत कर रही है। अंबादास दानवे ने आगे कहा कि हमने आज यहां विधानसभा क्षेत्रों से बीएलए के प्रतिनिधियों को बुलाया था। उद्धव ठाकरे जी ने सभी बीएलए से बातचीत की। मेरा मानना है कि इसका मतलब यह था कि सभी को बीएलए का महत्व समझना चाहिए। दूसरी बात यह है कि हमारे संगठन में आम लोग काम करते हैं। मुंबई का माहौल अलग है, जबकि ग्रामीण इलाकों का माहौल अलग है।



