दिल्ली में नौ मौतों के मातम पर सियासी कोहराम
केजरीवाल और भारद्वाज पीड़ित परिवार से मिले

- आप ने भाजपा सरकार को घेरा
- व्यवस्था की लापरवाही ने सब कुछ छीन लिया
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली में आग से 9 मौतों के मातम पर सियासी कोहराम मच गया है। आप ने भाजपा की रेखा सरकार को आड़े हाथों लिया है। अरविंद केजरीवाल और आप दिल्ली के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने पालम में हुई आगजनी में अपने नौ सदस्यों को खोने वाले शोक संतप्त परिवार से बातचीत की। मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मुझे पता चला कि जब फायर ब्रिगेड यहां पहुंची, तो उनकी सीढय़िां काम नहीं कर रही थीं। अगर फायर ब्रिगेड ने समय पर कार्रवाई की होती, तो शायद कई जानें बचाई जा सकती थीं।
वहीं, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम में भीषण आग में नौ लोगों की जान जाने के एक दिन बाद, एक शोकाकुल पिता बृहस्पतिवार को अपने जले हुए घर में वापस लौटा और आरोप लगाया कि व्यवस्था की लापरवाही ने उससे वह सब कुछ छीन लिया जो उसे प्रिय था। राजेंद्र कश्यप इस भीषण आग में अपने परिवार के नौ सदस्यों को खो चुके हैं। वह मौजूदा जांच के हिस्से के तहत पुलिस और एफएसएल की टीम के साथ राम चौक बाजार के पास स्थित बुरी तरह क्षतिग्रस्त इमारत में दाखिल हुए। घर से बाहर निकलते ही वह गहरे दुख से भाव-विह्वल हो गए और फूट-फूटकर रोने लगे। उन्होंने अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए कहा, कि यह व्यवस्था की विफलता है। अगर समय पर कार्रवाई हुई होती, तो मेरा परिवार आज जीवित होता।’ पालम मेट्रो स्टेशन के पास भीड़भाड़ वाली एक गली में स्थित चार मंजिला इमारत के तहखाने, भूतल और पहली मंजिल पर कपड़े और सौंदर्य प्रसाधन का व्यवसाय चलता था, जबकि परिवार ऊपरी मंजिलों पर रहता था।
भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने गुंडागर्दी की : केजरीवाल
केजरीवाल ने कहा कि मैं यहां शोक संतप्त परिवार से मिलने आया था। यहां भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने गुंडागर्दी की। एक परिवार ने अपने 9 सदस्यों को खो दिया, उनके प्रति सहानुभूति जताने के बजाय, उन्होंने गुंडागर्दी शुरू कर दी है। भाजपा को इतना नीचे गिरते देखकर मुझे बहुत दुख हुआ है। वे लोगों को शोक संतप्त परिवार से मिलने नहीं दे रहे हैं। उन्हें धमकियां दी जा रही हैं। यह बहुत दुखद है।
केजरीवाल व सिसोदिया को हाईकोर्ट से मिली राहत, 2 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई
दिल्ली उच्च न्यायालय ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य को ईडी की उस याचिका पर जवाब देने के लिए समय दिया, जिसमें आबकारी नीति भ्रष्टाचार मामले में सभी को बरी करते समय विशेष न्यायालय द्वारा की गई कुछ प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने सभी आरोपियों को उनके वकीलों के अनुरोध पर समय दिया। ईडी की ओर से सहायक सरकारी वकील एसवी राजू और विशेष वकील जोहेब हुसैन उपस्थित हुए। शुरुआत में अभियुक्तों के वकील ने याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। इस पर हुसैन ने कहा कि उनके जवाब मंगवाने की कोई आवश्यकता नहीं है और सभी अभियुक्तों को याचिका की प्रति विधिवत रूप से दी जा चुकी है। राजू ने कहा कि अभियुक्त केवल कार्यवाही में देरी करना चाहते हैं और यदि एजेंसी के पक्ष में कोई आदेश पारित होता है तो उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा। न्यायधीश ने प्रतिवादियों के वकील से कहा कि मुझे समझ नहीं आ रहा। एक तरफ अभियोजन पक्ष कह रहा है कि निचली अदालत के न्यायाधीश ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर फैसला सुनाया है। मैंने उन्हें बताया था कि मैं भी ऐसी टिप्पणियां करता हूं। मेरा मानना था कि मुझे यह तय करना होगा कि न्यायाधीश ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर फैसला सुनाया है या नहीं। आप ने कहा था कि आप जवाब दाखिल करेंगे। अब आप कह रहे हैं कि आपको 600 पन्ने पढऩे हैं। आपको एक और हफ्ता चाहिए, तो ले लीजिए। दोपहर के भोजन के बाद के सत्र में जब मामले पर सुनवाई हुई तो अदालत ने केजरीवाल और अन्य को ईडी की याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया।



